भारत की गाजा शांति योजना में भागीदारी: ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में पर्यवेक्षक के रूप में भारत की कूटनीतिक उपस्थिति परिचय वर्ष 2026 में गाजा पट्टी का प्रश्न केवल इजराइल–फिलिस्तीन संघर्ष तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक शक्ति-संतुलन, मानवीय हस्तक्षेप और बहुपक्षीय कूटनीति की परीक्षा बन गया है। ऐसे समय में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा प्रारंभ किया गया ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) एक नई पहल के रूप में सामने आया है, जिसका घोषित उद्देश्य गाजा में युद्धविराम की निगरानी, पुनर्निर्माण, हमास के निरस्त्रीकरण तथा एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण व्यवस्था की स्थापना है। फरवरी 2026 में वाशिंगटन डीसी में आयोजित इस बोर्ड की पहली बैठक में भारत ने पूर्ण सदस्य के बजाय पर्यवेक्षक (Observer) के रूप में भाग लिया। यह निर्णय साधारण कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत की संतुलित और बहुस्तरीय विदेश नीति का प्रतीक है। ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पृष्ठभूमि: संयुक्त राष्ट्र से परे एक वैकल्पिक मंच? ट्रंप प्रशासन ने जनवरी 2026 में विश्व आर्थिक मंच (दावोस) के दौरान इस पहल की घोषणा की थी। इसे एक ऐसे मंच के रूप में...
ट्रंप–सुप्रीम कोर्ट टकराव: टैरिफ फैसले के मौलिक प्रभाव और वैश्विक असर 20 फरवरी 2026 को Supreme Court of the United States ने 6–3 के बहुमत से एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए व्यापक टैरिफ को असंवैधानिक करार दिया। यह केवल एक आर्थिक नीति पर न्यायिक टिप्पणी नहीं थी; यह अमेरिकी संवैधानिक ढांचे, शक्तियों के संतुलन, वैश्विक व्यापार व्यवस्था और समकालीन पॉपुलिस्ट राजनीति के भविष्य पर गहरा प्रभाव डालने वाला निर्णय है। फैसले के कुछ घंटों बाद ही ट्रंप प्रशासन ने ट्रेड एक्ट, 1974 की धारा 122 के तहत 10% “ग्लोबल टैरिफ” लागू करने की घोषणा कर दी—जिससे स्पष्ट हो गया कि यह संघर्ष समाप्त नहीं हुआ, बल्कि एक नए चरण में प्रवेश कर गया है। नीचे इस पूरे घटनाक्रम के मौलिक प्रभावों का बहुआयामी विश्लेषण प्रस्तुत है। 1. संवैधानिक संतुलन की पुनर्परिभाषा: कार्यपालिका बनाम न्यायपालिका अमेरिकी संविधान कांग्रेस को टैक्स और टैरिफ लगाने की स्पष्ट शक्ति देता है। IEEPA (1977) का उद्देश्य राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति में सीमित आर्...