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US-Israel Military Campaign Against Iran: Nuclear Deterrence Double Standards and the Risks to Global Order

अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...

09 April 2025 Current Affairs in Hindi

 UPSC Current Affairs : April 2025

1-"नमामि गंगे" परियोजना की शुरुआत के एक दशक बाद इसकी उपलब्धियों और चुनौतियों की समीक्षा करें।

(Review the achievements and challenges of the Namami Gange Project a decade after its launch.)


उत्तर का प्रारूप:

परिचय:

"नमामि गंगे" योजना वर्ष 2014 में प्रारंभ की गई थी। इसका उद्देश्य गंगा नदी को स्वच्छ, अविरल और निर्मल बनाना है। यह भारत सरकार की एक फ्लैगशिप परियोजना है जो पर्यावरण मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय और अन्य निकायों के सहयोग से संचालित होती है।


प्रमुख उपलब्धियाँ (Achievements):

  1. जल शुद्धिकरण संयंत्रों की स्थापना:
    अब तक 195 से अधिक STPs (Sewage Treatment Plants) स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से कई कार्यशील हैं।

  2. औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन:
    1,100 से अधिक प्रदूषक उद्योगों की निगरानी की जा रही है और गंगा में अवैध अपशिष्ट छोड़े जाने की घटनाओं में गिरावट आई है।

  3. घाट विकास एवं सौंदर्यीकरण:
    हरिद्वार, वाराणसी, प्रयागराज जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों पर 150+ घाटों का निर्माण/पुनर्निर्माण किया गया है।

  4. नदी सतह की सफाई:
    रिवर स्किमर मशीनों द्वारा नदी की सतह से टन के हिसाब से कचरा हटाया गया।

  5. जैव विविधता संरक्षण:
    गंगा डॉल्फिन, कछुए आदि जलजीवों के संरक्षण हेतु विशेष कार्यक्रम चलाए गए हैं।

  6. जनभागीदारी व जागरूकता:
    "गंगा उत्सव", "गंगा रन", "गंगा एंबेसेडर" जैसे अभियानों से लोगों की भागीदारी बढ़ी है।


प्रमुख चुनौतियाँ (Challenges):

  1. सीवेज उपचार संयंत्रों की क्षमता से कम संचालन:
    कई STPs अभी तक पूर्ण क्षमता से नहीं चल रहे हैं या तकनीकी समस्याओं से जूझ रहे हैं।

  2. ग्रामीण क्षेत्रों में नालीकरण की कमी:
    छोटे शहरों और गांवों में सीवेज नेटवर्क का अभाव अभी भी एक बड़ी बाधा है।

  3. जनसंख्या दबाव और शहरीकरण:
    गंगा किनारे बढ़ती जनसंख्या और शहरी फैलाव से प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है।

  4. औद्योगिक अपशिष्ट का अवैध निस्तारण:
    कुछ उद्योग अब भी अपशिष्ट को गुपचुप तरीके से नदी में बहा रहे हैं।

  5. राज्यों के बीच समन्वय की कमी:
    उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में प्रशासनिक तालमेल की कमी देखी गई है।

  6. फंड का उपयोग और पारदर्शिता:
    परियोजना के लिए आवंटित बजट का पूरा उपयोग नहीं हो पाया है और निगरानी तंत्र में पारदर्शिता की आवश्यकता है।


निष्कर्ष:

"नमामि गंगे" ने गंगा को पुनर्जीवित करने की दिशा में सकारात्मक पहल की है और कुछ क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति भी हुई है। किंतु दीर्घकालिक सफलता के लिए तकनीकी दक्षता, प्रशासनिक सहयोग, पारदर्शिता और जन भागीदारी को और मजबूत करना होगा। साथ ही, इसे "नदी घाटी प्रबंधन" की व्यापक दृष्टि से भी जोड़ना आवश्यक है।



