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Rising Attacks on Hindu Minorities in Bangladesh: Global Silence and Human Rights Concerns

The Silent Genocide: Persecution of Hindus in Bangladesh and the Moral Failure of the Global Community In an age where conflicts in Gaza, Ukraine, and other flashpoints command the world’s attention, a quieter yet deeply disturbing humanitarian crisis continues to unfold next door to India — in Bangladesh. Since the political upheaval and resignation of Prime Minister Sheikh Hasina in August 2024, reports of violence against the Hindu minority have escalated dramatically. Killings, arson attacks, vandalism of temples, forced displacement, economic boycotts, and intimidation have become frighteningly frequent. According to figures cited by Indian authorities, more than 2,200 incidents of violence against Hindus were recorded in 2024 alone , with similar patterns continuing through 2025 and into 2026. Independent reports corroborate these trends: homes torched, idols desecrated, businesses looted, and families compelled to flee ancestral lands. Yet, despite the mounting evidence, the w...

Bangladesh General Election 2026: Democratic Reset After the Gen-Z Revolution

बांग्लादेश के आम चुनाव 2026: राजनीतिक पुनर्जन्म और लोकतांत्रिक पुनर्संरचना की ऐतिहासिक घड़ी भूमिका: एक युग का अंत, एक नए अध्याय की शुरुआत 12 फरवरी 2026 को बांग्लादेश ने न केवल अपना 13वां संसदीय आम चुनाव संपन्न किया, बल्कि एक साथ हुए संवैधानिक जनमत संग्रह के माध्यम से अपने राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करने का प्रयास भी किया। यह चुनाव सामान्य सत्ता परिवर्तन भर नहीं था, बल्कि अगस्त 2024 की छात्र-नेतृत्व वाली ‘जुलाई क्रांति’ के बाद पहला राष्ट्रीय लोकतांत्रिक परीक्षण था, जिसने देश की सत्ता संरचना को जड़ से हिला दिया। लगभग डेढ़ दशक तक सत्ता में रहीं शेख हसीना के पतन, अवामी लीग की चुनावी अनुपस्थिति और व्यापक संस्थागत सुधारों की पृष्ठभूमि में यह चुनाव बांग्लादेश के इतिहास में एक राजनीतिक पुनर्जन्म के रूप में दर्ज किया जा रहा है। पृष्ठभूमि: ‘जुलाई क्रांति’ और सत्ता संरचना का ध्वंस 2009 से 2024 तक शेख हसीना का शासन राजनीतिक स्थिरता के साथ-साथ बढ़ते अधिनायकवादी रुझानों के लिए भी जाना गया। विपक्ष का दमन, चुनावों की विश्वसनीयता पर प्रश्न, न्यायपालिका और मीडिया पर दबाव तथा अल्पसंख्यकों—विशेषकर ह...

Pakistan–US Relations: “Used and Throw Like Toilet Paper” Remark, Historical Context, Strategic Mistakes and Future Policy

पाकिस्तान और अमेरिका के संबंध: “टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल कर फेंक दिया” – एक विश्लेषणात्मक लेख भूमिका अंतरराष्ट्रीय राजनीति में गठबंधन और शत्रुता प्रायः हितों पर आधारित होती हैं। पाकिस्तान और अमेरिका के संबंध इसका स्पष्ट उदाहरण हैं। हाल के दिनों में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने अमेरिका के साथ संबंधों पर तीखी आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका ने पाकिस्तान को “used and threw us like toilet paper” यानी “टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल किया और फिर फेंक दिया।” यह बयान पाकिस्तान की राष्ट्रीय असेंबली या किसी सार्वजनिक मंच पर दिया गया, जहां उन्होंने अतीत के अनुभवों के आधार पर अमेरिका पर आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने अमेरिका के लिए भारी कुर्बानियां दीं, लेकिन बदले में उसे धोखा और उपेक्षा ही मिली। यह बयान पाकिस्तान की विदेश नीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ की ओर संकेत करता है, जहां अब पाकिस्तान स्वयं को स्वतंत्र निर्णय लेने वाला देश के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पाकिस्तान और अमेरिका के संबंधों की नींव 1950 के दशक में पड़ी, जब शीत युद्ध के दौर में पाकिस्तान ने अमे...

