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Rising Attacks on Hindu Minorities in Bangladesh: Global Silence and Human Rights Concerns

The Silent Genocide: Persecution of Hindus in Bangladesh and the Moral Failure of the Global Community In an age where conflicts in Gaza, Ukraine, and other flashpoints command the world’s attention, a quieter yet deeply disturbing humanitarian crisis continues to unfold next door to India — in Bangladesh. Since the political upheaval and resignation of Prime Minister Sheikh Hasina in August 2024, reports of violence against the Hindu minority have escalated dramatically. Killings, arson attacks, vandalism of temples, forced displacement, economic boycotts, and intimidation have become frighteningly frequent. According to figures cited by Indian authorities, more than 2,200 incidents of violence against Hindus were recorded in 2024 alone , with similar patterns continuing through 2025 and into 2026. Independent reports corroborate these trends: homes torched, idols desecrated, businesses looted, and families compelled to flee ancestral lands. Yet, despite the mounting evidence, the w...

UPSC Current Affairs in Hindi : 26 April 2025

 दैनिक समसामयिकी लेख विश्लेषण व संकलन: 26 अप्रैल 2025



1-भारत-फ्रांस राफेल-M सौदा: रणनीतिक गहराई, नौसैनिक ताकत और रक्षा सहयोग की नई उड़ान

भूमिका:

भारत और फ्रांस के बीच लगभग ₹63,000 करोड़ मूल्य के 26 राफेल-M लड़ाकू विमानों के सौदे को अंतिम रूप देने की आधिकारिक घोषणा सोमवार को होने जा रही है। यह समझौता रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच गहराते रणनीतिक संबंधों और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की नौसैनिक क्षमताओं को मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


प्रमुख तथ्य:

  • सौदे की अनुमानित लागत: ₹63,000 करोड़
  • कुल राफेल-M विमानों की संख्या: 26 (22 सिंगल-सीटर + 4 ट्विन-सीटर ट्रेनर वर्जन)
  • सौदा: सरकार-से-सरकार (G-to-G) मॉडल के अंतर्गत
  • हस्ताक्षर: भारत और फ्रांस के रक्षा मंत्रियों द्वारा रिमोट माध्यम से

रणनीतिक महत्व:

  1. भारतीय नौसेना की ताकत में इजाफा:

    • राफेल-M (Marine) विशेष रूप से नौसेना के लिए डिजाइन किया गया संस्करण है, जो भारतीय नौसेना के नए एयरक्राफ्ट कैरियर्स जैसे INS Vikrant और INS Vikramaditya पर संचालन के लिए उपयुक्त है।
    • इससे भारतीय नौसेना की वायु शक्ति और समुद्री प्रभुत्व क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
  2. हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन:

    • चीन के आक्रामक समुद्री रुख को देखते हुए राफेल-M की तैनाती भारत को हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में रणनीतिक बढ़त देगी।
  3. अंतरराष्ट्रीय रक्षा सहयोग का विस्तार:

    • यह सौदा भारत-फ्रांस रक्षा सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। फ्रांस पहले से भारत का विश्वसनीय रक्षा साझेदार रहा है, जिसमें स्कॉर्पीन पनडुब्बियों और पूर्व के राफेल विमानों का सौदा शामिल है।

तकनीकी विशेषताएं (संक्षेप में):

  • राफेल-M एक ट्विन-इंजन, कैरियर-योग्य लड़ाकू विमान है।
  • यह air-to-air, air-to-ground, और reconnaissance मिशनों में सक्षम है।
  • इसमें Beyond Visual Range (BVR) मिसाइल, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम और हवा में ईंधन भरने की सुविधा है।

राजनीतिक और कूटनीतिक आयाम:

  • यह सौदा भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देता है और Make in India पहल में संभावित औद्योगिक सहयोग को जन्म दे सकता है।
  • यूरोप में फ्रांस की रक्षा कंपनियों के साथ सहयोग भारत के आत्मनिर्भरता के प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय समर्थन प्रदान करता है।

चुनौतियाँ और चिंताएँ:

  • सौदे की पारदर्शिता और लागत को लेकर भविष्य में राजनीतिक विवाद उत्पन्न हो सकते हैं, जैसा कि पहले के राफेल सौदे में हुआ था।
  • स्वदेशी वैकल्पिक विकल्पों (जैसे TEDBF – Twin Engine Deck Based Fighter) पर प्रभाव की भी समीक्षा आवश्यक है।

निष्कर्ष:

राफेल-M सौदा केवल एक रक्षा खरीद नहीं, बल्कि भारत की समुद्री रणनीति, वैश्विक कूटनीति और आत्मनिर्भर सैन्य क्षमता की दिशा में एक निर्णायक कदम है। यह सौदा भारत की समुद्री सुरक्षा, फ्रांस के साथ रक्षा सहयोग और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण का परिचायक है।


UPSC GS पेपर 2 और 3 के लिए संभावित प्रश्न:

  • भारत-फ्रांस रक्षा संबंधों की प्रगति और रणनीतिक महत्त्व का विश्लेषण करें।
  • राफेल-M सौदा भारतीय नौसेना की युद्ध क्षमता में किस प्रकार योगदान देगा?

2-पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद जल युद्ध: भारत की रणनीति और इसके निहितार्थ (यूपीएससी के दृष्टिकोण से)