2-“भारत और फ्रांस के बीच हुई रक्षा डील भारत की समुद्री शक्ति को किस प्रकार सुदृढ़ करती है?” – का विश्लेषणात्मक उत्तर दीजिए। संपादकीय लेख व अन्य संभावित प्रश्न के लिए यहां क्लिक कीजिए👈


उत्तर:

भारत और फ्रांस के बीच हाल ही में हुआ ₹63,000 करोड़ का रक्षा समझौता, जिसमें भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल मरीन फाइटर जेट की खरीद की गई है, भारत की समुद्री शक्ति को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह सौदा भारत की रक्षा नीति, समुद्री रणनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में नए आयाम जोड़ता है।


1. समुद्री शक्ति में रणनीतिक बढ़त:

  • राफेल मरीन जेट्स अत्याधुनिक तकनीक से लैस हैं, जो हवा से समुद्र में हमले और बहुस्तरीय निगरानी में सक्षम हैं।
  • इनकी तैनाती से भारतीय नौसेना की ऑफशोर डिटेरेंस (Offshore Deterrence) क्षमता में वृद्धि होगी।

2. विमानवाहक पोत की क्षमता में वृद्धि:

  • इन लड़ाकू विमानों को भारत के स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत पर तैनात किया जाएगा।
  • इससे नौसेना की मल्टी-डोमेन ऑपरेशन की क्षमता में उल्लेखनीय इजाफा होगा।

3. हिंद-प्रशांत क्षेत्र में प्रभाव:

  • चीन की बढ़ती समुद्री गतिविधियों के बीच यह सौदा भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने में मदद करेगा।
  • भारत की “सिक्योरिटी एंड ग्रोथ फॉर ऑल इन द रीजन (SAGAR)” नीति को बल मिलेगा।

4. फ्रांस के साथ रणनीतिक साझेदारी:

  • यह डील भारत और फ्रांस के बीच मजबूत होते रक्षा संबंधों को दर्शाती है।
  • इससे भारत को दीर्घकालिक तकनीकी सहयोग और ट्रेनिंग समर्थन भी प्राप्त होगा।

5. आत्मनिर्भरता की दिशा में योगदान:

  • डील में संभावित टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और रख-रखाव के स्वदेशीकरण से भारत की आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।
  • रक्षा उत्पादन में घरेलू कंपनियों की भागीदारी बढ़ेगी।

निष्कर्ष:

यह रक्षा समझौता न केवल नौसेना की युद्ध क्षमता को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगा, बल्कि भारत की समुद्री नीति, रणनीतिक संतुलन और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भी प्रभावशाली भूमिका निभाएगा। यह सौदा भारत को एक वैश्विक समुद्री शक्ति के रूप में उभारने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।



3-भारत द्वारा पक्षियों से मानवों में फैलने वाली बीमारियों पर किए जा रहे अध्ययन के आलोक में "वन हेल्थ" दृष्टिकोण की प्रासंगिकता पर चर्चा करें।

(Discuss the relevance of the "One Health" approach in light of India’s study on bird-to-human disease transmission.)


उत्तर का प्रारूप:

परिचय:

हाल ही में भारत सरकार ने सिक्किम, तमिलनाडु और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में पक्षियों से मानवों में फैलने वाली बीमारियों (Zoonotic Diseases) पर अध्ययन शुरू किया है। यह कदम "वन हेल्थ" (One Health) दृष्टिकोण के महत्व को रेखांकित करता है, जो मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य को एकीकृत रूप में देखता है।


वन हेल्थ दृष्टिकोण क्या है?

