Bangladesh’s Political Transition and Sub-Regional Geopolitics: Interpreting Muhammad Yunus’s Farewell Message on India’s Northeast
बांग्लादेश में राजनीतिक संक्रमण और उप-क्षेत्रीय भू-राजनीति: मुहम्मद यूनुस के विदाई संदेश का विश्लेषण
परिचय
फरवरी 2026 में बांग्लादेश के अंतरिम मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस द्वारा दिया गया विदाई संदेश दक्षिण एशिया की उप-क्षेत्रीय राजनीति में एक महत्त्वपूर्ण हस्तक्षेप के रूप में उभरा। इस संदेश में उन्होंने भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों—जिन्हें सामान्यतः ‘सात बहनें’ कहा जाता है—को नेपाल और भूटान के साथ जोड़ते हुए एक उप-क्षेत्रीय आर्थिक ढांचे की कल्पना प्रस्तुत की। यह वक्तव्य केवल एक आर्थिक प्रस्ताव नहीं था, बल्कि यह बदलते शक्ति-संतुलन, बांग्लादेश की उभरती विदेश नीति और भारत-बांग्लादेश संबंधों में व्याप्त संवेदनशीलताओं का द्योतक भी था।यह लेख यूनुस के विदाई संदेश की पृष्ठभूमि, उसके भू-राजनीतिक निहितार्थ और दक्षिण एशिया में उप-क्षेत्रीय सहयोग की संभावनाओं का अकादमिक, संतुलित और विश्लेषणात्मक मूल्यांकन प्रस्तुत करता है।
पृष्ठभूमि: बांग्लादेश का राजनीतिक संक्रमण
अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद बांग्लादेश में एक अंतरिम शासन व्यवस्था स्थापित हुई, जिसकी कमान मुहम्मद यूनुस को सौंपी गई। लगभग अठारह महीनों के इस कार्यकाल में अंतरिम सरकार ने शासन-सुधार, संस्थागत पुनर्गठन और विदेश नीति में “रणनीतिक स्वायत्तता” को केंद्रीय सिद्धांत के रूप में प्रस्तुत किया। यूनुस ने बार-बार यह रेखांकित किया कि बांग्लादेश अब “किसी एक शक्ति या देश के निर्देशों से संचालित” नहीं है।
फरवरी 2026 में आम चुनावों के बाद BNP के नेतृत्व में नई निर्वाचित सरकार का गठन हुआ, जिस पर तारिक रहमान का राजनीतिक प्रभाव स्पष्ट माना गया। इसी सत्ता-हस्तांतरण के क्षण में यूनुस का विदाई संदेश सामने आया, जिसने व्यापक क्षेत्रीय बहस को जन्म दिया।
विदाई संदेश का केंद्रीय तर्क
यूनुस ने अपने वक्तव्य में बांग्लादेश के “खुले समुद्र” को वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ने का प्रवेश-द्वार बताया और कहा कि देश की भौगोलिक स्थिति उसे दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच एक सेतु बनाती है। इसी क्रम में उन्होंने उप-क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग का प्रस्ताव रखते हुए कहा कि नेपाल, भूटान और भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों के साथ मिलकर यह क्षेत्र “विशाल आर्थिक संभावनाओं” का दोहन कर सकता है।
यहाँ उल्लेखनीय है कि यूनुस ने भारत का औपचारिक नाम लिए बिना ‘सात बहनों’ को एक पृथक आर्थिक इकाई की भाँति प्रस्तुत किया। इस भाषिक चयन ने संदेश को एक साधारण आर्थिक कल्पना से आगे बढ़ाकर एक संवेदनशील भू-राजनीतिक वक्तव्य बना दिया।
भू-राजनीतिक निहितार्थों का विश्लेषण
1. भारत की संप्रभुता और संवेदनशीलता
भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों को नेपाल-भूटान के साथ एक उप-क्षेत्रीय ढांचे में अलग से प्रस्तुत करना नई दिल्ली के लिए स्वाभाविक रूप से संवेदनशील विषय है। भारत के दृष्टिकोण से यह प्रस्तुति उसकी क्षेत्रीय अखंडता और आंतरिक संघीय संरचना से जुड़ी चिंताओं को उभार सकती है—विशेषकर ऐसे समय में जब द्विपक्षीय संबंध अल्पसंख्यक सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और जल-साझेदारी जैसे मुद्दों पर पहले से दबाव में हैं।
2. बहुध्रुवीय विदेश नीति की अभिव्यक्ति
यूनुस सरकार के कार्यकाल में बांग्लादेश ने चीन, अमेरिका, जापान और यूरोपीय संघ के साथ सक्रिय कूटनीतिक संवाद बढ़ाया। यह रुझान संकेत देता है कि ढाका एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में अपने लिए अधिक रणनीतिक विकल्प खोलना चाहता है। उप-क्षेत्रीय सहयोग का विचार इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है, जहाँ बांग्लादेश स्वयं को एक “कनेक्टिविटी हब” के रूप में स्थापित करना चाहता है।
3. मौजूदा क्षेत्रीय मंचों से संबंध
दक्षिण एशिया में उप-क्षेत्रीय सहयोग के लिए पहले से ही BIMSTEC और BBIN जैसे मंच मौजूद हैं। यूनुस का प्रस्ताव इन पहलों की वैचारिक निरंतरता में देखा जा सकता है, किंतु उनका वक्तव्य—विशेषकर ‘सात बहनों’ के संदर्भ में—इन मंचों की स्थापित राजनीतिक शब्दावली से भिन्न है। यही भिन्नता इसे विवादास्पद भी बनाती है।
भारत–बांग्लादेश संबंधों पर संभावित प्रभाव
यूनुस के विदाई संदेश ने यह स्पष्ट कर दिया कि बांग्लादेश की नई विदेश नीति केवल द्विपक्षीय निर्भरता तक सीमित नहीं रहना चाहती। हालांकि, भारत के साथ बांग्लादेश के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध इतने गहरे हैं कि किसी भी नई सरकार के लिए उन्हें नज़रअंदाज़ करना व्यावहारिक नहीं होगा।
बीएनपी के नेतृत्व वाली नई सरकार के सामने चुनौती यह होगी कि वह भारत की संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखते हुए उप-क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग के विचारों को किस प्रकार आगे बढ़ाती है—क्या वह यूनुस की परिकल्पना को संशोधित करेगी, या उसे अधिक बहुपक्षीय ढांचे में समाहित करेगी।
निष्कर्ष
मुहम्मद यूनुस का विदाई संदेश बांग्लादेश की उभरती रणनीतिक आत्मनिर्भरता और दक्षिण एशिया में बदलते भू-राजनीतिक विमर्श का प्रतीक है। यह संदेश एक ओर आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी की संभावनाओं को रेखांकित करता है, तो दूसरी ओर भारत-बांग्लादेश संबंधों में निहित संवेदनशीलताओं को भी उजागर करता है।
दीर्घकालिक दृष्टि से, दक्षिण एशिया में उप-क्षेत्रीय सहयोग की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सभी पक्ष संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और पारस्परिक विश्वास के सिद्धांतों का सम्मान करते हुए आर्थिक एकीकरण को आगे बढ़ाते हैं। यूनुस का वक्तव्य इसी जटिल संतुलन की ओर संकेत करता है—जहाँ अवसर और चुनौतियाँ साथ-साथ उपस्थित हैं।
With Hindustan Times Inputs
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