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India Joins Trump’s Gaza Peace Board as Observer: Strategic Balance in Middle East Diplomacy 2026

भारत की गाजा शांति योजना में भागीदारी: ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में पर्यवेक्षक के रूप में भारत की कूटनीतिक उपस्थिति परिचय वर्ष 2026 में गाजा पट्टी का प्रश्न केवल इजराइल–फिलिस्तीन संघर्ष तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक शक्ति-संतुलन, मानवीय हस्तक्षेप और बहुपक्षीय कूटनीति की परीक्षा बन गया है। ऐसे समय में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प  द्वारा प्रारंभ किया गया ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) एक नई पहल के रूप में सामने आया है, जिसका घोषित उद्देश्य गाजा में युद्धविराम की निगरानी, पुनर्निर्माण, हमास के निरस्त्रीकरण तथा एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण व्यवस्था की स्थापना है। फरवरी 2026 में वाशिंगटन डीसी में आयोजित इस बोर्ड की पहली बैठक में भारत ने पूर्ण सदस्य के बजाय पर्यवेक्षक (Observer) के रूप में भाग लिया। यह निर्णय साधारण कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत की संतुलित और बहुस्तरीय विदेश नीति का प्रतीक है। ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पृष्ठभूमि: संयुक्त राष्ट्र से परे एक वैकल्पिक मंच? ट्रंप प्रशासन ने जनवरी 2026 में विश्व आर्थिक मंच (दावोस) के दौरान इस पहल की घोषणा की थी। इसे एक ऐसे मंच के रूप में...

Trump Administration Prepares Expanded Military Strike on Iran: Geopolitical Risks and Global Impact 2026

ट्रंप प्रशासन द्वारा ईरान पर संभावित विस्तारित सैन्य हमले की तैयारी: एक गहन भू-राजनीतिक विश्लेषण प्रस्तावना: युद्ध और कूटनीति के बीच खड़ा मध्य पूर्व फरवरी 2026 में मध्य पूर्व की सामरिक हलचल ने वैश्विक राजनीति को एक बार फिर अस्थिरता की दहलीज पर ला खड़ा किया है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठान ने क्षेत्र में अभूतपूर्व सैन्य जमावड़ा किया है, जिसे कई विश्लेषक ईरान के विरुद्ध संभावित “विस्तारित सैन्य अभियान” की तैयारी के रूप में देख रहे हैं। यह स्थिति केवल दो देशों के बीच शक्ति-प्रदर्शन नहीं है; यह वैश्विक शक्ति-संतुलन, ऊर्जा सुरक्षा, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय कानून की विश्वसनीयता की परीक्षा है। प्रश्न केवल यह नहीं है कि हमला होगा या नहीं—बल्कि यह है कि यदि हुआ, तो उसके दूरगामी परिणाम क्या होंगे। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: अविश्वास की लंबी विरासत अमेरिका–ईरान संबंध 1979 की इस्लामी क्रांति से ही तनावपूर्ण रहे हैं। 2015 में हुआ परमाणु समझौता (JCPOA) इस तनाव को कम करने का एक प्रयास था। किंतु 2018 में अमेरिका के समझौते से बाहर निकलने और “अधिकतम दबाव” नीति लागू करने क...

Taliban’s New Criminal Code and Domestic Violence in Afghanistan: An Academic Human Rights Analysis

तालिबान-शासित अफगानिस्तान में घरेलू हिंसा को लेकर नए नियम: एक अकादमिक विश्लेषण परिचय अगस्त 2021 में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद अफगानिस्तान में कानूनी, सामाजिक और राजनीतिक ढांचे में गहन परिवर्तन देखने को मिले हैं। इन परिवर्तनों का सबसे अधिक प्रभाव महिलाओं और बच्चों पर पड़ा है, जहां शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं और सार्वजनिक जीवन में भागीदारी पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। इसी संदर्भ में, जनवरी 2026 में तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने एक नई आपराधिक प्रक्रिया संहिता (Criminal Procedural Regulations for Courts) पर हस्ताक्षर किए, जो 10 अध्यायों और 119 अनुच्छेदों में विभाजित है। इसे अनौपचारिक रूप से “Penal Principles of Taliban Courts” कहा जा रहा है। यह संहिता केवल न्यायिक प्रक्रिया को परिभाषित नहीं करती, बल्कि तालिबान की वैचारिक और पितृसत्तात्मक दृष्टि को विधिक रूप प्रदान करती है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, यह संहिता घरेलू हिंसा को “सीमित वैधता” प्रदान करती है और महिलाओं को अधीनस्थ सामाजिक इकाई के रूप में स्थापित करती है। यह लेख संहिता के प्रमुख प्रावधानों, उनके...

Japan PM Sanae Takaichi’s Cabinet Resignation 2026: Strategic Reset Explained

जापान में सत्ता का पुनर्संयोजन: सनाए ताकाइची का सामूहिक इस्तीफा और दूसरे कार्यकाल की रणनीतिक दिशा 18 फरवरी 2026, टोक्यो — जापान की राजनीति में आज जो दृश्य सामने आया, वह किसी संकट, विद्रोह या शासन विफलता का परिणाम नहीं था, बल्कि संसदीय परंपरा का एक परिपक्व प्रदर्शन था। प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने अपने पूरे मंत्रिमंडल के साथ सामूहिक इस्तीफा दिया, ताकि संसद (डाइट) के नए सत्र में पुनर्नियुक्ति की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी की जा सके। यह कदम उस समय आया है जब उनकी पार्टी, लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP), हालिया आम चुनाव में निचले सदन में दो-तिहाई से अधिक बहुमत हासिल कर चुकी है। अतः यह इस्तीफा राजनीतिक अस्थिरता नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक पुनर्संयोजन (democratic reset) का प्रतीक है। 1. संवैधानिक प्रक्रिया या राजनीतिक संकेत? जापान की संसदीय व्यवस्था में प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल संसद के विश्वास पर आधारित होते हैं। जब नया सत्र प्रारंभ होता है या आम चुनाव के बाद नई संसद का गठन होता है, तो कैबिनेट का इस्तीफा देना एक औपचारिक आवश्यकता है। टोक्यो स्थित नेशनल डाइट बिल्डिंग में दोपहर को होने वाले स...