"वन हेल्थ" एक अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त रणनीति है जो मानती है कि मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य और पारिस्थितिकीय स्वास्थ्य परस्पर जुड़े हुए हैं। इसका उद्देश्य समन्वित, बहु-क्षेत्रीय और बहु-अनुशासनात्मक प्रयासों के माध्यम से संक्रमणों की रोकथाम और प्रबंधन करना है।


प्रासंगिकता (Relevance) – पक्षीजनित बीमारियों के सन्दर्भ में:

  1. नवीन और पुनः उभरती बीमारियाँ:
    बर्ड फ्लू, एवियन इन्फ्लुएंजा जैसी बीमारियाँ मानव समाज को महामारी की ओर ढकेल सकती हैं। "वन हेल्थ" दृष्टिकोण इनके शुरुआती पहचान और नियंत्रण में सहायक है।

  2. प्रभावी निगरानी और डेटा साझाकरण:
    पशुपालन, पर्यावरण, और स्वास्थ्य विभागों के बीच सहयोग से संक्रामक रोगों की निगरानी और पूर्व चेतावनी प्रणाली सशक्त बनती है।

  3. रोगों का क्रॉस-स्पीशीज़ ट्रांसमिशन रोकना:
    वन्यजीवों, घरेलू पशुओं और इंसानों के बीच संपर्क बढ़ने से संक्रमण की आशंका बढ़ती है। वन हेल्थ दृष्टिकोण इनसे निपटने के लिए नीति और प्रोटोकॉल विकसित करता है।

  4. प्राकृतिक आपदाओं और जलवायु परिवर्तन का प्रभाव:
    पर्यावरणीय असंतुलन से रोगजनक जीवों का प्रसार बढ़ता है। वन हेल्थ में पर्यावरणीय डेटा के माध्यम से इन प्रभावों की बेहतर समझ विकसित की जाती है।

  5. COVID-19 जैसे वैश्विक उदाहरण:
    कोविड महामारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब तक मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य को एक साथ नहीं देखा जाएगा, महामारी का खतरा बना रहेगा।


भारत की पहलें (भारत में One Health की दिशा में प्रयास):

  • "राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन" (प्रस्तावित)
  • ICAR, ICMR, MoEF और स्वास्थ्य मंत्रालय के बीच सहयोग
  • राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NADCP)
  • पशु और मानव स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं का एकीकरण

निष्कर्ष:

"वन हेल्थ" दृष्टिकोण आज की वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने का एकमात्र टिकाऊ समाधान है। भारत द्वारा पक्षीजनित रोगों पर किया जा रहा अध्ययन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भविष्य की महामारियों की रोकथाम हेतु नीति निर्माण में आधार बन सकता है। इस दृष्टिकोण को राष्ट्रीय नीति, अनुसंधान, शिक्षा और प्रशासन में पूर्णतः एकीकृत करना समय की माँग है।




4-भारत में ग्रामीण महिलाओं की श्रम भागीदारी में वृद्धि के क्या कारण हैं? इस परिवर्तन के सामाजिक और आर्थिक प्रभावों पर चर्चा करें।

(What are the reasons behind the increase in rural women's labor force participation in India? Discuss the social and economic impacts of this change.)


परिचय:

2023-24 के आंकड़ों के अनुसार भारत में ग्रामीण महिलाओं की श्रम भागीदारी दर (Labor Force Participation Rate - LFPR) बढ़कर 47.6% हो गई है, जो कि एक उल्लेखनीय सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का संकेत है। पहले यह दर 2017-18 में 24-26% के आसपास थी।


भागीदारी में वृद्धि के कारण (Reasons for Increase):

  1. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA):

    • महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने में इस योजना की बड़ी भूमिका रही है।
  2. स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups - SHGs) का विस्तार:

    • ग्रामीण महिलाओं की वित्तीय और सामाजिक सशक्तिकरण में SHGs ने सक्रिय भूमिका निभाई है।
  3. ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता और शिक्षा में सुधार:

    • डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कार्य करने की क्षमता बढ़ने से नई नौकरियों तक पहुँच आसान हुई है।
  4. कोविड-19 के बाद प्रवृत्त बदलाव:

