India-Canada Uranium Supply Deal 2026: Strengthening Energy Security, Clean Energy Transition and Bilateral Reset
भारत-कनाडा यूरेनियम आपूर्ति समझौता: ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और द्विपक्षीय संबंधों की बहाली का एक महत्वपूर्ण कदम
परिचय
2 मार्च 2026 को नई दिल्ली में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की बैठक ने भारत-कनाडा संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ा। इस बैठक का सबसे प्रमुख परिणाम कनाडा की प्रमुख यूरेनियम कंपनी कैमेको (Cameco) और भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग (Department of Atomic Energy - DAE) के बीच लगभग 2.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर (कनाडाई डॉलर में लगभग समकक्ष) मूल्य का दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति समझौता रहा। यह समझौता भारत के नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को मजबूत करने, स्वच्छ और विश्वसनीय बेसलोड पावर सुनिश्चित करने तथा दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों को रीसेट करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह समझौता 2027 से 2035 तक की अवधि में लगभग 22 मिलियन पाउंड (करीब 10,000 टन) यूरेनियम ऑर कंसंट्रेट (U₃O₈) की आपूर्ति का प्रावधान करता है, जो बाजार-आधारित मूल्यों पर आधारित होगा। यह भारत की बढ़ती परमाणु क्षमता को ईंधन प्रदान करेगा, जहां वर्तमान में 24 परमाणु रिएक्टर संचालित हैं और भविष्य में दर्जनों नए रिएक्टरों का निर्माण प्रस्तावित है।
समझौते की पृष्ठभूमि और महत्व
भारत और कनाडा के बीच परमाणु सहयोग का इतिहास 2015 से शुरू होता है, जब कैमेको ने भारत को पांच वर्षीय यूरेनियम आपूर्ति समझौता किया था, जो 2020 में समाप्त हो गया। उसके बाद राजनीतिक मतभेदों, विशेष रूप से 2023 में कनाडाई सिख कार्यकर्ता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या से जुड़े विवाद के कारण संबंध तनावपूर्ण हो गए, जिसके फलस्वरूप व्यापार वार्ताएं रुकीं और पुराना समझौता नवीनीकृत नहीं हुआ।
मार्क कार्नी के नेतृत्व में कनाडा ने 2025-2026 में मध्य शक्तियों (middle powers) के साथ संबंध मजबूत करने की रणनीति अपनाई, जिसमें भारत के साथ संबंध बहाली प्रमुख थी। यह समझौता न केवल ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग का प्रतीक है, बल्कि दोनों देशों के बीच विश्वास की बहाली का भी संकेत है। भारत के लिए यह समझौता ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करता है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर यूरेनियम आपूर्ति सीमित है और भारत का परमाणु कार्यक्रम तेजी से विस्तार कर रहा है। कनाडा के लिए यह समझौता सस्कैचेवान प्रांत में खनन क्षेत्र में रोजगार स्थिरता और आर्थिक लाभ सुनिश्चित करता है।
समझौते के प्रमुख प्रावधान
- आपूर्ति विवरण: 2027-2035 तक लगभग 22 मिलियन पाउंड U₃O₈ की आपूर्ति।
- मूल्य: अनुमानित कुल मूल्य 2.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर (वर्तमान यूरेनियम मूल्य US$86.95 प्रति पाउंड पर आधारित)।
- सहयोग के अन्य क्षेत्र: दोनों पक्षों ने छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (Small Modular Reactors - SMRs) और उन्नत परमाणु रिएक्टरों पर सहयोग करने पर सहमति जताई। यह भारत की 'न्यूक्लियर एनर्जी फॉर क्लाइमेट चेंज' रणनीति के अनुरूप है।
- व्यापक आर्थिक संदर्भ: समझौता व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (Comprehensive Economic Partnership Agreement - CEPA) की दिशा में एक कदम है, जिसे वर्ष के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य है। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाने का संकल्प लिया है (वर्तमान में यह लगभग 9 बिलियन डॉलर के आसपास है)।
भारत के लिए रणनीतिक महत्व
भारत का लक्ष्य 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन प्राप्त करना है, जिसमें परमाणु ऊर्जा महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। वर्तमान परमाणु क्षमता लगभग 8 गीगावाट है, जिसे 2030 तक 22-25 गीगावाट और 2050 तक बहुत अधिक बढ़ाने की योजना है। कनाडा से यूरेनियम आपूर्ति भारत को रूस, कजाकिस्तान और अन्य स्रोतों पर निर्भरता कम करने में मदद करेगी। साथ ही, SMRs पर सहयोग से भारत स्वदेशी तकनीक विकास में तेजी ला सकता है।
यह समझौता 'आत्मनिर्भर भारत' और 'क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन' के एजेंडे को मजबूत करता है, क्योंकि परमाणु ऊर्जा बेसलोड पावर प्रदान करती है जो सौर और पवन ऊर्जा की intermittency को संतुलित कर सकती है।
द्विपक्षीय संबंधों पर प्रभाव
यह समझौता भारत-कनाडा संबंधों में तनाव के बाद 'रीसेट' का प्रतीक है। दोनों नेताओं ने महत्वपूर्ण खनिजों, एलएनजी, सौर, हाइड्रोजन और रक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर भी जोर दिया। CEPA की सफलता से व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में वृद्धि होगी, जो दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए लाभदायक सिद्ध होगा।
निष्कर्ष
2 मार्च 2026 का यूरेनियम समझौता मात्र एक वाणिज्यिक सौदा नहीं है, बल्कि यह स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का एक मजबूत उदाहरण है। यह भारत की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ कनाडा के साथ ऐतिहासिक संबंधों को नई ऊंचाई प्रदान करता है। भविष्य में SMRs और उन्नत रिएक्टरों पर सहयोग से दोनों देश जलवायु परिवर्तन से निपटने में वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभा सकते हैं। यह समझौता सिद्ध करता है कि कूटनीति और आर्थिक हित राजनीतिक मतभेदों पर विजय प्राप्त कर सकते हैं।
(संदर्भ: कैमेको की आधिकारिक घोषणा, विश्व न्यूक्लियर न्यूज, रॉयटर्स, ब्लूमबर्ग, और भारत-कनाडा संयुक्त बयान, मार्च 2026)
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