Civil–Military Relations in India: Security, Democracy and the Naravane Memoir Debate

जनरल एम.एम. नरवणे की आत्मकथा विवाद: सिविल–मिलिट्री संबंधों और भारतीय लोकतंत्र की कसौटी फरवरी 2026 में भारत की संसद से शुरू हुआ पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा “Four Stars of Destiny” से जुड़ा विवाद जल्द ही एक साधारण राजनीतिक बहस से आगे बढ़कर सिविल–मिलिट्री संबंधों, राष्ट्रीय सुरक्षा, लोकतांत्रिक पारदर्शिता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे गहरे संवैधानिक प्रश्नों का प्रतीक बन गया। यह घटना इस बात का उदाहरण है कि जब सेना, राजनीति और सार्वजनिक विमर्श एक-दूसरे से टकराते हैं, तो लोकतंत्र की संस्थागत परिपक्वता की वास्तविक परीक्षा होती है। विवाद की पृष्ठभूमि और घटनाक्रम जनरल नरवणे (सेना प्रमुख: 2019–2022) की यह आत्मकथा उनके सैन्य जीवन के अनुभवों पर आधारित बताई जाती है, जिसमें 2020 का गलवान घाटी संघर्ष, चीन के साथ सीमा तनाव, अग्निपथ योजना जैसी सैन्य सुधार नीतियाँ और संकटकाल में राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका का उल्लेख कथित रूप से किया गया है। चूँकि भारत में सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों की पुस्तकों पर भी Official Secrets Act, 1923 और रक्षा मंत्रालय के दिशा-निर्देश लागू ...

Delhi High Court, DU and RTI Case: Objection on Delay in Appeal Over PM Modi’s Degree and Transparency vs Privacy Debate

दिल्ली उच्च न्यायालय, आरटीआई और प्रधानमंत्री की शैक्षणिक योग्यता पारदर्शिता बनाम गोपनीयता का संवैधानिक द्वंद्व भूमिका सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 भारतीय लोकतंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही का एक सशक्त साधन है। किंतु जब यह अधिकार संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों से जुड़ी सूचनाओं तक पहुँचता है, तब निजता, संस्थागत स्वायत्तता और सार्वजनिक हित के बीच संतुलन का प्रश्न उभरता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्नातक डिग्री से संबंधित सूचना के प्रकटीकरण को लेकर चल रहा विवाद इसी संतुलन की कसौटी पर है। हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मामले में दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) को तीन सप्ताह का समय देते हुए अपील में हुई देरी पर ‘आपत्ति दाखिल’ करने को कहा है , जिससे यह मामला और अधिक विधिक व संवैधानिक महत्व ग्रहण कर लेता है। प्रकरण की पृष्ठभूमि एक आरटीआई आवेदन के माध्यम से प्रधानमंत्री की बी.ए. डिग्री से संबंधित विवरण मांगा गया। केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने सूचना उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। दिल्ली विश्वविद्यालय ने इस आदेश के विरुद्ध अपील दायर की, किंतु यह अपील निर्धारित समय-सीमा के बा...

India–Seychelles Relations 2026: Strategic Partnership, $175 Million Aid, MoUs and Maritime Cooperation

भारत–सेशेल्स संबंधों में नई ऊर्जा: साझी समुद्री विरासत से रणनीतिक साझेदारी तक हिंद महासागर की लहरों पर टिकी भारत और सेशेल्स की मित्रता ने 9 फरवरी 2026 को नई दिल्ली के ऐतिहासिक राष्ट्रपति भवन में एक नया आत्मविश्वास प्राप्त किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के सम्मान में आयोजित राजकीय भोज केवल एक औपचारिक कूटनीतिक आयोजन नहीं था, बल्कि यह दोनों देशों के बीच परस्पर विश्वास, साझा मूल्यों और भविष्य उन्मुख साझेदारी का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा। यह अवसर इसलिए भी विशेष था क्योंकि राष्ट्रपति हर्मिनी की यह भारत की पहली राजकीय यात्रा थी, जो उनके राष्ट्रपति पद संभालने के बाद हुई, और साथ ही वर्ष 2026 दोनों देशों के लिए प्रतीकात्मक महत्व रखता है—सेशेल्स की स्वतंत्रता के 50 वर्ष और भारत–सेशेल्स राजनयिक संबंधों के भी 50 वर्ष पूरे होना। साझा मूल्यों पर आधारित संबंध राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि भारत–सेशेल्स संबंध केवल रणनीतिक हितों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लोकतंत्र, बहुलवाद, कानून के शासन और परस्पर सम्मान जैसे साझा मूल्यों पर आधारित ह...