परिचय
पहलगाम आतंकवादी हमले (22 अप्रैल, 2025) के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है। इस हमले, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई, को भारत ने पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी समूहों से जोड़ा। जवाब में, भारत ने कई कठोर कदम उठाए, जिनमें इंडस जल संधि (IWT) को निलंबित करना और अटारी-वाघा सीमा बंद करना शामिल है। जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने 25 अप्रैल, 2025 को घोषणा की कि सरकार यह सुनिश्चित करने की रणनीति बना रही है कि भारत से एक बूंद पानी भी पाकिस्तान न जाए। यह बयान गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उच्च-स्तरीय बैठक और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देशों के बाद आया। यह लेख यूपीएससी के दृष्टिकोण से इस नीति के भू-राजनीतिक, पर्यावरणीय, आर्थिक और सामरिक निहितार्थों का विश्लेषण करता है।
1. इंडस जल संधि और भारत की रणनीति
इंडस जल संधि का अवलोकन:
1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हस्ताक्षरित इंडस जल संधि, भारत और पाकिस्तान के बीच जल बंटवारे का एक महत्वपूर्ण समझौता है। इसके तहत, सतलुज, रावी और ब्यास नदियों का नियंत्रण भारत को, जबकि सिंधु, झेलम और चिनाब का नियंत्रण पाकिस्तान को दिया गया। भारत ने हमेशा इस संधि का पालन किया, लेकिन हाल के वर्षों में, खासकर आतंकवादी हमलों के बाद, भारत ने इसे निलंबित करने की मांग की है।
नई रणनीति:
  • जल प्रवाह को रोकना: जल शक्ति मंत्री ने कहा कि भारत बांधों, नहरों और अन्य बुनियादी ढांचे के माध्यम से यह सुनिश्चित करेगा कि पूर्वी नदियों (सतलुज, रावी, ब्यास) का पानी पूरी तरह से भारत में उपयोग हो।
  • बुनियादी ढांचे का विकास: भारत तेजी से बांध निर्माण और जलाशय परियोजनाओं को लागू करेगा, जैसे पंजाब और जम्मू-कश्मीर में शाहपुर कंडी और उझ बांध परियोजनाएं।
  • कानूनी समीक्षा: इंडस जल संधि के निलंबन की प्रक्रिया को लागू करने के लिए भारत संधि की शर्तों की कानूनी समीक्षा कर रहा है।
2. भू-राजनीतिक निहितार्थ
भारत की यह रणनीति दक्षिण एशिया की भू-राजनीति को गहराई से प्रभावित कर सकती है। यूपीएससी के दृष्टिकोण से, निम्नलिखित बिंदु महत्वपूर्ण हैं:
  • भारत-पाकिस्तान तनाव: जल प्रवाह को रोकना पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका होगा, क्योंकि वह अपनी कृषि और जल आपूर्ति के लिए इंडस नदी प्रणाली पर निर्भर है। पाकिस्तान ने इसे "युद्ध की स्थिति" करार दिया है, जिससे सैन्य टकराव की आशंका बढ़ी है।
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र जैसे संगठन इस मुद्दे पर मध्यस्थता की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, भारत ने स्पष्ट किया है कि आतंकवाद और जल संधि को अब अलग नहीं रखा जाएगा।
  • क्षेत्रीय गतिशीलता: यह कदम अफगानिस्तान और चीन जैसे अन्य हितधारकों को भी प्रभावित कर सकता है, क्योंकि इंडस नदी प्रणाली क्षेत्रीय जल सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
3. पर्यावरणीय और आर्थिक प्रभाव
पर्यावरणीय प्रभाव:
  • नदी पारिस्थितिकी: जल प्रवाह को रोकने से नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र, विशेष रूप से पाकिस्तान में, पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इससे जैव विविधता और मत्स्य पालन प्रभावित हो सकते हैं।
  • जलवायु परिवर्तन: हिमालयी ग्लेशियरों के पिघलने के कारण पहले से ही जल संकट गहरा रहा है। भारत की रणनीति इस संकट को और जटिल कर सकती है।
  • भारत में चुनौतियां: बड़े पैमाने पर बांध निर्माण से भारत में विस्थापन, वन विनाश और स्थानीय पर्यावरणीय समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
आर्थिक प्रभाव:
  • पाकिस्तान पर प्रभाव: पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था, जो मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है, को भारी नुकसान होगा। सिंध प्रांत, जो इंडस नदी पर निर्भर है, सबसे अधिक प्रभावित होगा।