    • महामारी के कारण परिवारों की आय में गिरावट आई, जिससे महिलाएँ भी आजीविका में सक्रिय रूप से जुड़ने लगीं।
  5. महिलाओं के लिए कौशल विकास कार्यक्रम:

    • सरकार और गैर-सरकारी संस्थाओं द्वारा सिलाई, बुनाई, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी आदि में प्रशिक्षण देने से आत्मनिर्भरता बढ़ी।
  6. उद्यमिता में वृद्धि:

    • महिला किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), छोटे व्यवसायों और ऑनलाइन बिक्री प्लेटफॉर्म से महिलाएँ रोजगारदाता भी बन रही हैं।

सामाजिक प्रभाव (Social Impact):

  1. महिलाओं की सामाजिक स्थिति में सुधार:

    • आय अर्जन से निर्णय-निर्माण में भागीदारी बढ़ी है और पारिवारिक स्तर पर सम्मान भी।
  2. लिंग आधारित पूर्वाग्रहों में कमी:

    • महिलाओं को ‘आश्रित’ न मानकर ‘सहयोगी’ माना जाने लगा है।
  3. लड़कियों की शिक्षा पर सकारात्मक प्रभाव:

    • कामकाजी माताओं के कारण बालिकाओं की शिक्षा को परिवार में अधिक महत्व दिया जा रहा है।
  4. स्वास्थ्य और पोषण में सुधार:

    • आय बढ़ने से परिवार खासकर बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश संभव हुआ है।

आर्थिक प्रभाव (Economic Impact):

  1. ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मजबूती:

    • अधिक कार्यबल के कारण उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि हुई है।
  2. घरेलू आय में सुधार:

    • महिला आय से परिवार की आर्थिक स्थिरता और बचत दर में वृद्धि होती है।
  3. स्थानीय स्तर पर उद्यमिता का विकास:

    • महिलाएँ स्वयं सहायता समूहों या घरेलू उद्योगों के माध्यम से रोजगार सृजन में सहायक हो रही हैं।
  4. विकास में समावेशिता:

    • महिला श्रम शक्ति की भागीदारी से समावेशी और संतुलित आर्थिक विकास संभव होता है।

निष्कर्ष:

ग्रामीण महिलाओं की श्रम भागीदारी में वृद्धि न केवल एक आर्थिक संकेतक है बल्कि यह सामाजिक बदलाव का भी प्रतीक है। इस प्रवृत्ति को स्थायी बनाए रखने के लिए संरचित श्रम बाजार, सुरक्षित कार्य वातावरण, बाल देखभाल सुविधाएँ और लैंगिक समानता पर आधारित नीतियाँ आवश्यक हैं। इससे भारत को समावेशी विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायता मिलेगी।


5-रेसिप्रोकल टैरिफ़ पर विराम: वैश्विक व्यापार को स्थिरता की सांस?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा 90 दिनों के लिए रेसिप्रोकल टैरिफ़ को स्थगित करने की घोषणा न केवल वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में अचानक आए तूफान को कुछ समय के लिए थामने जैसा है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार राजनीति में रणनीतिक पुनर्विचार की ओर भी संकेत करता है। इस कदम ने न केवल शेयर बाजारों को राहत दी, बल्कि कांग्रेस में राजनीतिक तनाव को भी कुछ हद तक शांत किया।

रेसिप्रोकल टैरिफ़, मूलतः "जैसा व्यवहार वैसा शुल्क" की नीति है, जिसमें अमेरिका उन देशों पर समान या अधिक शुल्क लगाता है जो अमेरिकी वस्तुओं पर टैरिफ लगाते हैं। ट्रम्प प्रशासन का यह तर्क रहा है कि अमेरिका लंबे समय से व्यापारिक असंतुलन झेलता आया है, और यह नीति 'फेयर ट्रेड' सुनिश्चित करेगी। परंतु इस नीति की आलोचना भी हुई – इसे संरक्षणवाद की ओर वापसी और वैश्विक आपूर्ति शृंखला के लिए खतरे के रूप में देखा गया।

