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End of Hereditary Peers in the House of Lords: A Historic Reform in British Parliamentary Democracy

हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स की सदस्यता का अंत: ब्रिटिश लोकतंत्र के विकास का एक निर्णायक अध्याय ब्रिटेन की संसदीय परंपरा विश्व की सबसे पुरानी और स्थायी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है। किंतु इस गौरवपूर्ण परंपरा के भीतर कुछ ऐसे तत्व भी रहे हैं जो आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ लंबे समय से असंगत माने जाते रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख था हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स (Hereditary Peers) की सदस्यता—एक ऐसी व्यवस्था जिसके अंतर्गत कुलीन परिवारों के सदस्य केवल अपने जन्म के आधार पर संसद के ऊपरी सदन में स्थान प्राप्त करते थे। मार्च 2026 में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित Hereditary Peers Bill इस व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इसके साथ ही सदियों से चली आ रही वह परंपरा समाप्त हो जाएगी जिसके अंतर्गत राजनीतिक शक्ति का एक हिस्सा जन्माधिकार से निर्धारित होता था। यह सुधार न केवल एक संस्थागत परिवर्तन है, बल्कि ब्रिटिश लोकतंत्र के क्रमिक आधुनिकीकरण की उस दीर्घकालिक प्रक्रिया का हिस्सा है जिसमें सामंती विरासतों को धीरे-धीरे लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरू...

India’s Global South Diplomacy: PM Modi’s Jordan, Ethiopia and Oman Visit Strengthens Strategic and Civilizational Ties

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जॉर्डन, इथियोपिया तथा ओमान की तीन-राष्ट्र यात्रा

सभ्यतागत संबंधों का पुनर्संयोजन एवं वैश्विक दक्षिण के साथ भारत की सक्रिय साझेदारी

भूमिका

15 दिसंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान की तीन-राष्ट्र यात्रा का आरंभ भारत की विदेश नीति में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक क्षण के रूप में देखा जा सकता है। यह यात्रा केवल औपचारिक राजनयिक संपर्कों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन गहरे सभ्यतागत, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का पुनर्संयोजन है, जो भारत को पश्चिम एशिया और अफ्रीका से सदियों से जोड़ते आए हैं। प्रधानमंत्री के प्रस्थान वक्तव्य में निहित संदेश स्पष्ट है—भारत वैश्विक दक्षिण (Global South) के देशों के साथ साझेदारी को केवल रणनीतिक आवश्यकता नहीं, बल्कि नैतिक और ऐतिहासिक दायित्व के रूप में देखता है।

यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बहुध्रुवीयता की ओर अग्रसर है, वैश्विक आपूर्ति शृंखलाएं पुनर्गठित हो रही हैं और विकासशील देशों की सामूहिक आवाज़ को नया आत्मविश्वास मिल रहा है। इस पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री की यह यात्रा भारत की ‘वैश्विक दक्षिण प्रथम’ और ‘सभ्यतागत कूटनीति’ की सोच को व्यवहारिक धरातल पर उतारने का प्रयास है।


जॉर्डन: परंपरा, विश्वास और स्थायित्व पर आधारित साझेदारी

प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा का पहला पड़ाव हाशेमाइट किंगडम ऑफ जॉर्डन है, जो भारत-जॉर्डन कूटनीतिक संबंधों की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विशेष महत्व रखता है। जॉर्डन का पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक स्थान, उसकी स्थिरता और संतुलित विदेश नीति उसे भारत के लिए एक विश्वसनीय साझेदार बनाती है।

राजा अब्दुल्लाह द्वितीय इब्न अल हुसैन के साथ होने वाली वार्ता में द्विपक्षीय संबंधों के समस्त आयाम—राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा तथा क्षेत्रीय सुरक्षा—पर व्यापक चर्चा की अपेक्षा है। विशेष रूप से उर्वरक क्षेत्र में जॉर्डन की भूमिका भारत की खाद्य सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रही है, जहां फॉस्फेट और पोटाश का आयात दीर्घकालिक सहयोग का प्रतीक है। इसके अतिरिक्त रक्षा सहयोग, आतंकवाद-रोधी समन्वय और निवेश के अवसर दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा दे सकते हैं।