Epstein Files Expose: Power, Justice, and the Failure of Democratic Institutions

Epstein Files: सत्ता, न्याय और संस्थागत मौन की विफलता लोकतंत्र की नींव केवल चुनावों और संवैधानिक प्रावधानों पर नहीं टिकी होती, बल्कि न्याय की निष्पक्षता, संस्थागत नैतिकता और सार्वजनिक विश्वास पर निर्भर करती है। जब कानून प्रभावशाली व्यक्तियों के सामने झुकता दिखाई देता है, तो यह किसी एक व्यक्ति या मामले की विफलता भर नहीं रह जाती, बल्कि पूरे शासन तंत्र की नैतिक साख पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर देती है। जेफरी एपस्टीन से जुड़े Epstein Files इसी व्यापक संस्थागत संकट का प्रतीक बनकर उभरे हैं। जनवरी 2026 में Epstein Files Transparency Act के तहत अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी किए गए लाखों दस्तावेज़, छवियाँ और वीडियो केवल यौन अपराध और मानव तस्करी की भयावहता को उजागर नहीं करते, बल्कि सत्ता, धन, राजनीति और न्यायिक संस्थानों के जटिल गठजोड़ को भी सामने लाते हैं। यह प्रकरण इस मूल प्रश्न को पुनः केंद्र में लाता है कि आधुनिक लोकतंत्रों में कानून के समक्ष समानता कितनी वास्तविक है। एलिट इम्युनिटी और न्यायिक विवेकाधिकार जेफरी एपस्टीन का मामला सतही तौर पर एक व्यक्ति के आपराधिक कृत्यों की कहानी ...

Jimmy Lai Verdict 2026: Hong Kong’s Press Freedom Crushed Under China’s National Security Law

जिमी लाई: हॉन्ग कॉन्ग की प्रेस स्वतंत्रता और लोकतंत्र की लड़ाई का प्रतीक 9 फरवरी 2026 को हॉन्ग कॉन्ग के इतिहास में एक ऐसा निर्णय दर्ज हुआ, जिसने शहर की आत्मा, उसकी प्रेस स्वतंत्रता और “एक देश, दो प्रणाली” की अवधारणा पर गहरे प्रश्नचिह्न लगा दिए। हॉन्ग कॉन्ग हाई कोर्ट ने 78 वर्षीय मीडिया उद्यमी, लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ता और बीजिंग के मुखर आलोचक जिमी लाई (लाई ची-यिंग) को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSL) के तहत 20 वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई। यह सजा न केवल NSL के तहत अब तक की सबसे लंबी सजा है, बल्कि लाई की उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए इसे व्यापक रूप से व्यावहारिक आजीवन कारावास माना जा रहा है। यह फैसला किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। यह हॉन्ग कॉन्ग के उस दौर के अंत का प्रतीक है, जहाँ स्वतंत्र पत्रकारिता, राजनीतिक असहमति और नागरिक स्वतंत्रताएँ शहर की पहचान हुआ करती थीं। एक शरणार्थी से मीडिया सम्राट तक: जिमी लाई की यात्रा जिमी लाई की कहानी स्वयं में संघर्ष, साहस और आत्मनिर्भरता की मिसाल है। मुख्यभूमि चीन में जन्मे लाई किशोरावस्था में ही कम्युनिस्ट शासन से भागकर हॉन्ग कॉन्ग ...