90 दिनों की यह स्थगन अवधि, विशेष रूप से उस समय आई जब चीन के खिलाफ टैरिफ़ दर 125% कर दी गई, यह स्पष्ट करता है कि अमेरिका चीन के साथ व्यापार युद्ध को तेज करना चाहता है, जबकि अन्य सहयोगी देशों के लिए अपने रुख को कुछ समय के लिए लचीला बना रहा है।

बॉन्ड बाजार में आई अस्थिरता, डॉलर की बढ़ती मजबूती और घरेलू राजनीतिक दबाव इस फैसले के पीछे प्रमुख कारक रहे। आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका अपनी टैरिफ नीति में लचीलापन नहीं लाता, तो इससे वैश्विक व्यापार मंदी, मुद्रास्फीति और निवेश प्रवाह में असंतुलन पैदा हो सकता है।

भारत के लिए यह अवसर और चेतावनी दोनों है। एक ओर, अमेरिका-चीन व्यापार तनाव के चलते भारत अपने निर्यात में वृद्धि कर सकता है, वहीं दूसरी ओर, अमेरिका द्वारा 'रेसिप्रोकल' शब्द का उपयोग भारत पर भी समान टैरिफ का दबाव बना सकता है।

निष्कर्षतः, यह टैरिफ विराम अमेरिका के लिए रणनीतिक संतुलन बनाने का प्रयास है, जो वैश्विक व्यापार में विश्वास बहाल करने का मौका देता है। लेकिन स्थायी समाधान के लिए बहुपक्षीय संवाद, WTO जैसी संस्थाओं की पुनर्बहाली और समावेशी आर्थिक दृष्टिकोण की आवश्यकता बनी रहेगी।

9 अप्रैल 2025 UPSC करंट अफेयर्स आधारित क्विज़ दिए गए हैं (Prelims स्तर के संभावित प्रश्न)। 
प्रत्येक टॉपिक से जुड़े 2 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) शामिल हैं।


1. नमामि गंगे परियोजना

Q1. ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

1. यह केवल उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में लागू किया गया है।

2. इसका उद्देश्य गंगा नदी को अविरल, निर्मल और जैवविविधतायुक्त बनाना है।

3. इसमें गंगा डॉल्फिन संरक्षण को भी सम्मिलित किया गया है।

कूट:
A) केवल 2
B) केवल 2 और 3
C) केवल 1 और 2
D) 1, 2 और 3

उत्तर: B

Q2. निम्न में से कौन-सी एजेंसी नमामि गंगे परियोजना के क्रियान्वयन में शामिल नहीं है?
A) जल शक्ति मंत्रालय
B) पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
C) ISRO
D) राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन

उत्तर: C

2. भारत-फ्रांस रक्षा डील

Q3. हाल ही में भारत द्वारा फ्रांस से खरीदे जा रहे राफेल मरीन विमानों को किस भारतीय युद्धपोत पर तैनात किया जाएगा?
A) INS विराट
B) INS विक्रांत
C) INS विक्रमादित्य
D) INS अरिहंत

उत्तर: B

Q4. भारत और फ्रांस के रक्षा सहयोग का क्या प्रमुख उद्देश्य है?
A) हिंद महासागर में चीन की गतिविधियों का संतुलन
B) एंटी-टेररिज्म ऑपरेशन
C) मछली पालन सहयोग
D) UN शांति मिशन

उत्तर: A

3. वन हेल्थ दृष्टिकोण

Q5. ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?
A) यह केवल मानव स्वास्थ्य पर केंद्रित रणनीति है।
B) यह मानव, पशु और पर्यावरण स्वास्थ्य के बीच संबंध को मान्यता देता है।
C) इसका उद्देश्य संक्रामक रोगों की रोकथाम हेतु समन्वित प्रयास करना है।
D) यह COVID-19 जैसी महामारियों के रोकथाम में सहायक है।

उत्तर: A

Q6. भारत में वन हेल्थ के क्रियान्वयन हेतु किस संगठन को शामिल नहीं किया गया है?
A) ICMR
B) ICAR
C) NASA
D) पर्यावरण मंत्रालय

उत्तर: C

4. ग्रामीण महिलाओं की श्रम भागीदारी

Q7. ग्रामीण महिलाओं की श्रम भागीदारी में हालिया वृद्धि के लिए कौन-सा/से कारण उत्तरदायी हैं?