  • भारत में निवेश: बांधों और नहरों के निर्माण के लिए भारत को भारी निवेश की आवश्यकता होगी। इससे अल्पकालिक आर्थिक दबाव बढ़ सकता है, लेकिन दीर्घकाल में जल संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा।
  • वैकल्पिक उपयोग: भारत पूर्वी नदियों के पानी का उपयोग पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में सिंचाई और पेयजल के लिए कर सकता है, जिससे इन क्षेत्रों में कृषि उत्पादकता बढ़ेगी।
4. सामरिक और सुरक्षा आयाम
पहलगाम हमले के बाद भारत की यह रणनीति केवल जल प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सामरिक कदम भी है। यूपीएससी के दृष्टिकोण से, निम्नलिखित बिंदु उल्लेखनीय हैं:
  • आतंकवाद पर दबाव: भारत ने स्पष्ट किया है कि आतंकवाद के खिलाफ उसकी नीति अब "शून्य सहिष्णुता" की होगी। जल प्रवाह को रोकना पाकिस्तान पर आर्थिक और सामरिक दबाव बनाने का एक तरीका है।
  • सैन्य तनाव: नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर बढ़ती गोलीबारी और पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के बयानों से सैन्य टकराव की आशंका बढ़ी है। भारत को अपनी सीमा सुरक्षा को और मजबूत करना होगा।
  • चीन का कारक: चीन, जो ब्रह्मपुत्र और अन्य नदियों पर बांध बना रहा है, इस स्थिति का लाभ उठा सकता है। भारत को क्षेत्रीय जल सुरक्षा के लिए एक व्यापक रणनीति की आवश्यकता है।
5. यूपीएससी के लिए प्रासंगिकता
यह मुद्दा यूपीएससी की प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के लिए कई दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है:
  • सामान्य अध्ययन पेपर 2 (अंतरराष्ट्रीय संबंध): भारत-पाकिस्तान संबंध, इंडस जल संधि, और क्षेत्रीय सहयोग के मुद्दे इस पेपर के लिए प्रासंगिक हैं।
  • सामान्य अध्ययन पेपर 3 (पर्यावरण, अर्थव्यवस्था, सुरक्षा): जल संसाधन प्रबंधन, पर्यावरणीय प्रभाव, आतंकवाद विरोधी रणनीति, और बुनियादी ढांचे के विकास का आर्थिक प्रभाव इस पेपर के लिए महत्वपूर्ण हैं।
  • निबंध और साक्षात्कार: जल युद्ध, आतंकवाद, और भारत की विदेश नीति पर निबंध लेखन के लिए यह एक उपयुक्त विषय है। साक्षात्कार में, उम्मीदवारों से इस रणनीति के नैतिक, कानूनी और सामरिक पहलुओं पर सवाल पूछे जा सकते हैं।
निष्कर्ष और सुझाव
भारत की "एक बूंद पानी नहीं" की रणनीति एक साहसिक और जोखिम भरा कदम है, जो आतंकवाद के खिलाफ कठोर रुख को दर्शाता है। हालांकि, इसके दीर्घकालिक निहितार्थों को ध्यान में रखते हुए, भारत को निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए:
  1. कूटनीतिक संतुलन: भारत को अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह समझाना होगा कि यह कदम आतंकवाद के खिलाफ है, न कि पाकिस्तानी नागरिकों के खिलाफ।
  2. पर्यावरणीय प्रबंधन: बांध निर्माण के पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने के लिए टिकाऊ प्रौद्योगिकियों का उपयोग किया जाना चाहिए।
  3. क्षेत्रीय सहयोग: भारत को अफगानिस्तान और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों के साथ जल प्रबंधन पर सहयोग बढ़ाना चाहिए।
  4. आंतरिक तैयारी: बांध परियोजनाओं से प्रभावित स्थानीय समुदायों के पुनर्वास और आजीविका के लिए ठोस योजनाएं बनाई जानी चाहिए।
यूपीएससी उम्मीदवारों के लिए, इस घटना का अध्ययन जल संसाधन प्रबंधन, क्षेत्रीय सुरक्षा, और भारत की विदेश नीति के व्यापक संदर्भ में करना महत्वपूर्ण है। यह रणनीति न केवल वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य को समझने में मदद करती है, बल्कि भारत के सामरिक दृष्टिकोण को भी रेखांकित करती है।
संदर्भ:
  • जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल का बयान, 25 अप्रैल, 2025
  • गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में उच्च-स्तरीय बैठक
  • इंडस जल संधि, 1960
  • पहलगाम आतंकवादी हमला, 22 अप्रैल, 2025
  • 3-पहलगाम आतंकवादी हमला और पाकिस्तान द्वारा हवाई क्षेत्र बंद करना: यूपीएससी के दृष्टिकोण से विश्लेषण