Supreme Court Verdict on Sexual Assault: Pajama String Act Constitutes Attempt to Rape, Allahabad HC Order Overturned

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: ‘पायजामा की डोरी खोलना बलात्कार का प्रयास है’ — न्यायिक संवेदनशीलता की पुनर्स्थापना हाल ही में  Supreme Court of India ने यौन अपराधों से जुड़े एक अत्यंत संवेदनशील और नैतिक रूप से चुनौतीपूर्ण मामले में ऐसा फैसला दिया है, जिसने न केवल Allahabad High Court  के एक विवादास्पद आदेश को पलट दिया, बल्कि भारतीय न्याय व्यवस्था की संवेदनशीलता, मानवीय दृष्टि और पीड़ित-केंद्रित सोच को भी नए सिरे से स्थापित किया। यह निर्णय केवल एक कानूनी व्याख्या नहीं, बल्कि न्यायिक विवेक, नैतिक जिम्मेदारी और समाज के प्रति न्यायपालिका की जवाबदेही का सशक्त उदाहरण है। 1. मामले की पृष्ठभूमि: जब अपराध को ‘तैयारी’ कह दिया गया उत्तर प्रदेश की इस घटना में एक 11 वर्षीय नाबालिग बच्ची के साथ दो आरोपियों द्वारा अत्यंत घृणित कृत्य किए गए— बच्ची के स्तनों को पकड़ना उसकी पायजामा की डोरी खोलना उसे जबरन कल्वर्ट (पुलिया) के नीचे खींचने का प्रयास ट्रायल कोर्ट ने इस आचरण को POCSO अधिनियम के अंतर्गत बलात्कार का प्रयास मानते हुए गंभीर धाराओं में संज्ञान लिया। लेकिन 17 मार्च ...

Modi–Macron Partnership and the Deepening Strategic Meaning of India–France Relations

मोदी–मैक्रों की मजबूत जोड़ी और भारत–फ्रांस रिश्तों का गहराता रणनीतिक अर्थ वैश्विक कूटनीति के तेजी से बदलते परिदृश्य में भारत अब महज एक प्रतिक्रियावादी शक्ति नहीं रह गया है। वह सक्रिय रूप से एजेंडा तय करने वाली शक्ति (agenda-setter) के रूप में उभर रहा है। 21वीं सदी के तीसरे दशक में भारत की विदेश नीति का मूल मंत्र स्पष्ट है— बहु-संरेखण (Multi-Alignment) के साथ रणनीतिक स्वायत्तता । अमेरिका, रूस, जापान, यूरोपीय संघ और खाड़ी देशों के साथ संतुलित संबंधों के बीच फ्रांस एक ऐसे साझेदार के रूप में सामने आया है, जो न तो भारत पर दबाव डालता है और न ही उसे किसी रणनीतिक निर्भरता में बाँधता है। यह साझेदारी पारंपरिक सैन्य गठबंधनों से अलग, व्यावहारिक, विश्वास-आधारित और भविष्योन्मुखी है। फरवरी 2026 में फ्रांस के राष्ट्रपति की भारत यात्रा ने इस रिश्ते को नई ऊँचाइयों पर पहुँचा दिया। मुंबई में प्रधानमंत्री और मैक्रों के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के दौरान भारत–फ्रांस संबंधों को औपचारिक रूप से “विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी (Special Global Strategic Partnership)” में अपग्रेड किया गया। इसी क्रम में ...

India–France Strategic Partnership in a Multipolar World: How It Is Redefining India’s Global Power Status

बहुध्रुवीय विश्व में भारत–फ्रांस का उभार भारत की पुनर्परिभाषित वैश्विक रणनीतिक स्थिति (UPSC-उन्मुख विश्लेषणात्मक लेख) भूमिका: बदलती वैश्विक व्यवस्था और भारत की उभरती भूमिका 21वीं सदी का अंतरराष्ट्रीय तंत्र तीव्र गति से बहुध्रुवीयता की ओर बढ़ रहा है, जहाँ एकध्रुवीय वर्चस्व के स्थान पर बहुपक्षीय संतुलन, लचीली साझेदारियाँ और मुद्दा-आधारित सहयोग निर्णायक बनते जा रहे हैं। यूक्रेन संकट, ग़ाज़ा युद्ध, ताइवान जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव तथा वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं का पुनर्गठन इस तथ्य को रेखांकित करते हैं कि न तो कठोर सैन्य गठबंधन टिकाऊ हैं और न ही किसी एक शक्ति का दीर्घकालिक प्रभुत्व। इसी परिप्रेक्ष्य में भारत–फ्रांस संबंध केवल एक द्विपक्षीय साझेदारी नहीं रह गए हैं, बल्कि भारत की वैश्विक रणनीतिक पहचान को नया आयाम देने वाली धुरी के रूप में उभरे हैं। फरवरी 2026 में फ्रांसीसी राष्ट्रपति की मुंबई यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री के साथ हुए व्यापक समझौतों ने इस रिश्ते को “Special Global Strategic Partnership” के स्तर तक उन्नत किया। यह उन्नयन भारत की दीर्घकालिक रणनीतिक सोच का प्रतीक है—जहाँ राष...