1. MGNREGA

2. स्वयं सहायता समूह

3. डिजिटल साक्षरता

4. कृषि सब्सिडी

कूट:
A) केवल 1 और 2
B) केवल 3 और 4
C) 1, 2 और 3
D) सभी सही

उत्तर: C

Q8. ग्रामीण महिलाओं की श्रम भागीदारी बढ़ने से कौन-से प्रभाव देखे गए हैं?
A) परिवार की आय में वृद्धि
B) बालिकाओं की शिक्षा में गिरावट
C) पोषण स्तर में सुधार
D) A और C दोनों

उत्तर: D

5. रेसिप्रोकल टैरिफ

Q9. रेसिप्रोकल टैरिफ नीति का मुख्य उद्देश्य क्या है?
A) व्यापार घाटा बढ़ाना
B) संरक्षणवाद को बढ़ावा देना
C) वैश्विक व्यापार नियमों को सरल बनाना
D) निर्यात को हतोत्साहित करना

उत्तर: B

Q10. अमेरिका द्वारा 90 दिनों का रेसिप्रोकल टैरिफ विराम देने के क्या संभावित वैश्विक प्रभाव हो सकते हैं?
A) वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में स्थिरता
B) शेयर बाजार में अस्थिरता
C) WTO की भूमिका समाप्त
D) वैश्विक निवेश में गिरावट

उत्तर: A

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✍️ARVIND SINGH PK REWA

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भारत की चुप्पी या कूटनीतिक विचलन? ईरान के सुप्रीम लीडर की हत्या पर विदेश नीति की बड़ी परीक्षा सन्दर्भ- सोनिया गांधी का ओपिनियन लेख: ईरान के सुप्रीम लीडर की हत्या पर भारत सरकार की चुप्पी मात्र तटस्थता नहीं, बल्कि सिद्धांतों से पीछे हटना है 3 मार्च 2026 को Sonia Gandhi द्वारा The Indian Express में प्रकाशित लेख—“Government’s silence on killing of Iran leader is not neutral, it is abdication”—सिर्फ एक राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि भारत की विदेश नीति की आत्मा पर उठाया गया प्रश्न है। 1 मार्च 2026 को ईरान के सुप्रीम लीडर Ayatollah Ali Khamenei की लक्षित हत्या ने पश्चिम एशिया को एक बार फिर युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया है। अमेरिका–इज़राइल की संयुक्त कार्रवाई और उसके बाद ईरान की जवाबी प्रतिक्रिया ने क्षेत्रीय तनाव को वैश्विक संकट में बदल दिया है। इस पृष्ठभूमि में भारत सरकार की चुप्पी—या सीमित शब्दों में व्यक्त “गहरी चिंता”—को लेकर उठे प्रश्न महज़ विपक्ष की आलोचना नहीं हैं; वे उस नैतिक और रणनीतिक संतुलन पर केंद्रित हैं जिसने दशकों तक भारत की विदेश नीति को दिशा दी है। चुप्पी: तटस्थता या...