Bangladesh Election 2026: Gen Z Politics, Constitutional Referendum and the Future of Democracy

बांग्लादेश चुनाव 2026: लोकतंत्र की नई दिशा या पुरानी चुनौतियों का नया अध्याय? दक्षिण एशिया की राजनीति में बांग्लादेश एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। 12 फरवरी 2026 को होने वाले आम चुनाव केवल 300-सदस्यीय जतीय संसद के गठन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे उस राजनीतिक प्रयोग की परीक्षा भी हैं, जिसे अंतरिम सरकार ‘दूसरे गणराज्य’ की संज्ञा दे रही है। जुलाई 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले विद्रोह के बाद यह पहला बड़ा लोकतांत्रिक अभ्यास है, जिसने 15 वर्षों से सत्ता में रही शेख हसीना की अवामी लीग सरकार का अंत कर दिया था। करीब 12.7 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं की भागीदारी वाला यह चुनाव इसलिए भी असाधारण है क्योंकि इसके साथ ही संवैधानिक जनमत संग्रह (रेफरेंडम) भी कराया जा रहा है, जो बांग्लादेश की शासन-व्यवस्था की संरचना को ही बदल सकता है। यह प्रश्न अब केवल सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि यह तय करने का है कि क्या बांग्लादेश वास्तव में लोकतांत्रिक पुनर्जन्म की ओर बढ़ रहा है या फिर वह पुराने संघर्षों के नए संस्करण से रूबरू होने वाला है। विद्रोह के बाद की राजनीति: एक शून्य और कई दावेदार 2024 का छात्र आंदोलन केव...

Sawalkot Hydropower Project: India’s Strategic Push After Indus Waters Treaty Suspension

सावलकोट हाइड्रो प्रोजेक्ट: जल-रणनीति, ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय संकल्प का नया अध्याय भारत की जल-नीति और ऊर्जा रणनीति लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, कूटनीतिक आपत्तियों और सुरक्षा चिंताओं के बीच संतुलन साधती रही है। किंतु सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद, मोदी सरकार ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि अब विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा और ऊर्जा आत्मनिर्भरता—तीनों पर कोई समझौता नहीं होगा। चिनाब नदी पर प्रस्तावित सावलकोट हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट इसी बदली हुई रणनीतिक सोच का सबसे सशक्त और ठोस प्रमाण बनकर उभरा है। सरकारी कंपनी एनएचपीसी (NHPC) द्वारा 5,129 करोड़ रुपये के प्रमुख सिविल वर्क पैकेज का टेंडर जारी होना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि दशकों से रुके एक राष्ट्रीय स्वप्न को गति देने का निर्णायक क्षण है। यह परियोजना जम्मू-कश्मीर के विकास, भारत की ऊर्जा सुरक्षा और दक्षिण एशिया की भू-राजनीति—तीनों को एक साथ प्रभावित करने की क्षमता रखती है। सिंधु जल संधि का निलंबन: सुरक्षा और संप्रभुता का संदेश 1960 में हुई सिंधु जल संधि को लंबे समय तक भारत-पाक संबंधों में स्थिरता का प्रतीक माना...

India–Malaysia Strategic Partnership 2026: Defence, Semiconductor, Trade and Security Cooperation Strengthened

भारत–मलेशिया संबंध: रणनीतिक साझेदारी से भविष्य की साझा यात्रा तक भूमिका इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के पुनर्गठन और उभरती प्रौद्योगिकियों के युग में भारत और मलेशिया के संबंध नई रणनीतिक प्रासंगिकता प्राप्त कर रहे हैं। 8 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मलेशिया की आधिकारिक यात्रा इसी क्रम में एक निर्णायक कूटनीतिक पड़ाव साबित हुई। प्रधानमंत्री मोदी और मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के बीच हुई व्यापक बातचीत ने दोनों देशों के संबंधों को आर्थिक साझेदारी से आगे बढ़ाकर रणनीतिक, तकनीकी और सुरक्षा सहयोग के स्तर पर सुदृढ़ किया है। 2026 की पहली विदेश यात्रा: मलेशिया की प्राथमिकता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस यात्रा को 2026 की अपनी पहली विदेश यात्रा बताते हुए यह स्पष्ट संदेश दिया कि मलेशिया भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ और इंडो-पैसिफिक रणनीति में एक महत्वपूर्ण साझेदार है। उन्होंने कहा कि भारत-मलेशिया सहयोग अब केवल पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह कृषि, विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल प्रौद्योगिकी और सेमीकंडक्टर जै...

