Prime Minister Modi Inaugurates Six-Lane Kumar Bhaskar Varma Bridge over Brahmaputra, Boosting Northeast India Connectivity
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ब्रह्मपुत्र नदी पर छह लेन पुल का उद्घाटन
पूर्वोत्तर भारत के विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर
परिचय
14 फरवरी 2026 का दिन पूर्वोत्तर भारत के आधारभूत ढांचे के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज हो गया। इस दिन प्रधानमंत्री ने असम की राजधानी में ब्रह्मपुत्र नदी पर निर्मित कुमार भास्कर वर्मा सेतु का उद्घाटन किया। यह छह लेन वाला भव्य पुल गुवाहाटी को उत्तर गुवाहाटी से जोड़ता है और तकनीकी दृष्टि से पूर्वोत्तर भारत का पहला एक्सट्राडोज्ड (Extradosed) पुल है।
लगभग ₹3,030 करोड़ (कुछ अनुमानों में ₹3,300 करोड़) की लागत से निर्मित यह परियोजना केवल एक परिवहन संरचना नहीं, बल्कि क्षेत्रीय एकीकरण, आर्थिक गति और सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम है। ब्रह्मपुत्र जैसी विशाल, प्रवाहमान और चुनौतीपूर्ण नदी पर आधुनिक इंजीनियरिंग के सहारे खड़ा यह पुल ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मूर्त रूप देता है।
पुल की तकनीकी विशेषताएँ और निर्माण की विशेषता
कुमार भास्कर वर्मा सेतु आधुनिक सिविल इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसका निर्माण प्री-स्ट्रेस्ड कंक्रीट (PSC) तकनीक से किया गया है, जो लंबी आयु, अधिक भार वहन क्षमता और संरचनात्मक मजबूती के लिए जानी जाती है।
- पुल की मुख्य स्पैन लंबाई लगभग 1.24 किलोमीटर है।
- यह 8.4 किलोमीटर लंबे समग्र कनेक्टिविटी कॉरिडोर का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
- एक्सट्राडोज्ड डिजाइन में उच्च प्रदर्शन वाले स्टे केबल्स का उपयोग किया गया है, जो पारंपरिक केबल-स्टे और गर्डर ब्रिज के बीच संतुलन बनाता है। इससे लागत नियंत्रित रहती है और स्थायित्व बढ़ता है।
असम भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है। इस चुनौती को ध्यान में रखते हुए पुल में बेस आइसोलेशन तकनीक और फ्रिक्शन पेंडुलम बेयरिंग्स लगाए गए हैं, जो भूकंप के दौरान संरचना को झटकों से बचाते हैं। इसके साथ ही, ब्रिज हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम (BHMS) की स्थापना की गई है, जो सेंसरों के माध्यम से रीयल-टाइम डेटा एकत्र कर पुल की स्थिति पर निरंतर नजर रखता है।
एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहलू यह है कि यह पुल पूरी तरह टोल-फ्री है, जिससे आम नागरिकों पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।
उद्घाटन समारोह और समांतर विकास परियोजनाएँ
उद्घाटन समारोह के दौरान गुवाहाटी में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने के लिए उपस्थिति दर्ज कराई।
पुल के उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री ने लाचित घाट पर ₹5,450 करोड़ से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- IIM गुवाहाटी का विस्तार और नई शैक्षणिक सुविधाएँ
- शहरी परिवहन के लिए इलेक्ट्रिक बसों का नया फ्लीट
- नेशनल डेटा सेंटर की स्थापना
- डिजिटल और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी अन्य परियोजनाएँ
इन पहलों का उद्देश्य पूर्वोत्तर को केवल भौगोलिक रूप से ही नहीं, बल्कि शैक्षणिक, डिजिटल और आर्थिक रूप से भी राष्ट्रीय मुख्यधारा से सशक्त रूप से जोड़ना है। इससे पहले प्रधानमंत्री ने डिब्रूगढ़ के पास आपातकालीन लैंडिंग सुविधा (ELF) का निरीक्षण किया और वायुसेना के हवाई प्रदर्शन को भी देखा, जो क्षेत्र की रणनीतिक तैयारियों को दर्शाता है।
यात्रा समय में क्रांतिकारी परिवर्तन और व्यावहारिक लाभ
इस पुल के चालू होने से गुवाहाटी और उत्तर गुवाहाटी के बीच आवागमन में ऐतिहासिक सुधार हुआ है।
- पहले जहाँ फेरी या पुराने मार्गों से 45–60 मिनट (कभी-कभी इससे भी अधिक) लगते थे,
- अब वही दूरी मात्र 7–10 मिनट में तय की जा सकती है।
इसके प्रत्यक्ष लाभ हैं:
- दैनिक यात्रियों (commuters) के समय और श्रम की बचत
- ट्रैफिक जाम और वाहनों की भीड़ में उल्लेखनीय कमी
- ईंधन की खपत घटने से प्रदूषण में कमी
- मौजूदा फेरी और पुराने पुलों पर दबाव कम होना
आर्थिक, सामाजिक और रणनीतिक महत्व
कुमार भास्कर वर्मा सेतु असम और पूरे पूर्वोत्तर भारत की अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर सिद्ध होगा। गुवाहाटी पहले से ही व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र है; अब इसकी कनेक्टिविटी और अधिक सुदृढ़ हो गई है।
इससे संभावित लाभ:
- व्यापार और लॉजिस्टिक्स की लागत और समय में कमी
- पर्यटन को बढ़ावा, विशेषकर ब्रह्मपुत्र नदी आधारित पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियाँ
- शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए अवसर
- अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों के साथ बेहतर संपर्क
रणनीतिक दृष्टि से यह पुल सीमावर्ती क्षेत्रों तक तेज़ आवाजाही सुनिश्चित करता है, जो आपदा प्रबंधन, सुरक्षा और राष्ट्रीय एकता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। निर्माण के दौरान स्थानीय स्तर पर हजारों लोगों को रोजगार मिला और आधुनिक निर्माण तकनीकों का कौशल हस्तांतरण भी हुआ।
निष्कर्ष
कुमार भास्कर वर्मा सेतु का उद्घाटन केवल एक पुल का शुभारंभ नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर भारत के लिए आत्मविश्वास, एकीकरण और समृद्धि का प्रतीक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत जिस विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर अग्रसर है, यह पुल उसका सशक्त उदाहरण है।
ब्रह्मपुत्र की विशाल लहरों पर खड़ा यह सेतु आने वाली पीढ़ियों के लिए न केवल परिवहन का साधन होगा, बल्कि यह याद दिलाएगा कि जब राजनीतिक इच्छाशक्ति, तकनीकी दक्षता और विकास की स्पष्ट दृष्टि एक साथ आती हैं, तो सबसे कठिन चुनौतियाँ भी अवसर में बदल जाती हैं।
विकसित भारत के संकल्प की यह एक और जीवंत मिसाल है—जहाँ सपने योजनाओं में ढलते हैं और योजनाएँ ज़मीन पर साकार होती हैं।
With The Hindu Inputs
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