भारत की गाजा शांति योजना में भागीदारी: ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में पर्यवेक्षक के रूप में भारत की कूटनीतिक उपस्थिति परिचय वर्ष 2026 में गाजा पट्टी का प्रश्न केवल इजराइल–फिलिस्तीन संघर्ष तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक शक्ति-संतुलन, मानवीय हस्तक्षेप और बहुपक्षीय कूटनीति की परीक्षा बन गया है। ऐसे समय में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा प्रारंभ किया गया ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) एक नई पहल के रूप में सामने आया है, जिसका घोषित उद्देश्य गाजा में युद्धविराम की निगरानी, पुनर्निर्माण, हमास के निरस्त्रीकरण तथा एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण व्यवस्था की स्थापना है। फरवरी 2026 में वाशिंगटन डीसी में आयोजित इस बोर्ड की पहली बैठक में भारत ने पूर्ण सदस्य के बजाय पर्यवेक्षक (Observer) के रूप में भाग लिया। यह निर्णय साधारण कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत की संतुलित और बहुस्तरीय विदेश नीति का प्रतीक है। ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पृष्ठभूमि: संयुक्त राष्ट्र से परे एक वैकल्पिक मंच? ट्रंप प्रशासन ने जनवरी 2026 में विश्व आर्थिक मंच (दावोस) के दौरान इस पहल की घोषणा की थी। इसे एक ऐसे मंच के रूप में...
The Power of Solitude and Social Conditioning: Sociological Relevance of Shekhar: Ek Jivani for UPSC
‘अकेले रहने की सामर्थ्य’ : शेखर : एक जीवनी के अंश का समाजशास्त्रीय विश्लेषण उद्धृत अंश— “उसके चरित्र में त्रुटियाँ अनेक थीं लेकिन एक शक्ति भी पायी… अकेले रहने की सामर्थ्य… स्कूल, कॉलेज और संगति में टाइप बनते हैं और वह बना व्यक्ति” — उपन्यास के नायक शेखर के व्यक्तित्व की एक केन्द्रीय समाजशास्त्रीय अंतर्दृष्टि प्रस्तुत करता है। यह अंश व्यक्ति-निर्माण, सामाजिक संस्थाओं की भूमिका, अनुरूपता (conformity) और वैयक्तिकता (individuality) के द्वंद्व को उद्घाटित करता है। 1. व्यक्ति-निर्माण और समाजीकरण (Socialization) समाजशास्त्र के अनुसार व्यक्ति जन्म से “तैयार” नहीं होता; वह समाजीकरण की निरंतर प्रक्रिया से गुजरते हुए बनता है। परिवार, स्कूल, कॉलेज और सहकर्मी समूह (peer groups) व्यक्ति को व्यवहार, मूल्य और पहचान के स्वीकार्य टाइप सिखाते हैं। अंश में कहा गया— “स्कूल, कॉलेज और संगति में टाइप बनते हैं” —यह इस तथ्य को रेखांकित करता है कि आधुनिक संस्थाएँ व्यक्तियों को मानकीकृत ढाँचों में ढालती हैं, ताकि वे सामाजिक अपेक्षाओं के अनुरूप हों। 2. ‘टाइप’ बनाम ‘स्व’ : अनुरूपता का दबाव यहाँ ...