लगभग चार दशकों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पूर्ण द्विपक्षीय यात्रा जॉर्डन की राजधानी अम्मान में भारत की पश्चिम एशिया नीति में इस देश के बढ़ते महत्व को रेखांकित करती है। भारतीय प्रवासी समुदाय के साथ संवाद इस साझेदारी के मानवीय पक्ष को और सुदृढ़ करता है, जो कूटनीति को केवल सरकारों तक सीमित न रखकर समाजों के बीच सेतु बनाता है।


इथियोपिया: अफ्रीका और वैश्विक दक्षिण की सामूहिक आवाज़

यात्रा का दूसरा चरण इथियोपिया है—अफ्रीका की सभ्यताओं का पालना और अफ्रीकी संघ का केंद्र। यह भारतीय प्रधानमंत्री की इथियोपिया की पहली यात्रा है, जो अपने आप में ऐतिहासिक है। प्रधानमंत्री अबिय अहमद के साथ वार्ता तथा इथियोपियाई संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करना भारत-अफ्रीका संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत देता है।

भारत और इथियोपिया दोनों ही ऐसे देश हैं जिन्होंने उपनिवेशवाद के दंश को झेला है और विकास के अपने-अपने लोकतांत्रिक रास्ते चुने हैं। इस साझा ऐतिहासिक अनुभव ने दोनों देशों को वैश्विक दक्षिण के मंच पर स्वाभाविक साझेदार बना दिया है। विकास सहयोग, क्षमता निर्माण, स्वास्थ्य, शिक्षा और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में भारत का अनुभव इथियोपिया सहित अफ्रीकी देशों के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकता है।

अदीस अबाबा स्थित अफ्रीकी संघ के माध्यम से भारत का बढ़ता संवाद यह दर्शाता है कि भारत अफ्रीका को केवल द्विपक्षीय साझेदार नहीं, बल्कि वैश्विक शासन में एक निर्णायक शक्ति के रूप में देखता है। प्रवासी भारतीय समुदाय के साथ प्रधानमंत्री का संवाद इस साझेदारी को जमीनी स्तर पर मजबूती प्रदान करता है।


ओमान: रणनीतिक गहराई और समुद्री सहयोग

यात्रा का अंतिम चरण सुल्तानेट ऑफ ओमान है, जहां भारत-ओमान कूटनीतिक संबंधों के 70 वर्ष पूरे हो रहे हैं। ओमान ऐतिहासिक रूप से भारत का समुद्री पड़ोसी रहा है, और हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी भूमिका भारत की समुद्री रणनीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

सुल्तान हैथम बिन तारिक के साथ होने वाली वार्ता में रणनीतिक साझेदारी को नई ऊर्जा मिलने की संभावना है। व्यापार, निवेश, ऊर्जा सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में सहयोग के साथ-साथ संभावित भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) दोनों अर्थव्यवस्थाओं को नई गति दे सकता है। यह समझौता भारत के पश्चिम एशिया के साथ आर्थिक एकीकरण को और गहरा करेगा।

ओमान में बसे भारतीय प्रवासी न केवल दोनों देशों के आर्थिक संबंधों की रीढ़ हैं, बल्कि सांस्कृतिक सेतु के रूप में भी कार्य करते हैं। प्रधानमंत्री का उनका संबोधन भारत की ‘लोग-केन्द्रित कूटनीति’ का जीवंत उदाहरण है।


निष्कर्ष: सभ्यतागत कूटनीति से वैश्विक नेतृत्व तक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह तीन-राष्ट्र यात्रा भारत की विदेश नीति की उस परिपक्वता को दर्शाती है, जिसमें इतिहास, संस्कृति और आधुनिक रणनीति एक-दूसरे के पूरक बनते हैं। जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान—तीनों देशों के साथ संबंध भारत के लिए केवल रणनीतिक लाभ का साधन नहीं, बल्कि साझा विकास, स्थिरता और सम्मान पर आधारित साझेदारी का प्रतीक हैं।

‘पड़ोसी पहले’ और ‘वैश्विक दक्षिण प्रथम’ की सोच के साथ यह यात्रा भारत को एक ऐसे राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत करती है, जो संवाद, सहयोग और साझेदारी के माध्यम से वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोजने में विश्वास रखता है। यह यात्रा न केवल भारत की बढ़ती वैश्विक उपस्थिति का प्रमाण है, बल्कि उस नैतिक नेतृत्व की भी झलक देती है, जिसकी आज की दुनिया को सबसे अधिक आवश्यकता है।

With Times of India Inputs 

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