The Power of Solitude and Social Conditioning: Sociological Relevance of Shekhar: Ek Jivani for UPSC

  ‘अकेले रहने की सामर्थ्य’ : शेखर : एक जीवनी के अंश का समाजशास्त्रीय विश्लेषण उद्धृत अंश— “उसके चरित्र में त्रुटियाँ अनेक थीं लेकिन एक शक्ति भी पायी… अकेले रहने की सामर्थ्य… स्कूल, कॉलेज और संगति में टाइप बनते हैं और वह बना व्यक्ति” — उपन्यास के नायक शेखर के व्यक्तित्व की एक केन्द्रीय समाजशास्त्रीय अंतर्दृष्टि प्रस्तुत करता है। यह अंश व्यक्ति-निर्माण, सामाजिक संस्थाओं की भूमिका, अनुरूपता (conformity) और वैयक्तिकता (individuality) के द्वंद्व को उद्घाटित करता है। 1. व्यक्ति-निर्माण और समाजीकरण (Socialization) समाजशास्त्र के अनुसार व्यक्ति जन्म से “तैयार” नहीं होता; वह समाजीकरण की निरंतर प्रक्रिया से गुजरते हुए बनता है। परिवार, स्कूल, कॉलेज और सहकर्मी समूह (peer groups) व्यक्ति को व्यवहार, मूल्य और पहचान के स्वीकार्य टाइप सिखाते हैं। अंश में कहा गया— “स्कूल, कॉलेज और संगति में टाइप बनते हैं” —यह इस तथ्य को रेखांकित करता है कि आधुनिक संस्थाएँ व्यक्तियों को मानकीकृत ढाँचों में ढालती हैं, ताकि वे सामाजिक अपेक्षाओं के अनुरूप हों। 2. ‘टाइप’ बनाम ‘स्व’ : अनुरूपता का दबाव यहाँ ...

Bangladesh’s Political Transition and Sub-Regional Geopolitics: Interpreting Muhammad Yunus’s Farewell Message on India’s Northeast

बांग्लादेश में राजनीतिक संक्रमण और उप-क्षेत्रीय भू-राजनीति: मुहम्मद यूनुस के विदाई संदेश का विश्लेषण परिचय फरवरी 2026 में बांग्लादेश के अंतरिम मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस द्वारा दिया गया विदाई संदेश दक्षिण एशिया की उप-क्षेत्रीय राजनीति में एक महत्त्वपूर्ण हस्तक्षेप के रूप में उभरा। इस संदेश में उन्होंने भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों—जिन्हें सामान्यतः ‘सात बहनें’ कहा जाता है—को नेपाल और भूटान के साथ जोड़ते हुए एक उप-क्षेत्रीय आर्थिक ढांचे की कल्पना प्रस्तुत की। यह वक्तव्य केवल एक आर्थिक प्रस्ताव नहीं था, बल्कि यह बदलते शक्ति-संतुलन, बांग्लादेश की उभरती विदेश नीति और भारत-बांग्लादेश संबंधों में व्याप्त संवेदनशीलताओं का द्योतक भी था। यह लेख यूनुस के विदाई संदेश की पृष्ठभूमि, उसके भू-राजनीतिक निहितार्थ और दक्षिण एशिया में उप-क्षेत्रीय सहयोग की संभावनाओं का अकादमिक, संतुलित और विश्लेषणात्मक मूल्यांकन प्रस्तुत करता है। पृष्ठभूमि: बांग्लादेश का राजनीतिक संक्रमण अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद बांग्लादेश में एक अंतरिम शासन व्यवस्था स्थापित हुई, जिसकी कमान मुहम्मद यूनुस को...

Individual vs Society: Loneliness, Moral Conformity and Selfhood in Shekhar: Ek Jivani | UPSC Perspective

अकेलापन, अस्वीकृति और आत्मबोध: शेखर: एक जीवनी के एक अंश का अकादमिक विश्लेषण प्रस्तावना “वह अकेला था, अनुभव कर रहा था कि मैं अकेला हूँ। और यह भी अनुभव कर रहा था कि मैं अकेला इसलिए हूँ कि मैं उस प्रकार का नहीं हूँ जिसे लोग अच्छा कहते हैं।” यह अंश हिंदी साहित्य के महत्त्वपूर्ण उपन्यास शेखर: एक जीवनी में नायक शेखर की आंतरिक चेतना को उद्घाटित करता है। यह वाक्य मात्र व्यक्तिगत पीड़ा का बयान नहीं है, बल्कि समाज, नैतिकता और व्यक्ति के बीच के जटिल संबंधों का गहन मनोवैज्ञानिक और समाजशास्त्रीय उद्घाटन है। यह लेख इस अंश को अकेलेपन, सामाजिक अस्वीकृति, नैतिक मानकों और आधुनिक व्यक्ति की आत्म-संरचना के संदर्भ में विश्लेषित करता है। 1. अकेलापन: सामाजिक स्थिति नहीं, अस्तित्वगत अनुभव यहाँ “अकेला होना” भौतिक या सामाजिक अलगाव का संकेत नहीं है, बल्कि अस्तित्वगत अकेलापन (existential loneliness) है। शेखर लोगों के बीच रहते हुए भी अकेला है, क्योंकि उसका आंतरिक ‘स्व’ समाज के स्वीकृत मानकों से मेल नहीं खाता। समाजशास्त्रीय दृष्टि से यह स्थिति उस व्यक्ति की है जो बहुसंख्यक नैतिक संस्कृति (dominant moral ...

