PRAGATI and Viksit Bharat @2047: How Proactive Governance is Shaping India's Developed Nation Journey
PRAGATI और विकसित भारत @2047 की यात्रा: एक अकादमिक विश्लेषण
प्रस्तावना
भारत की विकास यात्रा में प्रशासनिक नवाचारों का महत्व सदैव केंद्रीय रहा है, और PRAGATI (Pro-Active Governance and Timely Implementation) इसी क्रम में एक मील का पत्थर साबित हुआ है। नीति आयोग के प्रमुख सदस्यों में से एक, राजीव गाबा के हालिया विशेष साक्षात्कार ने इस मंच को विकसित भारत @2047 के महत्वाकांक्षी लक्ष्य से जोड़कर एक नया आयाम प्रदान किया है। इस साक्षात्कार में शासन की गतिशीलता, संघीय सहयोग, तकनीकी एकीकरण और जवाबदेही के तत्वों पर गहन चर्चा हुई, जो भारत के दीर्घकालिक विकास के लिए आवश्यक हैं। यह विश्लेषण PRAGATI के वैचारिक आधारभूत सिद्धांतों, उसके संस्थागत प्रभावों और 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की परिकल्पना से उसके अंतर्संबंधों की पड़ताल करता है। इसमें प्रशासनिक सुधारों की व्यापकता को समझते हुए, हम देखेंगे कि कैसे एक डिजिटल प्लेटफॉर्म नीति निर्माण से क्रियान्वयन तक की यात्रा को सुगम बना सकता है, साथ ही इसमें निहित चुनौतियों का भी मूल्यांकन करेंगे।
PRAGMATIC: अवधारणा और संस्थागत ढांचा
PRAGATI को समझने के लिए हमें उसके मूल उद्देश्य की ओर लौटना होगा। यह एक डिजिटल-आधारित, बहु-स्तरीय शासन मंच है, जो 2015 में लॉन्च किया गया था और प्रधानमंत्री की सीधी निगरानी में संचालित होता है। इसका प्राथमिक लक्ष्य केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय स्थापित करना, महत्वपूर्ण परियोजनाओं की समयबद्ध निगरानी सुनिश्चित करना, तथा प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत बनाना है। पारंपरिक प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अक्सर देखी जाने वाली विलंब और असंगति की समस्या को संबोधित करते हुए, PRAGATI नीति से निष्पादन (Policy to Delivery) की उस खाई को पाटने का प्रयास करता है जो विकासात्मक लक्ष्यों को बाधित करती है।
संस्थागत रूप से, यह मंच वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, रियल-टाइम डेटा ट्रैकिंग और जीआईएस (Geographic Information System) जैसे उपकरणों का उपयोग करता है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में मासिक समीक्षाएं होती हैं, जिसमें केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों और संबंधित अधिकारियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाती है। उदाहरणस्वरूप, बुनियादी ढांचा परियोजनाएं जैसे रेलवे, राजमार्ग और ऊर्जा क्षेत्र की योजनाओं में PRAGATI ने सैकड़ों परियोजनाओं को गति प्रदान की है, जिससे अरबों रुपये की बचत हुई है। यह ढांचा न केवल कार्यक्षमता बढ़ाता है, बल्कि शासन को अधिक उत्तरदायी बनाता है, जहां निर्णय डेटा-आधारित होते हैं न कि केवल कागजी प्रक्रियाओं पर निर्भर।
राजीव गाबा के विचार: शासन का नया प्रतिमान