Pakistan’s New Regional Strategy: Bangladesh–China–Myanmar Axis and India’s Strategic Challenges

पाकिस्तान का नया क्षेत्रीय दांव: बांग्लादेश–चीन–म्यांमार धुरी और भारत के लिए उभरती चुनौतियाँ भूमिका: बदलती भू-राजनीति का संकेत दक्षिण एशिया और हिंद-प्रशांत क्षेत्र इस समय गहन भू-राजनीतिक पुनर्संरचना के दौर से गुजर रहे हैं। 2020 के बाद वैश्विक शक्ति संतुलन में आए बदलाव—चीन का आक्रामक उदय, अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा, और क्षेत्रीय संगठनों की निष्क्रियता—ने छोटे और मध्यम देशों को नई रणनीतिक दिशाएँ तलाशने के लिए प्रेरित किया है। इसी पृष्ठभूमि में पाकिस्तान द्वारा बांग्लादेश, चीन और म्यांमार के साथ एक नए क्षेत्रीय सहयोग तंत्र के निर्माण की कोशिश को देखा जाना चाहिए। यह पहल केवल कूटनीतिक या आर्थिक नहीं है; इसके भीतर भारत को रणनीतिक रूप से सीमित करने, SAARC जैसी व्यवस्थाओं को अप्रासंगिक बनाने और चीन-केंद्रित क्षेत्रीय व्यवस्था को बढ़ावा देने का स्पष्ट संकेत निहित है। बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन और क्षेत्रीय समीकरण 2024 में बांग्लादेश में छात्र-नेतृत्व वाले जनआंदोलन के बाद शेख हसीना सरकार का पतन और नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन एक निर्णायक मोड़ साबि...

India–US Interim Trade Deal 2026: Tariff Cuts, Market Access and Strategic Balance in Bilateral Economic Ties

भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता: रणनीतिक संतुलन और आर्थिक यथार्थ का संगम भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध लंबे समय से संभावनाओं और विवादों—दोनों से भरे रहे हैं। शुल्क युद्ध, बाज़ार पहुँच की मांगें और कृषि जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को लेकर मतभेद समय-समय पर इन रिश्तों में तनाव पैदा करते रहे हैं। ऐसे में 7 फरवरी 2026 को घोषित भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते का फ्रेमवर्क केवल एक आर्थिक दस्तावेज़ नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक भू-आर्थिक परिदृश्य में दोनों देशों की रणनीतिक समझ का संकेत है। यह समझौता एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) की दिशा में पहला ठोस कदम माना जा रहा है। खास बात यह है कि हालिया टैरिफ तनावों के बावजूद दोनों देशों ने टकराव की बजाय सहयोग का रास्ता चुना है। टैरिफ कटौती: भारतीय निर्यात के लिए नई राह इस अंतरिम समझौते की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ में भारी कटौती है। जहां पहले कई उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक शुल्क लगाया जा रहा था, वहीं अब इसे औसतन 18 प्रतिशत तक लाने पर सहमति बनी है। कुछ श्रे...

India Wins 6th ICC U-19 World Cup 2026, Defeats England by 100 Runs in Historic Final

भारत की छठी अंडर-19 विश्व कप जीत (2026): परीक्षा-दृष्टि से विश्लेषण 1. समाचार का महत्व (Why in News?) 6 फरवरी 2026 को भारत ने ICC अंडर-19 पुरुष क्रिकेट विश्व कप का खिताब जीतकर: छठी बार चैंपियन बनने का रिकॉर्ड बनाया ऑस्ट्रेलिया को पीछे छोड़ते हुए सबसे सफल टीम बनी लगातार दूसरा खिताब (2024–2026) जीतने वाली गिनी-चुनी टीमों में शामिल हुई ➡️ यह खबर खेल, युवा नीति, soft power और मानव संसाधन विकास से जुड़ी हुई है। 2. Prelims के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Direct Questions Ready) स्थान व तिथि फाइनल: 6 फरवरी 2026 स्थान: हरारे स्पोर्ट्स क्लब, जिम्बाब्वे मैच तथ्य भारत: 411/9 (50 ओवर) – फाइनल में सर्वोच्च स्कोर इंग्लैंड: 311/10 (40.2 ओवर) जीत का अंतर: 100 रन (U-19 WC फाइनल में सबसे बड़ी रन-जीत) रिकॉर्ड भारत का 6वां U-19 विश्व कप खिताब वैभव सूर्यवंशी (14 वर्ष): U-19 WC फाइनल का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर (175 रन) सबसे कम उम्र में फाइनल में शतक/रिकॉर्ड पारी प्लेयर ऑफ द मैच वैभव सूर्यवंशी 3. U-19 विश्व कप में भारत का इतिहास (Static + Current Linkage) वर्ष उपलब्धि ...