AI Impact Summit 2026: How India Is Shaping the Future of Global AI Leadership from the Global South

भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026: महत्वाकांक्षा, नेतृत्व और चुनौतियों का संगम परिचय इक्कीसवीं सदी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) केवल तकनीकी नवाचार नहीं, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन का प्रमुख चालक बन चुकी है। वैश्विक प्रतिस्पर्धा के इस दौर में भारत ने AI को अपनी राष्ट्रीय विकास रणनीति के केंद्र में रखा है। इसी संदर्भ में 16 फरवरी 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 भारत की दीर्घकालिक AI दृष्टि का सार्वजनिक घोषणापत्र बनकर उभरी। समिट का उद्घाटन भारतीय प्रधानमंत्री मोदीजी ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की AI नीति “लाभ-केंद्रित” नहीं, बल्कि मानव-केंद्रित, समावेशी और उत्तरदायी होगी। 20 फरवरी तक चलने वाली यह समिट ग्लोबल साउथ में आयोजित अब तक का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय AI सम्मेलन है—जो अपने आप में भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का संकेत देता है। समिट की परिकल्पना: People, Planet, Progress इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 की वैचारिक धुरी तीन स्तंभों पर टिकी है— People (लोग), Planet (पर्या...

Israel’s West Bank Land Registration Revival: De Facto Annexation, Legal Impact and Geopolitical Consequences

इज़राइल की वेस्ट बैंक में भूमि पंजीकरण प्रक्रिया की बहाली: एक de facto विलय की दिशा में कदम परिचय 15 फरवरी 2026 को इज़राइल की कैबिनेट ने कब्जे वाले वेस्ट बैंक में भूमि पंजीकरण (land registration) की प्रक्रिया शुरू करने की मंजूरी दी, जो 1967 के बाद पहली बार हो रहा है। यह फैसला वेस्ट बैंक (जिसे इज़राइल में जूडिया और समरिया कहा जाता है) पर इज़राइल के नियंत्रण को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इज़राइली सरकार इसे प्रशासनिक सुधार और पारदर्शिता का मुद्दा बताती है, जबकि फिलिस्तीनी पक्ष, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन और कई देश इसे "de facto annexation" (वास्तविक विलय) की प्रक्रिया के रूप में देखते हैं। यह लेख इस फैसले के ऐतिहासिक, कानूनी, राजनीतिक और भू-राजनीतिक संदर्भों का अकादमिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वेस्ट बैंक पर 1967 के छह-दिवसीय युद्ध में इज़राइल ने कब्जा किया था, जब यह क्षेत्र जॉर्डन के नियंत्रण में था। 1948-1967 तक जॉर्डन ने यहां भूमि रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया चलाई थी, लेकिन केवल लगभग एक-तिहाई भूमि ही औपचारिक रूप से पंजी...

Reforming Global Governance: Strategic Significance of the G4 Countries’ Munich Meeting 2026

बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार: G4 देशों की म्यूनिख बैठक का ऐतिहासिक महत्व भूमिका: बदलती विश्व-व्यवस्था और सुधार की अनिवार्यता 21वीं सदी की वैश्विक राजनीति गहन संक्रमण के दौर से गुजर रही है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद निर्मित बहुपक्षीय संस्थाएं—विशेषकर संयुक्त राष्ट्र—आज यूक्रेन युद्ध, गाज़ा–मध्य पूर्व संकट, इंडो-पैसिफिक तनाव, जलवायु आपातकाल, महामारी, और साइबर–स्पेस की चुनौतियों से जूझ रही हैं। यह स्पष्ट होता जा रहा है कि 1945 की संस्थागत संरचनाएँ 2026 की वास्तविकताओं के अनुरूप नहीं रहीं। इसी पृष्ठभूमि में G4 देशों—भारत, जर्मनी, जापान और ब्राज़ील —द्वारा बहुपक्षीय व्यवस्था, खासकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC), में सुधार की मांग को नया बल मिला है। फरवरी 2026 में के दौरान आयोजित G4 विदेश मंत्रियों की बैठक इस दिशा में एक निर्णायक प्रतीक बनकर उभरी। G4 का उदय: प्रतिनिधित्व की कमी के विरुद्ध सामूहिक आवाज G4 समूह का औपचारिक उभार 2005 में हुआ, जब इन चार देशों ने UNSC सुधार के लिए संयुक्त प्रस्ताव प्रस्तुत किया। आज ये देश वैश्विक अर्थव्यवस्था और शासन में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं— ...

Moran Highway Landing and Assam Visit: India’s Strategic Shift in Northeast Defence

मोरान की लैंडिंग और भारत की तैयारी पूर्वोत्तर में सुरक्षा, संप्रभुता और बुनियादी ढांचे का नया व्याकरण 14 फरवरी 2026 को असम के डिब्रूगढ़ ज़िले में घटित एक घटना को केवल उद्घाटन समारोह के रूप में देखना उसके अर्थ को सीमित कर देना होगा। मोरान बाईपास पर बनी उत्तर-पूर्व भारत की पहली इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (Emergency Landing Facility – ELF) पर प्रधानमंत्री का भारतीय वायुसेना के C-130J सुपर हरक्यूलिस विमान से उतरना, वस्तुतः भारत की बदलती रणनीतिक सोच का सार्वजनिक प्रदर्शन था। यह दृश्य नाटकीय अवश्य था, पर उसका महत्व प्रतीकात्मक से कहीं अधिक—संस्थागत, रणनीतिक और भविष्य-उन्मुख—था। यह घटना ऐसे समय हुई है जब भारत का पूर्वी मोर्चा लगातार अधिक ध्यान आकर्षित कर रहा है। चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनावपूर्ण संतुलन, म्यांमार की अस्थिरता, और बंगाल की खाड़ी में उभरती सामरिक प्रतिस्पर्धा—इन सबके बीच पूर्वोत्तर भारत अब ‘परिधि’ नहीं, बल्कि रणनीतिक केंद्र बनता जा रहा है। हाईवे से रनवे: रणनीति का विकेंद्रीकरण मोरान बाईपास (NH-37) पर विकसित 4.2 किलोमीटर लंबी यह स्ट्रिप सामान्य दिनों में ...