    परिचय
    22 अप्रैल, 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले ने भारत और पाकिस्तान के बीच पहले से तनावपूर्ण संबंधों को और गहरा कर दिया। इस हमले में 26 लोगों की जान गई, जिनमें 25 भारतीय और एक नेपाली नागरिक शामिल थे। भारत ने इस हमले के लिए पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी समूहों को जिम्मेदार ठहराया, जिसके बाद भारत ने कई कठोर कदम उठाए, जैसे इंडस जल संधि को निलंबित करना, अटारी-वाघा सीमा बंद करना और पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द करना। जवाब में, पाकिस्तान ने 24 अप्रैल, 2025 को भारतीय विमानन कंपनियों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय एयरलाइंस को अपनी उड़ानें रद्द करनी पड़ीं और वैकल्पिक मार्ग अपनाने पड़े। यह लेख यूपीएससी के दृष्टिकोण से इस घटनाक्रम के भू-राजनीतिक, आर्थिक और सामरिक प्रभावों का विश्लेषण करता है।
    1. भू-राजनीतिक प्रभाव
    पहलगाम हमले और उसके बाद पाकिस्तान द्वारा हवाई क्षेत्र बंद करने से भारत-पाकिस्तान संबंधों में एक नया तनाव उत्पन्न हुआ है। यह घटना दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बन सकती है। यूपीएससी के दृष्टिकोण से, निम्नलिखित बिंदु महत्वपूर्ण हैं:
    • द्विपक्षीय संबंधों में गिरावट: भारत द्वारा इंडस जल संधि को निलंबित करने और सिमला समझौते पर पाकिस्तान की प्रतिक्रिया ने दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी को उजागर किया। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इसे "युद्ध की स्थिति" के रूप में चित्रित किया, जो क्षेत्र में तनाव को और बढ़ाता है।
    • अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका: अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड ने भारत के साथ एकजुटता व्यक्त की, लेकिन वैश्विक शक्तियों की मध्यस्थता की कमी इस स्थिति को जटिल बनाती है।
    • क्षेत्रीय संगठनों पर प्रभाव: सार्क जैसे क्षेत्रीय संगठनों की प्रासंगिकता पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव ने क्षेत्रीय सहयोग को कमजोर किया है।
    2. आर्थिक प्रभाव
    पाकिस्तान द्वारा हवाई क्षेत्र बंद करने से भारतीय विमानन क्षेत्र पर गहरा प्रभाव पड़ा है। यूपीएससी के दृष्टिकोण से, यह आर्थिक और व्यापारिक नीतियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है:
    • विमानन क्षेत्र पर प्रभाव: इंडिगो, एयर इंडिया, स्पाइसजेट और अन्य भारतीय एयरलाइंस को अपने अंतरराष्ट्रीय मार्गों को बदलना पड़ा, जिससे उड़ान का समय 2-2.5 घंटे बढ़ गया। इससे ईंधन खपत में वृद्धि हुई और परिचालन लागत में 8-12% की वृद्धि की संभावना है।
    • 2019 की पुनरावृत्ति: 2019 में बालाकोट हवाई हमले के बाद पाकिस्तान ने अपने हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया था, जिससे भारतीय एयरलाइंस को लगभग 700 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। वर्तमान स्थिति में भी समान आर्थिक प्रभाव की आशंका है।
    • उपभोक्ताओं पर बोझ: लंबे मार्गों और बढ़ी हुई लागत के कारण हवाई किराए में वृद्धि हुई है, जिससे यात्रियों पर आर्थिक बोझ बढ़ा है।
    3. सामरिक और सुरक्षा प्रभाव
    पहलगाम हमला और उसके बाद की घटनाएं भारत की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा नीतियों के लिए महत्वपूर्ण हैं। यूपीएससी के दृष्टिकोण से, निम्नलिखित बिंदु उल्लेखनीय हैं:
    • आतंकवाद विरोधी रणनीति: भारत ने आतंकवाद के खिलाफ कठोर रुख अपनाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवादियों और उनके समर्थकों को "अकल्पनीय सजा" देने की प्रतिबद्धता जताई। इस संदर्भ में, खुफिया तंत्र को मजबूत करना और सीमा पार घुसपैठ को रोकना महत्वपूर्ण है।
    • एलओसी पर तनाव: हमले के बाद पाकिस्तानी सेना द्वारा नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर अकारण गोलीबारी ने दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव को बढ़ा दिया। यह स्थिति 2021 के युद्धविराम समझौते को कमजोर कर सकती है।
    • क्षेत्रीय सुरक्षा गतिशीलता: पाकिस्तान का हवाई क्षेत्र बंद करना केवल भारत को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि मध्य एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के लिए उड़ान मार्गों को भी प्रभावित करता है। यदि भारत जवाबी कार्रवाई के रूप में अपना हवाई क्षेत्र बंद करता है, तो पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (पीआईए) को भारी नुकसान होगा।
    4. यूपीएससी के लिए प्रासंगिकता
    पहलगाम हमला और पाकिस्तान द्वारा हवाई क्षेत्र बंद करना यूपीएससी की प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के लिए कई दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है:
    • सामान्य अध्ययन पेपर 2 (अंतरराष्ट्रीय संबंध): यह घटना भारत-पाकिस्तान संबंधों, क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की भूमिका के संदर्भ में प्रासंगिक है।
    • सामान्य अध्ययन पेपर 3 (आंतरिक सुरक्षा और अर्थव्यवस्था): आतंकवाद, सीमा पार घुसपैठ, और विमानन क्षेत्र पर आर्थिक प्रभाव इस पेपर के लिए महत्वपूर्ण हैं।
    • निबंध और साक्षात्कार: यह विषय क्षेत्रीय सहयोग, आतंकवाद विरोधी रणनीति, और भारत की विदेश नीति पर निबंध लेखन के लिए उपयुक्त है। साक्षात्कार में, उम्मीदवारों से इस मुद्दे पर भारत की रणनीति और वैश्विक प्रभावों पर सवाल पूछे जा सकते हैं।
    निष्कर्ष और सुझाव
    पहलगाम आतंकवादी हमला और उसके बाद पाकिस्तान द्वारा हवाई क्षेत्र बंद करना भारत के लिए एक जटिल भू-राजनीतिक, आर्थिक और सामरिक चुनौती प्रस्तुत करता है। भारत को इस स्थिति से निपटने के लिए निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए:
    1. कूटनीतिक प्रयास: भारत को संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान के आतंकवाद समर्थन को उजागर करना चाहिए।
    2. आर्थिक उपाय: विमानन क्षेत्र की लागत को कम करने के लिए वैकल्पिक मार्गों का अनुकूलन और यात्रियों के लिए सब्सिडी जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
    3. सुरक्षा उपाय: खुफिया तंत्र को मजबूत करना, सीमा सुरक्षा को बढ़ाना और आतंकवाद विरोधी अभियानों को तेज करना आवश्यक है।
    4. क्षेत्रीय सहयोग: भारत को अफगानिस्तान, ईरान और मध्य एशियाई देशों के साथ हवाई मार्गों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार करना चाहिए।
    यूपीएससी उम्मीदवारों के लिए, इस घटना का अध्ययन भारत की विदेश नीति, आंतरिक सुरक्षा और आर्थिक चुनौतियों के व्यापक संदर्भ में करना महत्वपूर्ण है। यह घटना न केवल वर्तमान परिदृश्य को समझने में मदद करती है, बल्कि भविष्य की नीतिगत चुनौतियों के लिए भी तैयार करती है।
  • 4-पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भारत की वीजा नीति और पाकिस्तानी नागरिकों पर प्रतिबंध: यूपीएससी के दृष्टिकोण से विश्लेषण