राजीव गाबा के साक्षात्कार में PRAGATI को एक साधारण समीक्षा तंत्र से कहीं अधिक महत्व दिया गया है—यह परिणाम-आधारित शासन (Outcome-based Governance) का प्रतीक है। उन्होंने पारंपरिक फाइल-आधारित प्रशासन की सीमाओं को रेखांकित करते हुए कहा कि डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल टूल्स और रियल-टाइम मॉनिटरिंग के माध्यम से शासन को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सकता है। यह दृष्टिकोण 'न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन' के सिद्धांत से गहराई से जुड़ा है, जो मोदी सरकार की प्रशासनिक नीति का मूल मंत्र रहा है।
गाबा के अनुसार, PRAGATI शासन को एक सक्रिय (pro-active) रूप प्रदान करता है, जहां समस्याओं का पूर्वानुमान और समाधान प्राथमिकता होता है। उदाहरण के लिए, महामारी के दौरान स्वास्थ्य संबंधी परियोजनाओं की निगरानी में इस मंच की भूमिका ने दिखाया कि कैसे तकनीक संकटकाल में निर्णय प्रक्रिया को तेज कर सकती है। उनके विचार प्रशासनिक सुधारों के उस व्यापक एजेंडे को प्रतिबिंबित करते हैं, जहां शासन न केवल कुशल हो, बल्कि नागरिक-केंद्रित भी हो। यह प्रतिमान भारतीय लोक प्रशासन की सैद्धांतिक बहसों—जैसे मैक्स वेबर के नौकरशाही मॉडल से आगे बढ़कर—आधुनिक डिजिटल गवर्नेंस की ओर इशारा करता है।
सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद
PRAGATI का एक प्रमुख योगदान सहकारी संघवाद को मजबूत करना है। केंद्र और राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों की संयुक्त भागीदारी से यह मंच नीति निर्माण में राज्यों की भूमिका को मान्यता देता है, साथ ही क्षेत्रीय विविधताओं—जैसे उत्तर-पूर्व के आदिवासी क्षेत्रों या दक्षिण के औद्योगिक केंद्रों—को समाहित करता है। गौबा ने साक्षात्कार में इस पर जोर दिया कि PRAGATI संघीय ढांचे को मजबूत बनाता है, जहां केंद्र राज्यों को सहयोगी के रूप में देखता है न कि अधीनस्थ के रूप में।
साथ ही, यह मंच प्रतिस्पर्धी संघवाद को प्रोत्साहित करता है, जहां राज्य बेहतर प्रदर्शन के लिए आपस में प्रतिस्पर्धा करते हैं। नीति आयोग के मूल दर्शन से जुड़ा यह तत्व, जैसे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग या एसडीजी इंडेक्स, राज्यों को नवाचार के लिए प्रेरित करता है। उदाहरणस्वरूप, PRAGATI के माध्यम से मॉनिटर की गई जल संरक्षण परियोजनाओं में कुछ राज्यों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, जिसने अन्यों को अनुसरण करने के लिए प्रेरित किया। यह दोहरी व्यवस्था—सहयोग और प्रतिस्पर्धा—भारतीय संघवाद की गतिशीलता को दर्शाती है, जो संविधान की भावना के अनुरूप है लेकिन आधुनिक चुनौतियों से निपटने के लिए अनुकूलित है।
विकसित भारत @2047: दीर्घकालिक दृष्टि
2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य—जो स्वतंत्रता की शताब्दी का प्रतीक है—केवल आर्थिक समृद्धि तक सीमित नहीं है। इसमें समावेशी विकास, मानव पूंजी का सशक्तिकरण, बुनियादी ढांचे का विस्तार, तथा सुशासन और संस्थागत विश्वसनीयता जैसे बहुआयामी तत्व शामिल हैं। गाबा के अनुसार, PRAGATI जैसे मंच इस दृष्टि को कार्यान्वयन योग्य रणनीतियों में बदलने का माध्यम हैं। यह लक्ष्य अमृत काल की अवधारणा से जुड़ा है, जहां भारत को वैश्विक आर्थिक शक्ति बनाने के लिए सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राथमिकता दी जाती है।