Iran–US Nuclear Talks in Oman 2026: Diplomacy, Deadlock and the Risk of Middle East Conflict

ओमान में ईरान–अमेरिका परमाणु वार्ता: कूटनीति की सतर्क शुरुआत मध्य पूर्व की भू-राजनीति में स्थिरता एक दुर्लभ अतिथि रही है, किंतु ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दे जब सामने आते हैं, तो क्षेत्रीय अस्थिरता वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बन जाती है। 6 फरवरी 2026 को ओमान की राजधानी मस्कट में ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच अप्रत्यक्ष उच्च-स्तरीय वार्ता का आयोजन इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण है। यह वार्ता महज द्विपक्षीय संवाद नहीं थी, अपितु यह परीक्षा थी कि क्या गहन अविश्वास और हाल के सैन्य टकरावों के बावजूद कूटनीति अभी भी प्रभावी विकल्प बनी हुई है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने वार्ता को “एक अच्छी शुरुआत” और “सकारात्मक” करार दिया, जबकि दोनों पक्षों ने आगे बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई। यह पहली ऐसी गंभीर कूटनीतिक पहल थी, जो 2025 में इजरायल-ईरान के बीच हुए 12-दिवसीय संघर्ष और अमेरिकी हमलों के बाद हुई। उस संघर्ष ने परमाणु स्थलों पर हमलों को जन्म दिया और क्षेत्र को युद्ध की कगार पर ला खड़ा किया था। ऐसे में मस्कट वार्ता ने संवाद की प्रक्रिया को पुनर्जीवित करने का संकेत दिया, यद्यप...

Pariksha Pe Charcha 2026: PM Modi’s Motivational Message for Students on Exams, Skills, Balance & Success

परीक्षा पे चर्चा 2026: परीक्षा से आगे जीवन की तैयारी का राष्ट्रीय संवाद परीक्षा का समय आते ही देश के करोड़ों छात्रों के मन में एक ही सवाल गूंजने लगता है— क्या मैं सफल हो पाऊँगा? इसी प्रश्न, इसी तनाव और इसी अनिश्चितता को संवाद और आत्मविश्वास में बदलने का मंच है ‘परीक्षा पे चर्चा’ । 6 फरवरी 2026 को आयोजित परीक्षा पे चर्चा के 9वें संस्करण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से सीधी बातचीत की। सुबह 10 बजे शुरू हुए इस कार्यक्रम में दिल्ली, गुजरात के देवमोगरा, तमिलनाडु के कोयंबटूर, छत्तीसगढ़ के रायपुर और असम के गुवाहाटी से जुड़े छात्रों ने भाग लिया। कार्यक्रम का लाइव प्रसारण दूरदर्शन, पीएम मोदी के यूट्यूब चैनल और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर किया गया। इस बार 4.5 करोड़ से अधिक रजिस्ट्रेशन होना यह दर्शाता है कि आज का छात्र केवल परीक्षा टिप्स नहीं, बल्कि जीवन मार्गदर्शन चाहता है। 🌱 सपने देखें, लेकिन एक्शन के साथ प्रधानमंत्री मोदी का संदेश बेहद स्पष्ट और प्रेरक था— “सपने न देखना जुर्म है, लेकिन सिर्फ सपनों की गुनगुनाहट से काम नहीं चलता।” उन्हों...