Prime Minister Modi Inaugurates Six-Lane Kumar Bhaskar Varma Bridge over Brahmaputra, Boosting Northeast India Connectivity

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ब्रह्मपुत्र नदी पर छह लेन पुल का उद्घाटन पूर्वोत्तर भारत के विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर परिचय 14 फरवरी 2026 का दिन पूर्वोत्तर भारत के आधारभूत ढांचे के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज हो गया। इस दिन प्रधानमंत्री ने असम की राजधानी में ब्रह्मपुत्र नदी पर निर्मित कुमार भास्कर वर्मा सेतु का उद्घाटन किया। यह छह लेन वाला भव्य पुल गुवाहाटी को उत्तर गुवाहाटी से जोड़ता है और तकनीकी दृष्टि से पूर्वोत्तर भारत का पहला एक्सट्राडोज्ड (Extradosed) पुल है। लगभग ₹3,030 करोड़ (कुछ अनुमानों में ₹3,300 करोड़) की लागत से निर्मित यह परियोजना केवल एक परिवहन संरचना नहीं, बल्कि क्षेत्रीय एकीकरण, आर्थिक गति और सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम है। ब्रह्मपुत्र जैसी विशाल, प्रवाहमान और चुनौतीपूर्ण नदी पर आधुनिक इंजीनियरिंग के सहारे खड़ा यह पुल ‘ एक भारत, श्रेष्ठ भारत ’ की भावना को मूर्त रूप देता है। पुल की तकनीकी विशेषताएँ और निर्माण की विशेषता कुमार भास्कर वर्मा सेतु आधुनिक सिविल इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसका निर्माण प्री-स्ट्रेस्ड कंक्रीट (PSC...

Bangladesh BNP Historic Victory 2026: Impact on India-Bangladesh Relations

बांग्लादेश में बीएनपी की ऐतिहासिक जीत और भारत-बांग्लादेश संबंध: एक विस्तृत अकादमिक विश्लेषण प्रस्तावना 13 फरवरी 2026 को बांग्लादेश की राजनीति में एक निर्णायक परिवर्तन सामने आया, जब Bangladesh Nationalist Party (बीएनपी) ने संसदीय चुनाव में दो-तिहाई से अधिक बहुमत प्राप्त कर सत्ता में वापसी की। लगभग दो दशकों बाद यह परिवर्तन केवल सरकार बदलने की घटना नहीं, बल्कि बांग्लादेश की राजनीतिक दिशा, वैचारिक संतुलन और विदेश नीति की प्राथमिकताओं में संभावित पुनर्संरचना का संकेत है। संभावित प्रधानमंत्री के रूप में Tarique Rahman का उभार इस परिवर्तन को और भी महत्वपूर्ण बनाता है। यह चुनाव 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन के बाद हुआ, जिसने Sheikh Hasina के नेतृत्व वाली Awami League सरकार का अंत किया। इस राजनीतिक संक्रमण ने दक्षिण एशिया की सामरिक राजनीति में एक नई बहस को जन्म दिया है—विशेषकर भारत-बांग्लादेश संबंधों के संदर्भ में। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: सहयोग और तनाव के आयाम भारत और बांग्लादेश के संबंध 1971 के मुक्ति संग्राम से गहराई से जुड़े हैं। स्वतंत्रता के बाद प्रारंभिक वर्षों में संबंध सहयोगपूर्ण रहे, क...

Tarique Rahman: From Exile to Power | Bangladesh’s Democratic Revival After 2026 Election

तारिक रहमान: निर्वासन की आग से निकली आशा की ज्योति बांग्लादेश के नए राजनीतिक सूर्योदय की कहानी 20 नवंबर 1965 को ढाका में जन्मे आज बांग्लादेशी राजनीति के सबसे निर्णायक व्यक्तित्व के रूप में उभरे हैं। 2026 के आम चुनावों में (BNP) की ऐतिहासिक जीत के बाद वे प्रधानमंत्री-निर्दिष्ट बने—एक ऐसा क्षण जो केवल सत्ता-परिवर्तन नहीं, बल्कि लंबे संघर्ष, निर्वासन और लोकतांत्रिक पुनर्जागरण का प्रतीक है। 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले जनउभार के बाद बने शून्य को भरने की जिम्मेदारी अब उनके कंधों पर है—और राष्ट्र की निगाहें उन्हीं पर टिकी हैं। विरासत, बचपन और राष्ट्रनिर्माण की स्मृतियाँ तारिक रहमान की राजनीतिक चेतना किसी एक घटना की देन नहीं; यह इतिहास की आग में तपकर बनी है। वे —बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के नायक—और पूर्व प्रधानमंत्री के ज्येष्ठ पुत्र हैं। 1971 के युद्धकालीन अनुभवों और परिवार पर पड़े दमन ने उन्हें कम उम्र में ही सत्ता, स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों के अर्थ सिखाए। ढाका के BAF Shaheen College में अनुशासन और आत्मसंयम ने उनके व्यक्तित्व को आकार दिया। विश्वविद्यालयी वर्षों में अंतरराष्ट्रीय...