उदाहरण के लिए, PRAGATI ने राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को तेज किया है, जो 2047 तक के इंफ्रास्ट्रक्चर लक्ष्यों का आधार हैं। साथ ही, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में मानव पूंजी विकास के लिए यह मंच डेटा-ड्रिवन नीतियां सुनिश्चित करता है। गाबा ने जोर दिया कि विकसित भारत की यात्रा में PRAGATI एक पुल की तरह कार्य करता है, जो वर्तमान चुनौतियों से भविष्य की आकांक्षाओं को जोड़ता है। यह दृष्टि आर्थिक सिद्धांतों—जैसे अमर्त्य सेन के क्षमता दृष्टिकोण—से प्रेरित है, जहां विकास मात्र जीडीपी वृद्धि नहीं, बल्कि जीवन गुणवत्ता का उन्नयन है।
तकनीक, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक जवाबदेही
PRAGATI की सफलता का मूल तकनीकी एकीकरण में निहित है। डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से यह निर्णय प्रक्रिया को तेज करती है, भ्रष्टाचार और विलंब की संभावनाओं को घटाती है, तथा नागरिकों के प्रति राज्य की जवाबदेही बढ़ाती है। गाबा ने साक्षात्कार में बताया कि रियल-टाइम डैशबोर्ड और एआई-आधारित एनालिटिक्स कैसे प्रशासन को पारदर्शी बनाते हैं। उदाहरणस्वरूप, परियोजना ट्रैकिंग में जीआईएस का उपयोग स्थानीय स्तर पर मुद्दों की पहचान करता है, जो पहले असंभव था।
यह मंच लोकतांत्रिक मूल्यों को तकनीकी साधनों से जोड़ता है, जहां सूचना का अधिकार (RTI) जैसे कानूनों को डिजिटल रूप से मजबूत किया जाता है। परिणामस्वरूप, शासन अधिक समावेशी हो जाता है, और नागरिक भागीदारी बढ़ती है। हालांकि, डिजिटल डिवाइड की समस्या को ध्यान में रखते हुए, गाबा ने क्षमता निर्माण पर जोर दिया, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसका लाभ पहुंचे।
समालोचनात्मक दृष्टि
PRAGATI की सराहना के बावजूद, कुछ समालोचनाएं अपरिहार्य हैं। अत्यधिक केंद्रीकरण की आशंका है, जहां प्रधानमंत्री कार्यालय की प्रमुख भूमिका राज्यों की स्वायत्तता पर प्रभाव डाल सकती है। संघीय संरचना में यह असंतुलन—जैसे पंचायती राज संस्थाओं की सीमित भागीदारी—स्थानीय स्तर पर क्षमता निर्माण की आवश्यकता को उजागर करता है। गौबा ने इन मुद्दों को स्वीकार किया, लेकिन जोर दिया कि सहयोगी दृष्टिकोण से इन्हें संबोधित किया जा सकता है।
विकसित भारत की यात्रा तभी संतुलित होगी जब दक्षता के साथ संघीय संतुलन, पर्यावरणीय स्थिरता और सामाजिक न्याय जैसे तत्वों को भी प्राथमिकता दी जाए। उदाहरणस्वरूप, कुछ परियोजनाओं में पर्यावरणीय मंजूरी में विलंब PRAGATI की सीमाओं को दर्शाता है। इसलिए, निरंतर विमर्श और सुधार आवश्यक हैं, ताकि यह मंच एकांगी न बने।
निष्कर्ष
राजीव गौबा के साक्षात्कार के आलोक में PRAGATI भारतीय शासन प्रणाली में एक संरचनात्मक परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करता है। यह न केवल परियोजनाओं की निगरानी का उपकरण है, बल्कि विकसित भारत @2047 की परिकल्पना को साकार करने वाला रणनीतिक माध्यम भी है। अंततः, इसकी सफलता तकनीक, संघवाद और लोकतांत्रिक मूल्यों के बीच संतुलन पर निर्भर करेगी। यदि PRAGATI इन तत्वों को समाहित कर सके, तो भारत की विकास यात्रा न केवल गतिशील होगी, बल्कि समावेशी और सतत भी। यह हमें याद दिलाता है कि शासन का उद्देश्य मात्र कुशलता नहीं, बल्कि एक न्यायपूर्ण समाज का निर्माण है।
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