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AI Impact Summit 2026: How India Is Shaping the Future of Global AI Leadership from the Global South

भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026: महत्वाकांक्षा, नेतृत्व और चुनौतियों का संगम परिचय इक्कीसवीं सदी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) केवल तकनीकी नवाचार नहीं, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन का प्रमुख चालक बन चुकी है। वैश्विक प्रतिस्पर्धा के इस दौर में भारत ने AI को अपनी राष्ट्रीय विकास रणनीति के केंद्र में रखा है। इसी संदर्भ में 16 फरवरी 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 भारत की दीर्घकालिक AI दृष्टि का सार्वजनिक घोषणापत्र बनकर उभरी। समिट का उद्घाटन भारतीय प्रधानमंत्री मोदीजी ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की AI नीति “लाभ-केंद्रित” नहीं, बल्कि मानव-केंद्रित, समावेशी और उत्तरदायी होगी। 20 फरवरी तक चलने वाली यह समिट ग्लोबल साउथ में आयोजित अब तक का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय AI सम्मेलन है—जो अपने आप में भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का संकेत देता है। समिट की परिकल्पना: People, Planet, Progress इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 की वैचारिक धुरी तीन स्तंभों पर टिकी है— People (लोग), Planet (पर्या...

Civil–Military Relations in India: Security, Democracy and the Naravane Memoir Debate

जनरल एम.एम. नरवणे की आत्मकथा विवाद: सिविल–मिलिट्री संबंधों और भारतीय लोकतंत्र की कसौटी फरवरी 2026 में भारत की संसद से शुरू हुआ पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा “Four Stars of Destiny” से जुड़ा विवाद जल्द ही एक साधारण राजनीतिक बहस से आगे बढ़कर सिविल–मिलिट्री संबंधों, राष्ट्रीय सुरक्षा, लोकतांत्रिक पारदर्शिता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे गहरे संवैधानिक प्रश्नों का प्रतीक बन गया। यह घटना इस बात का उदाहरण है कि जब सेना, राजनीति और सार्वजनिक विमर्श एक-दूसरे से टकराते हैं, तो लोकतंत्र की संस्थागत परिपक्वता की वास्तविक परीक्षा होती है। विवाद की पृष्ठभूमि और घटनाक्रम जनरल नरवणे (सेना प्रमुख: 2019–2022) की यह आत्मकथा उनके सैन्य जीवन के अनुभवों पर आधारित बताई जाती है, जिसमें 2020 का गलवान घाटी संघर्ष, चीन के साथ सीमा तनाव, अग्निपथ योजना जैसी सैन्य सुधार नीतियाँ और संकटकाल में राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका का उल्लेख कथित रूप से किया गया है। चूँकि भारत में सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों की पुस्तकों पर भी Official Secrets Act, 1923 और रक्षा मंत्रालय के दिशा-निर्देश लागू ...

Bangladesh Election 2026: Gen-Z Uprising, Fall of Hasina Era and BNP’s Return to Power

बांग्लादेश चुनाव 2026: जेन-जेड विद्रोह से लोकतांत्रिक सत्ता परिवर्तन तक भूमिका 12 फरवरी 2026 को संपन्न बांग्लादेश का 13वाँ संसदीय आम चुनाव केवल एक नियमित लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं था, बल्कि यह दक्षिण एशिया के राजनीतिक इतिहास में एक युवा-प्रेरित सत्ता परिवर्तन का प्रतीक बन गया। 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले जन-उभार के बाद यह पहला बड़ा चुनाव था, जिसने 15 वर्षों से सत्ता में रही शेख हसीना की अवामी लीग के राजनीतिक प्रभुत्व का औपचारिक अंत कर दिया। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में गठित अंतरिम सरकार की देखरेख में हुए इस चुनाव ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को स्पष्ट जनादेश प्रदान किया और देश की राजनीति को एक नए युग में प्रवेश कराया। पृष्ठभूमि: 2024 का जन-उभार और सत्ता का पतन 2024 में बांग्लादेश ने अभूतपूर्व राजनीतिक उथल-पुथल देखी। विश्वविद्यालयों और शहरी केंद्रों से शुरू हुआ जेन-जेड (युवा पीढ़ी) का आंदोलन धीरे-धीरे एक व्यापक राष्ट्रीय विद्रोह में बदल गया। इस आंदोलन की मुख्य मांगें थीं— चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता सत्तावादी शासन का अंत भ्रष्टाचार औ...