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Trump’s New Global Tariff Policy 2026: Impact on India, Global Trade Tensions, and Emerging Economic Opportunities

ट्रंप प्रशासन की नई वैश्विक टैरिफ नीति: भारत के लिए चुनौतियाँ, विकल्प और दीर्घकालिक अवसर प्रस्तावना: वैश्वीकरण से संरक्षणवाद की ओर? इक्कीसवीं सदी की वैश्विक अर्थव्यवस्था दो समानांतर प्रवृत्तियों के बीच झूलती दिखाई देती है—एक ओर बहुपक्षीय, नियम-आधारित व्यापार व्यवस्था; दूसरी ओर राष्ट्रवादी संरक्षणवाद की पुनरावृत्ति। शीतयुद्ध के बाद स्थापित उदार वैश्विक आर्थिक ढांचा, जिसकी आधारशिला WTO जैसे संस्थानों ने रखी, अब निरंतर दबाव में है। 20 फरवरी 2026 को अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने 6-3 के बहुमत से ट्रंप प्रशासन द्वारा अंतरराष्ट्रीय आपात आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) के तहत लगाए गए व्यापक टैरिफ को असंवैधानिक घोषित कर दिया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि शांतिकाल में राष्ट्रपति को सामान्य व्यापार असंतुलन के आधार पर आपातकालीन शक्तियों का प्रयोग करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। किंतु इस निर्णय के कुछ ही घंटों बाद प्रशासन ने व्यापार अधिनियम, 1974 की धारा 122 का सहारा लेते हुए सभी आयातों पर 10% अस्थायी टैरिफ लागू किया, जिसे अगले दिन 15% तक बढ़ा दिया गया। यह टैरिफ 150 दिनों तक वैध रहेगा, जब तक कि कां...

Pariksha Pe Charcha 2026: PM Modi’s Motivational Message for Students on Exams, Skills, Balance & Success

परीक्षा पे चर्चा 2026: परीक्षा से आगे जीवन की तैयारी का राष्ट्रीय संवाद परीक्षा का समय आते ही देश के करोड़ों छात्रों के मन में एक ही सवाल गूंजने लगता है— क्या मैं सफल हो पाऊँगा? इसी प्रश्न, इसी तनाव और इसी अनिश्चितता को संवाद और आत्मविश्वास में बदलने का मंच है ‘परीक्षा पे चर्चा’ । 6 फरवरी 2026 को आयोजित परीक्षा पे चर्चा के 9वें संस्करण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से सीधी बातचीत की। सुबह 10 बजे शुरू हुए इस कार्यक्रम में दिल्ली, गुजरात के देवमोगरा, तमिलनाडु के कोयंबटूर, छत्तीसगढ़ के रायपुर और असम के गुवाहाटी से जुड़े छात्रों ने भाग लिया। कार्यक्रम का लाइव प्रसारण दूरदर्शन, पीएम मोदी के यूट्यूब चैनल और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर किया गया। इस बार 4.5 करोड़ से अधिक रजिस्ट्रेशन होना यह दर्शाता है कि आज का छात्र केवल परीक्षा टिप्स नहीं, बल्कि जीवन मार्गदर्शन चाहता है। 🌱 सपने देखें, लेकिन एक्शन के साथ प्रधानमंत्री मोदी का संदेश बेहद स्पष्ट और प्रेरक था— “सपने न देखना जुर्म है, लेकिन सिर्फ सपनों की गुनगुनाहट से काम नहीं चलता।” उन्हों...

India Launches Free HPV Vaccination Drive for 14-Year-Old Girls to Eliminate Cervical Cancer

सर्वाइकल कैंसर मुक्त भारत: 14 वर्षीय लड़कियों के लिए मुफ्त HPV वैक्सीन अभियान और रोकथाम की समग्र रणनीति भारत, जहां महिलाओं की स्वास्थ्य चुनौतियां सदियों से समाज की प्रगति में बाधा बनी हुई हैं, अब एक क्रांतिकारी कदम उठा रहा है। 2026 में केंद्र सरकार ने 14 वर्षीय लड़कियों के लिए मुफ्त HPV वैक्सीनेशन अभियान की शुरुआत की घोषणा की है, जो न केवल एक टीकाकरण कार्यक्रम है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को सर्वाइकल कैंसर से मुक्त जीवन देने की दिशा में एक मजबूत प्रतिबद्धता है। यह पहल मार्च 2026 से शुरू होकर पहले 90 दिनों के रूप में एक मेगा ड्राइव के तहत लागू होगी, जिसके बाद इसे नियमित रूप से जारी रखा जाएगा। इस अभियान के माध्यम से, सरकार Gardasil 4 वैक्सीन की सिंगल डोज मुफ्त उपलब्ध कराएगी, जो बाजार में करीब ₹3,900 प्रति डोज की कीमत पर उपलब्ध है। यह कदम विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के 2030 तक सर्वाइकल कैंसर को सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या से मुक्त करने के लक्ष्य के अनुरूप है, जहां 90% वैक्सीनेशन, 70% स्क्रीनिंग और 90% उपचार पर जोर दिया गया है। यह लेख इस अभियान की पृष्ठभूमि, वैज्ञानिक आधार, कार्यान्वयन, चुनौ...