West Asia War 2026: Strategic Motives, Regime Change Debate and India’s Diplomatic Challenge

पश्चिम एशिया का युद्ध: शक्ति-राजनीति, शासन परिवर्तन की राजनीति और भारत की कूटनीतिक परीक्षा प्रस्तावना: एक क्षेत्रीय युद्ध से वैश्विक संकट तक 28 फरवरी 2026 को संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध आरम्भ किए गए सैन्य अभियान ने पश्चिम एशिया को एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीतिक संकट के केंद्र में ला खड़ा किया है। यह संघर्ष केवल दो या तीन देशों के बीच सैन्य टकराव नहीं है; बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, ऊर्जा भू-राजनीति, शक्ति संतुलन और कूटनीतिक नैतिकता की परीक्षा बन गया है। युद्ध के सात दिनों के भीतर ही इसके प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार मार्गों और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में दिखाई देने लगे हैं। तेल की कीमतों में तेज उछाल, होर्मुज जलडमरूमध्य की अस्थिरता, क्षेत्रीय शक्तियों की संभावित भागीदारी और वैश्विक महाशक्तियों की रणनीतिक गणनाएँ इस संकट को और जटिल बना रही हैं। इस संघर्ष को समझने के लिए केवल सैन्य घटनाओं का विश्लेषण पर्याप्त नहीं है। इसके पीछे छिपे रणनीतिक तर्क, शासन परिवर्तन की भू-राजनीतिक महत्वाकांक्षाएँ, अंतरराष्ट्रीय कानून की सीमाएँ और उ...

Pariksha Pe Charcha 2026: PM Modi’s Motivational Message for Students on Exams, Skills, Balance & Success

परीक्षा पे चर्चा 2026: परीक्षा से आगे जीवन की तैयारी का राष्ट्रीय संवाद परीक्षा का समय आते ही देश के करोड़ों छात्रों के मन में एक ही सवाल गूंजने लगता है— क्या मैं सफल हो पाऊँगा? इसी प्रश्न, इसी तनाव और इसी अनिश्चितता को संवाद और आत्मविश्वास में बदलने का मंच है ‘परीक्षा पे चर्चा’ । 6 फरवरी 2026 को आयोजित परीक्षा पे चर्चा के 9वें संस्करण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से सीधी बातचीत की। सुबह 10 बजे शुरू हुए इस कार्यक्रम में दिल्ली, गुजरात के देवमोगरा, तमिलनाडु के कोयंबटूर, छत्तीसगढ़ के रायपुर और असम के गुवाहाटी से जुड़े छात्रों ने भाग लिया। कार्यक्रम का लाइव प्रसारण दूरदर्शन, पीएम मोदी के यूट्यूब चैनल और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर किया गया। इस बार 4.5 करोड़ से अधिक रजिस्ट्रेशन होना यह दर्शाता है कि आज का छात्र केवल परीक्षा टिप्स नहीं, बल्कि जीवन मार्गदर्शन चाहता है। 🌱 सपने देखें, लेकिन एक्शन के साथ प्रधानमंत्री मोदी का संदेश बेहद स्पष्ट और प्रेरक था— “सपने न देखना जुर्म है, लेकिन सिर्फ सपनों की गुनगुनाहट से काम नहीं चलता।” उन्हों...

Russia–India Energy Cooperation Amid Global Energy Crisis 2026: Strategic Significance, Geopolitical Risks and Energy Security Implications

वैश्विक ऊर्जा संकट में रूस-भारत ऊर्जा सहयोग: सामरिक महत्व और चुनौतियाँ परिचय: होर्मुज़ से उठता वैश्विक झटका मार्च 2026 के प्रारंभ में पश्चिम एशिया में तीव्र होते तनाव—विशेषकर ईरान, संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल के बीच—ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को अस्थिर कर दिया है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य विश्व के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20% वहन करता है। इस मार्ग में व्यवधान ने ब्रेंट क्रूड को 80 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुँचा दिया, जिससे भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर गंभीर आर्थिक दबाव पड़ा है। इसी पृष्ठभूमि में रूस ने भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने की रणनीतिक पेशकश की है। यह कदम केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा भू-राजनीति में बहुध्रुवीय सहयोग का संकेत है। भारत की स्थिति और ऊर्जा तैयारी भारत अपनी कुल तेल आवश्यकता का लगभग 85% आयात करता है। खाड़ी क्षेत्र पर इसकी निर्भरता लंबे समय से ऊर्जा सुरक्षा की एक संरचनात्मक चुनौती रही है। सरकार के अनुसार, भारत के पास वाणिज्यिक एवं रणनीतिक भंडार मिलाकर लगभग 100 मिलियन बैरल क्रूड उपलब्ध है, जो लगभग 40–45 दिनों की मांग पूरी कर सकता है। पेट्र...

