अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस विशेष: अदृश्य कंधों पर टिकी दुनिया – नारी शक्ति की अनंत गाथा
नारी, वह शक्ति जो सृष्टि की रचयिता है, वह धरा जो जीवन को पोषित करती है, वह अग्नि जो अंधकार को चीरती है। हर वर्ष 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस हमें उस नारी-तत्व की स्मृति कराता है, जो न केवल घर-परिवार की नींव संवारती है, अपितु समस्त मानव-जाति की प्रगति का आधार बनती है।
इस वर्ष 2026 में वैश्विक संदेश "Give To Gain" है – अर्थात् देने से प्राप्ति। जब हम नारी को अवसर देते हैं, सम्मान देते हैं, शिक्षा, संसाधन, सुरक्षा और स्वतंत्रता प्रदान करते हैं, तो वह प्राप्ति बहुगुणित होकर लौटती है। परिवार मजबूत होता है, समाज समृद्ध होता है, राष्ट्र ऊँचा उठता है। UN Women का आह्वान "Rights. Justice. Action. For ALL Women and Girls" भी यही पुकारता है – अधिकार, न्याय और ठोस कार्रवाई, ताकि प्रत्येक नारी और बालिका भेदभाव, हिंसा तथा असमानता के बंधनों से मुक्त हो सके।
अदृश्य श्रम: वह बोझ जो आँखों से ओझल रहता है
पुरुष कहता है, "मैं दुनिया का भार उठाए हुए हूँ।" किंतु सत्य यह है कि वह भार भी एक नारी के अदृश्य कंधों पर टिका है। घर का सारा प्रबंधन, संतान की परवरिश, वृद्धजनों की सेवा, भावनात्मक संतुलन, रात्रि-जागरण, प्रातः-उत्थान – यह सब "कर्तव्य" कहकर अनदेखा कर दिया जाता है। यदि यह अदृश्य श्रम एक पल के लिए रुक जाए, तो सारा तंत्र ठप हो जाएगा। नारी वह आधारशिला है, जिस पर पुरुष का आत्मविश्वास खड़ा है, समाज की संरचना टिकी है।परिवर्तन की लहर: नारी अब नेतृत्व की शिखर पर
आज का काल नारी के उत्थान का काल है। भारत में नारी अब केवल सहचारी नहीं, अपितु मार्गदर्शक, नेता और विजेता बन रही है।खेल-क्षेत्र में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने 2025 में ICC Women's World Cup जीतकर इतिहास रचा – पहली बार यह गौरव भारत के नाम हुआ। स्मृति मंधाना को BBC Indian Sportswoman of the Year 2025 का सम्मान प्राप्त हुआ। प्रीति पाल (पैरालंपिक), दिव्या देशमुख (शतरंज) जैसी नारियों ने वैश्विक मंच पर भारत का झंडा फहराया। ASMITA जैसे कार्यक्रमों से लाखों महिला एथलीट्स को बल मिला।
विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, राजनीति, प्रशासन – हर क्षेत्र में नारी की छाप गहरी होती जा रही है। पंचायतों से संसद तक, महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है।
चुनौतियाँ अभी बाकी हैं
प्रगति के बावजूद वेतन-असमानता, कार्यस्थल पर उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, शिक्षा-स्वास्थ्य में असमान पहुँच, सामाजिक रूढ़ियाँ – ये बाधाएँ अभी विद्यमान हैं। "Give To Gain" हमें स्मरण कराता है कि इन बाधाओं को हटाने के लिए समाज को उदार होकर देना होगा – देना होगा अवसर, देना होगा न्याय, देना होगा सम्मान।स्वामी विवेकानंद का वह वचन आज भी मंत्र-सा गूँजता है – "किसी राष्ट्र की प्रगति का सबसे अच्छा मापदंड यह है कि वह अपनी महिलाओं के साथ कैसा व्यवहार करता है।"
भारत का संकल्प
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, स्वयं सहायता समूह, पंचायती राज में 50% आरक्षण, कौशल विकास योजनाएँ – ये सभी कदम नारी को आत्मनिर्भर बनाने के हैं। किंतु सच्चा सशक्तिकरण तब होगा, जब हमारी मानसिकता बदलेगी – जब हम उनके योगदान को "कर्तव्य" नहीं, अपितु अमूल्य श्रम मानेंगे।अंतिम आह्वान
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मात्र उत्सव नहीं, एक गहन चिंतन है। क्या हम नारी के अदृश्य योगदान को देख पाते हैं? क्या हम उनके श्रम का यथोचित सम्मान करते हैं? क्या हम उन्हें सच्चे अर्थों में समान भागीदार मानते हैं?दुनिया उन अदृश्य हाथों पर टिकी है जो चुपचाप सब कुछ संभालती हैं – वे नारी के हाथ हैं। "Give To Gain" का सार यही है – जब हम नारी को देते हैं, तो हम सब प्राप्त करते हैं।
पुरुष और नारी मिलकर ही सृष्टि को संवारते हैं। आइए, इस दिवस पर प्रतिज्ञा करें – अदृश्य को दृश्य बनाने की, सहायक को नेतृत्व प्रदान करने की, और एक समान, न्यायपूर्ण, समृद्ध समाज रचने की।
नारी शक्ति का सम्मान करो, क्योंकि यही सभ्यता की मूलाधार है।
शुभ अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस! 🌸
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