NCERT Judicial Corruption Controversy 2026: Supreme Court Intervention and Impact on Education & Democracy

एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक में 'न्यायिक भ्रष्टाचार' का समावेश: मौलिक समग्र प्रभाव का विश्लेषण परिचय राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक में 'न्यायिक भ्रष्टाचार' (Judicial Corruption) और अदालती मामलों की लंबित स्थिति जैसे मुद्दों को शामिल करने का निर्णय एक बड़े विवाद का कारण बना। इस परिवर्तन ने न केवल शिक्षा और न्यायपालिका के बीच टकराव को जन्म दिया, बल्कि अकादमिक स्वतंत्रता, संस्थागत गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों पर गहन बहस छेड़ दी। 25 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर स्वत: संज्ञान (suo motu) लेकर केस दर्ज किया, जिसके बाद एनसीईआरटी ने किताब वापस ले ली और संबंधित हिस्से को हटाने का फैसला किया। यह घटना शिक्षा प्रणाली के मौलिक ढांचे पर दूरगामी प्रभाव डालती है, जहां सच्चाई की शिक्षा और संस्थाओं की छवि के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इस लेख में हम इस विवाद के समग्र प्रभावों का विश्लेषण करेंगे, जिसमें शिक्षा, न्यायपालिका, समाज और लोकतंत्र पर पड़ने वाले प्रभाव शामिल हैं। विवाद की पृष्ठभूमि एनस...

Trump–US Supreme Court Clash 2026: Tariff Ruling, Constitutional Crisis and Global Economic Impact

ट्रंप–सुप्रीम कोर्ट टकराव: टैरिफ फैसले के मौलिक प्रभाव और वैश्विक असर 20 फरवरी 2026 को Supreme Court of the United States ने 6–3 के बहुमत से एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए व्यापक टैरिफ को असंवैधानिक करार दिया। यह केवल एक आर्थिक नीति पर न्यायिक टिप्पणी नहीं थी; यह अमेरिकी संवैधानिक ढांचे, शक्तियों के संतुलन, वैश्विक व्यापार व्यवस्था और समकालीन पॉपुलिस्ट राजनीति के भविष्य पर गहरा प्रभाव डालने वाला निर्णय है। फैसले के कुछ घंटों बाद ही ट्रंप प्रशासन ने ट्रेड एक्ट, 1974 की धारा 122 के तहत 10% “ग्लोबल टैरिफ” लागू करने की घोषणा कर दी—जिससे स्पष्ट हो गया कि यह संघर्ष समाप्त नहीं हुआ, बल्कि एक नए चरण में प्रवेश कर गया है। नीचे इस पूरे घटनाक्रम के मौलिक प्रभावों का बहुआयामी विश्लेषण प्रस्तुत है। 1. संवैधानिक संतुलन की पुनर्परिभाषा: कार्यपालिका बनाम न्यायपालिका अमेरिकी संविधान कांग्रेस को टैक्स और टैरिफ लगाने की स्पष्ट शक्ति देता है। IEEPA (1977) का उद्देश्य राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति में सीमित आर्...

UPSC 2024 Topper Shakti Dubey’s Strategy: 4-Point Study Plan That Led to Success in 5th Attempt

UPSC 2024 टॉपर शक्ति दुबे की रणनीति: सफलता की चार सूत्रीय योजना से सीखें स्मार्ट तैयारी का मंत्र लेखक: Arvind Singh PK Rewa | Gynamic GK परिचय: हर साल UPSC सिविल सेवा परीक्षा लाखों युवाओं के लिए एक सपना और संघर्ष बनकर सामने आती है। लेकिन कुछ ही अभ्यर्थी इस कठिन परीक्षा को पार कर पाते हैं। 2024 की टॉपर शक्ति दुबे ने न सिर्फ परीक्षा पास की, बल्कि एक बेहद व्यावहारिक और अनुशासित दृष्टिकोण के साथ सफलता की नई मिसाल कायम की। उनका फोकस केवल घंटों की पढ़ाई पर नहीं, बल्कि रणनीतिक अध्ययन पर था। कौन हैं शक्ति दुबे? शक्ति दुबे UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2024 की टॉपर हैं। यह उनका पांचवां  प्रयास था, लेकिन इस बार उन्होंने एक स्पष्ट, सीमित और परिणामोन्मुख रणनीति अपनाई। न उन्होंने कोचिंग की दौड़ लगाई, न ही घंटों की संख्या के पीछे भागीं। बल्कि उन्होंने “टॉपर्स के इंटरव्यू” और परीक्षा पैटर्न का विश्लेषण कर अपनी तैयारी को एक फोकस्ड दिशा दी। शक्ति दुबे की UPSC तैयारी की चार मजबूत आधारशिलाएँ 1. सुबह की शुरुआत करेंट अफेयर्स से उन्होंने बताया कि सुबह उठते ही उनका पहला काम होता था – करेंट अफेयर्...

National Interest Over Permanent Friends or Foes: India’s Shifting Strategic Compass

राष्ट्रीय हित ही सर्वोपरि: भारत की बदलती कूटनीतिक दिशा प्रस्तावना : : न मित्र स्थायी, न शत्रु अंतरराष्ट्रीय राजनीति का यथार्थवादी दृष्टिकोण बार-बार यह स्पष्ट करता है कि विश्व राजनीति में न कोई स्थायी मित्र होता है और न ही कोई स्थायी शत्रु। यदि कुछ स्थायी है, तो वह है प्रत्येक राष्ट्र का राष्ट्रीय हित (National Interest) । बदलती वैश्विक परिस्थितियों में यही राष्ट्रीय हित कूटनीतिक रुख, विदेश नीति के निर्णय और अंतरराष्ट्रीय समीकरणों को निर्धारित करता है। वर्तमान समय में भारत की विदेश नीति इसी सिद्धांत का मूर्त रूप प्रतीत हो रही है। जहाँ एक ओर भारत और अमेरिका के बीच कुछ असहजता और मतभेद देखने को मिल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भारत और चीन, सीमा विवाद और गहरी अविश्वास की खाई के बावजूद संवाद और संबंध सुधारने की दिशा में आगे बढ़ते नज़र आ रहे हैं। यह परिदृश्य एक बार फिर यह रेखांकित करता है कि भावनात्मक स्तर पर मित्रता या शत्रुता से परे जाकर, अंतरराष्ट्रीय राजनीति का आधार केवल और केवल हित-आधारित यथार्थवाद है। ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य भारत के विदेश नीति इतिहास में यह कथन अनेक बार सत्य सिद्ध हुआ ...