    परिचय
    22 अप्रैल, 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले, जिसमें 26 लोगों की जान गई, ने भारत-पाकिस्तान संबंधों में एक नया तनाव उत्पन्न किया। भारत ने इस हमले के लिए पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी समूहों को जिम्मेदार ठहराया। जवाब में, भारत सरकार ने 25 अप्रैल, 2025 को पाकिस्तानी नागरिकों के लिए 14 श्रेणियों के वीजा, जैसे व्यापार, सम्मेलन, आगंतुक और तीर्थयात्री वीजा, रद्द करने की घोषणा की। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार, यह निर्णय सुरक्षा पर कैबिनेट समिति (CCS) की बैठक के बाद लिया गया। साथ ही, गृह मंत्री अमित शाह ने सभी मुख्यमंत्रियों से संपर्क कर यह सुनिश्चित करने को कहा कि निर्धारित समय सीमा के बाद कोई भी पाकिस्तानी नागरिक उनके राज्यों में न रहे। यह लेख यूपीएससी के दृष्टिकोण से इस नीति के भू-राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और सामरिक प्रभावों का विश्लेषण करता है।
    1. भारत की वीजा नीति और प्रतिबंध
    नीति की मुख्य विशेषताएं:
    • 14 श्रेणियों का रद्दीकरण: व्यापार, सम्मेलन, आगंतुक, तीर्थयात्री और अन्य वीजा श्रेणियों को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया। इसका मतलब है कि पाकिस्तानी नागरिक अब इन उद्देश्यों के लिए भारत में प्रवेश नहीं कर सकेंगे।
    • पाकिस्तानी नागरिकों का निष्कासन: गृह मंत्रालय ने राज्यों को निर्देश दिया कि वे समय सीमा के बाद किसी भी पाकिस्तानी नागरिक को रहने की अनुमति न दें। यह कदम भारत में मौजूद पाकिस्तानी नागरिकों की निगरानी और निष्कासन को सुनिश्चित करता है।
    • सुरक्षा पर जोर: यह निर्णय पहलगाम हमले के बाद भारत की "आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता" नीति का हिस्सा है।
    2. भू-राजनीतिक प्रभाव
    पाकिस्तानी नागरिकों पर वीजा प्रतिबंध और निष्कासन नीति दक्षिण एशिया की भू-राजनीति को गहराई से प्रभावित कर सकती है। यूपीएससी के दृष्टिकोण से, निम्नलिखित बिंदु महत्वपूर्ण हैं:
    • भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव: यह कदम इंडस जल संधि के निलंबन और अटारी-वाघा सीमा बंद करने जैसे अन्य उपायों के साथ मिलकर दोनों देशों के बीच संबंधों को और खराब करता है। पाकिस्तान ने इसे "युद्ध की स्थिति" करार दिया, जिससे सैन्य तनाव की आशंका बढ़ी है।
    • लोगों से लोगों का संपर्क: वीजा प्रतिबंध से दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, धार्मिक और पारिवारिक संबंध प्रभावित होंगे। उदाहरण के लिए, करतारपुर कॉरिडोर जैसे तीर्थयात्रा मार्गों पर असर पड़ सकता है।
    • अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया: संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक मंचों पर भारत को यह साबित करना होगा कि यह कदम आतंकवाद के खिलाफ है, न कि पाकिस्तानी नागरिकों के खिलाफ। अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड ने भारत के साथ एकजुटता दिखाई, लेकिन वैश्विक मध्यस्थता की कमी स्थिति को जटिल कर सकती है।
    3. सामाजिक और मानवीय प्रभाव
    सामाजिक प्रभाव:
    • पाकिस्तानी नागरिकों पर प्रभाव: भारत में रह रहे पाकिस्तानी नागरिक, जैसे छात्र, व्यापारी या रिश्तेदारों से मिलने आए लोग, अब अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। समय सीमा के बाद उन्हें देश छोड़ना होगा, जिससे मानवीय संकट की आशंका है।
    • भारत में धारणा: यह नीति भारत में राष्ट्रवादी भावनाओं को बढ़ा सकती है, लेकिन यह अल्पसंख्यक समुदायों और उदारवादी समूहों के बीच चिंता भी पैदा कर सकती है।
    मानवीय प्रभाव:
    • परिवारों का बिछड़ना: कई भारतीय और पाकिस्तानी परिवार सीमा पार विवाह और रिश्तेदारी के कारण जुड़े हैं। वीजा प्रतिबंध से इन परिवारों का पुनर्मिलन मुश्किल हो जाएगा।
    • धार्मिक तीर्थयात्रा: सिख तीर्थयात्रियों के लिए करतारपुर कॉरिडोर और अन्य धार्मिक स्थलों पर जाने वाले लोगों के लिए यह नीति बाधा बन सकती है।
    4. आर्थिक प्रभाव
    व्यापार और पर्यटन:
    • व्यापार पर प्रभाव: व्यापार वीजा रद्द होने से भारत-पाकिस्तान के बीच सीमित व्यापारिक गतिविधियां, विशेष रूप से अनौपचारिक व्यापार, प्रभावित होंगी। दोनों देशों के बीच पहले से ही व्यापार न्यूनतम है, और यह कदम इसे और कम करेगा।
    • पर्यटन क्षेत्र: पाकिस्तानी तीर्थयात्रियों और आगंतुकों के लिए भारत के पर्यटन क्षेत्र, विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर और पंजाब में, प्रभावित होगा।
    वैश्विक व्यापार:
    • वीजा प्रतिबंधों से भारत की छवि एक खुले और वैश्विक व्यापार केंद्र के रूप में प्रभावित हो सकती है। हालांकि, यह प्रभाव सीमित होगा, क्योंकि यह नीति केवल पाकिस्तानी नागरिकों पर लागू है।
    5. सामरिक और सुरक्षा आयाम
    पहलगाम हमले के बाद यह नीति भारत की व्यापक आतंकवाद विरोधी रणनीति का हिस्सा है। यूपीएससी के दृष्टिकोण से, निम्नलिखित बिंदु उल्लेखनीय हैं:
    • आतंकवाद पर दबाव: वीजा प्रतिबंध और निष्कासन नीति का उद्देश्य पाकिस्तान पर अप्रत्यक्ष दबाव डालना है, ताकि वह आतंकवादी समूहों के खिलाफ कार्रवाई करे। भारत ने स्पष्ट किया है कि आतंकवाद और सामान्य द्विपक्षीय संबंध अब साथ-साथ नहीं चल सकते।
    • आंतरिक सुरक्षा: पाकिस्तानी नागरिकों की निगरानी और निष्कासन से भारत की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। यह खुफिया तंत्र और सीमा प्रबंधन को और प्रभावी बनाने की दिशा में एक कदम है।
    • नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर तनाव: वीजा प्रतिबंधों के साथ-साथ, पाकिस्तानी सेना द्वारा एलओसी पर गोलीबारी ने सैन्य तनाव को बढ़ाया है। भारत को अपनी सीमा सुरक्षा और सैन्य तैयारियों को और मजबूत करना होगा।
    6. यूपीएससी के लिए प्रासंगिकता
    यह मुद्दा यूपीएससी की प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के लिए कई दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है:
    • सामान्य अध्ययन पेपर 2 (अंतरराष्ट्रीय संबंध): भारत-पाकिस्तान संबंध, आतंकवाद और विदेश नीति के प्रभाव इस पेपर के लिए प्रासंगिक हैं।
    • सामान्य अध्ययन पेपर 3 (आंतरिक सुरक्षा): आतंकवाद विरोधी रणनीति, सीमा प्रबंधन, और वीजा नीति के सुरक्षा आयाम इस पेपर के लिए महत्वपूर्ण हैं।
    • निबंध और साक्षात्कार: आतंकवाद, राष्ट्रीय सुरक्षा, और लोगों से लोगों के संपर्क जैसे विषयों पर निबंध लेखन के लिए यह एक उपयुक्त विषय है। साक्षात्कार में, उम्मीदवारों से इस नीति के नैतिक, सामाजिक और सामरिक पहलुओं पर सवाल पूछे जा सकते हैं।
    निष्कर्ष और सुझाव
    पाकिस्तानी नागरिकों के लिए वीजा रद्द करना और निष्कासन नीति भारत की आतंकवाद के खिलाफ कठोर रुख को दर्शाती है। हालांकि, इसके दीर्घकालिक प्रभावों को ध्यान में रखते हुए, भारत को निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए:
    1. कूटनीतिक संतुलन: भारत को वैश्विक मंचों पर यह स्पष्ट करना चाहिए कि यह नीति आतंकवाद के खिलाफ है, न कि पाकिस्तानी नागरिकों के खिलाफ। इससे भारत की वैश्विक छवि बनी रहेगी।
    2. मानवीय उपाय: वीजा प्रतिबंधों से प्रभावित परिवारों और तीर्थयात्रियों के लिए विशेष छूट या वैकल्पिक व्यवस्थाएं की जानी चाहिए, जैसे करतारपुर कॉरिडोर के लिए सीमित पहुंच।
    3. आंतरिक निगरानी: राज्यों को पाकिस्तानी नागरिकों की निगरानी और निष्कासन के लिए एक पारदर्शी और मानवीय प्रक्रिया अपनानी चाहिए, ताकि मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायतें न हों।
    4. क्षेत्रीय सहयोग: भारत को अन्य पड़ोसी देशों, जैसे अफगानिस्तान और बांग्लादेश, के साथ सुरक्षा और कूटनीतिक सहयोग बढ़ाना चाहिए।
    यूपीएससी उम्मीदवारों के लिए, इस नीति का अध्ययन राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति, और सामाजिक-मानवीय प्रभावों के व्यापक संदर्भ में करना महत्वपूर्ण है। यह घटना न केवल भारत की सामरिक प्राथमिकताओं को उजागर करती है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक कूटनीति के लिए भी महत्वपूर्ण सबक प्रदान करती है।
    संदर्भ:
    • केंद्रीय गृह मंत्रालय का बयान, 25 अप्रैल, 2025
    • गृह मंत्री अमित शाह द्वारा मुख्यमंत्रियों को निर्देश
    • पहलगाम आतंकवादी हमला, 22 अप्रैल, 2025

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