US–Israel–Iran War 2026: Global Impact and India’s Strategic Response

मध्य पूर्व में वर्तमान संघर्ष: यूएस–इज़राइल–ईरान युद्ध और भारत की रणनीतिक चुनौती प्रस्तावना: एक क्षेत्रीय युद्ध से वैश्विक अस्थिरता तक फरवरी–मार्च 2026 में मध्य पूर्व एक ऐसे सैन्य संघर्ष का केंद्र बन गया है जिसने क्षेत्रीय समीकरणों को हिला दिया है। 28 फरवरी 2026 को United States और Israel द्वारा Iran के सैन्य, मिसाइल और परमाणु-संबंधित ठिकानों पर संयुक्त हमलों ने एक पूर्ण युद्ध की स्थिति उत्पन्न कर दी। 1 मार्च 2026 को ईरानी राज्य मीडिया द्वारा सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei की मृत्यु की पुष्टि ने इस संघर्ष को केवल सैन्य टकराव से आगे बढ़ाकर शासन-परिवर्तन की दिशा में मोड़ दिया है। यह युद्ध अब सीमित हवाई हमलों से आगे बढ़कर प्रॉक्सी समूहों, समुद्री मार्गों और खाड़ी देशों की सुरक्षा तक फैल चुका है। विशेष रूप से Strait of Hormuz में जहाजरानी बाधित होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा संकट मंडरा रहा है। संघर्ष की पृष्ठभूमि: परमाणु कार्यक्रम से प्रॉक्सी युद्ध तक इस युद्ध की जड़ें कई वर्षों से विकसित हो रहे तनाव में निहित हैं: परमाणु कार्यक्रम का विवाद – ईरान के परमाणु संवर्धन कार...

US-Israel Military Campaign Against Iran: Nuclear Deterrence Double Standards and the Risks to Global Order

अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...

NCERT Judicial Corruption Controversy 2026: Supreme Court Intervention and Impact on Education & Democracy

एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक में 'न्यायिक भ्रष्टाचार' का समावेश: मौलिक समग्र प्रभाव का विश्लेषण परिचय राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक में 'न्यायिक भ्रष्टाचार' (Judicial Corruption) और अदालती मामलों की लंबित स्थिति जैसे मुद्दों को शामिल करने का निर्णय एक बड़े विवाद का कारण बना। इस परिवर्तन ने न केवल शिक्षा और न्यायपालिका के बीच टकराव को जन्म दिया, बल्कि अकादमिक स्वतंत्रता, संस्थागत गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों पर गहन बहस छेड़ दी। 25 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर स्वत: संज्ञान (suo motu) लेकर केस दर्ज किया, जिसके बाद एनसीईआरटी ने किताब वापस ले ली और संबंधित हिस्से को हटाने का फैसला किया। यह घटना शिक्षा प्रणाली के मौलिक ढांचे पर दूरगामी प्रभाव डालती है, जहां सच्चाई की शिक्षा और संस्थाओं की छवि के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इस लेख में हम इस विवाद के समग्र प्रभावों का विश्लेषण करेंगे, जिसमें शिक्षा, न्यायपालिका, समाज और लोकतंत्र पर पड़ने वाले प्रभाव शामिल हैं। विवाद की पृष्ठभूमि एनस...