Boong Makes History at 79th BAFTA Awards 2026: First Indian Regional Film to Win Best Children & Family Film

79वें BAFTA अवॉर्ड्स 2026 में ‘बूंग’ की ऐतिहासिक जीत: पहली भारतीय क्षेत्रीय फिल्म बनी बेस्ट चिल्ड्रेन एंड फैमिली फिल्म विजेता भारतीय सिनेमा ने वैश्विक मंच पर एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है। 2026 के 79वें BAFTA Awards में मणिपुरी भाषा की फिल्म ‘बूंग’ ने बेस्ट चिल्ड्रेंस एंड फैमिली फिल्म श्रेणी में विजय हासिल कर इतिहास रच दिया। यह उपलब्धि केवल एक पुरस्कार भर नहीं, बल्कि भारतीय क्षेत्रीय सिनेमा की सृजनात्मक शक्ति और सांस्कृतिक विविधता की वैश्विक स्वीकृति का प्रमाण है। वैश्विक मंच पर ‘बूंग’ की ऐतिहासिक जीत लंदन के भव्य Royal Festival Hall में आयोजित इस समारोह में ‘बूंग’ भारत की एकमात्र नामांकित फिल्म थी। इसने हॉलीवुड की चर्चित फिल्मों—आर्को, लिलो एंड स्टिच और जूटोपिया 2—को पीछे छोड़ते हुए यह सम्मान अर्जित किया। यह जीत इसलिए भी विशेष है क्योंकि यह पहली बार है जब भारत ने इस श्रेणी में BAFTA अवॉर्ड जीता है। मणिपुर जैसे पूर्वोत्तर राज्य से आई एक अपेक्षाकृत छोटे बजट की फिल्म का अंतरराष्ट्रीय दिग्गजों को पछाड़ना भारतीय सिनेमा के बदलते परिदृश्य का प्रतीक है। कहानी: मासूमियत, संघर्ष और उम्मीद ...

India to Become the World's Third Largest Economy in 3 Years

 भारत अगले 3 साल में बनेगा दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था परिचय भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। मॉर्गन स्टैनली की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, अगले तीन वर्षों में भारत जर्मनी को पीछे छोड़कर विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। वर्ष 2026 तक भारत की अर्थव्यवस्था 4.7 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है, जिससे यह विश्व में चौथे स्थान पर आ जाएगा। इसके बाद, भारत जापान को भी पीछे छोड़कर तीसरे स्थान पर पहुंच सकता है। इस लेख में भारत की आर्थिक प्रगति, इसके प्रमुख कारणों, प्रभावों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई है। भारत की आर्थिक प्रगति का संक्षिप्त इतिहास भारत की अर्थव्यवस्था की यात्रा संघर्षों और उपलब्धियों से भरी रही है। यदि हम 1990 के दशक की बात करें, तो भारत दुनिया की 12वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था। 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद, भारत ने वैश्विक स्तर पर तेज़ी से प्रगति की। कुछ प्रमुख उपलब्धियाँ निम्नलिखित हैं: 1991 – आर्थिक उदारीकरण और वैश्वीकरण की शुरुआत 2008 – वैश्विक आर्थिक संकट के बावजूद भारत की जीडीपी वृद्धि दर स्थ...

India’s Nuclear Submarine Triad: INS Arihant, Arighat & Aridhaman Strengthen Sea-Based Deterrence and Second-Strike Capability

समुद्र की निस्तब्ध गहराइयों में भारत का रणनीतिक संतुलन परमाणु पनडुब्बी त्रयी और विश्वसनीय प्रतिरोध की राजनीति हिंद महासागर की शांत सतह के नीचे एक ऐसी शक्ति सक्रिय है, जो दिखाई नहीं देती, परंतु जिसकी उपस्थिति ही रणनीतिक संतुलन को परिभाषित करती है। भारत की परमाणु पनडुब्बी क्षमता—विशेषकर INS Arihant, INS Arighat और शीघ्र शामिल होने वाली INS Aridhaman—आज राष्ट्रीय सुरक्षा संरचना का वह स्तंभ है, जो प्रत्यक्ष आक्रामकता नहीं, बल्कि मौन निरोध (Silent Deterrence) का प्रतीक है। भारत की परमाणु त्रयी का समुद्री आयाम, रणनीतिक स्थिरता के उस सिद्धांत पर आधारित है जिसमें शक्ति का उद्देश्य युद्ध करना नहीं, बल्कि युद्ध को रोकना होता है। परमाणु त्रयी का अर्थ: सिद्धांत से व्यवहार तक भारत की परमाणु नीति दो मूलभूत सिद्धांतों पर आधारित है— नो फर्स्ट यूज (No First Use) न्यूनतम विश्वसनीय निरोध (Credible Minimum Deterrence) इन सिद्धांतों की विश्वसनीयता तभी संभव है जब “दूसरे प्रहार की क्षमता” (Second Strike Capability) सुनिश्चित हो। यदि शत्रु प्रथम आक्रमण में भूमि आधारित मिसाइल अड्डों या वायु ठिकानों ...