Reforming Global Governance: Strategic Significance of the G4 Countries’ Munich Meeting 2026

बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार: G4 देशों की म्यूनिख बैठक का ऐतिहासिक महत्व भूमिका: बदलती विश्व-व्यवस्था और सुधार की अनिवार्यता 21वीं सदी की वैश्विक राजनीति गहन संक्रमण के दौर से गुजर रही है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद निर्मित बहुपक्षीय संस्थाएं—विशेषकर संयुक्त राष्ट्र—आज यूक्रेन युद्ध, गाज़ा–मध्य पूर्व संकट, इंडो-पैसिफिक तनाव, जलवायु आपातकाल, महामारी, और साइबर–स्पेस की चुनौतियों से जूझ रही हैं। यह स्पष्ट होता जा रहा है कि 1945 की संस्थागत संरचनाएँ 2026 की वास्तविकताओं के अनुरूप नहीं रहीं। इसी पृष्ठभूमि में G4 देशों—भारत, जर्मनी, जापान और ब्राज़ील —द्वारा बहुपक्षीय व्यवस्था, खासकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC), में सुधार की मांग को नया बल मिला है। फरवरी 2026 में के दौरान आयोजित G4 विदेश मंत्रियों की बैठक इस दिशा में एक निर्णायक प्रतीक बनकर उभरी। G4 का उदय: प्रतिनिधित्व की कमी के विरुद्ध सामूहिक आवाज G4 समूह का औपचारिक उभार 2005 में हुआ, जब इन चार देशों ने UNSC सुधार के लिए संयुक्त प्रस्ताव प्रस्तुत किया। आज ये देश वैश्विक अर्थव्यवस्था और शासन में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं— ...

Bangladesh BNP Historic Victory 2026: Impact on India-Bangladesh Relations

बांग्लादेश में बीएनपी की ऐतिहासिक जीत और भारत-बांग्लादेश संबंध: एक विस्तृत अकादमिक विश्लेषण प्रस्तावना 13 फरवरी 2026 को बांग्लादेश की राजनीति में एक निर्णायक परिवर्तन सामने आया, जब Bangladesh Nationalist Party (बीएनपी) ने संसदीय चुनाव में दो-तिहाई से अधिक बहुमत प्राप्त कर सत्ता में वापसी की। लगभग दो दशकों बाद यह परिवर्तन केवल सरकार बदलने की घटना नहीं, बल्कि बांग्लादेश की राजनीतिक दिशा, वैचारिक संतुलन और विदेश नीति की प्राथमिकताओं में संभावित पुनर्संरचना का संकेत है। संभावित प्रधानमंत्री के रूप में Tarique Rahman का उभार इस परिवर्तन को और भी महत्वपूर्ण बनाता है। यह चुनाव 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन के बाद हुआ, जिसने Sheikh Hasina के नेतृत्व वाली Awami League सरकार का अंत किया। इस राजनीतिक संक्रमण ने दक्षिण एशिया की सामरिक राजनीति में एक नई बहस को जन्म दिया है—विशेषकर भारत-बांग्लादेश संबंधों के संदर्भ में। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: सहयोग और तनाव के आयाम भारत और बांग्लादेश के संबंध 1971 के मुक्ति संग्राम से गहराई से जुड़े हैं। स्वतंत्रता के बाद प्रारंभिक वर्षों में संबंध सहयोगपूर्ण रहे, क...

India–France Strategic Partnership in a Multipolar World: How It Is Redefining India’s Global Power Status

बहुध्रुवीय विश्व में भारत–फ्रांस का उभार भारत की पुनर्परिभाषित वैश्विक रणनीतिक स्थिति (UPSC-उन्मुख विश्लेषणात्मक लेख) भूमिका: बदलती वैश्विक व्यवस्था और भारत की उभरती भूमिका 21वीं सदी का अंतरराष्ट्रीय तंत्र तीव्र गति से बहुध्रुवीयता की ओर बढ़ रहा है, जहाँ एकध्रुवीय वर्चस्व के स्थान पर बहुपक्षीय संतुलन, लचीली साझेदारियाँ और मुद्दा-आधारित सहयोग निर्णायक बनते जा रहे हैं। यूक्रेन संकट, ग़ाज़ा युद्ध, ताइवान जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव तथा वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं का पुनर्गठन इस तथ्य को रेखांकित करते हैं कि न तो कठोर सैन्य गठबंधन टिकाऊ हैं और न ही किसी एक शक्ति का दीर्घकालिक प्रभुत्व। इसी परिप्रेक्ष्य में भारत–फ्रांस संबंध केवल एक द्विपक्षीय साझेदारी नहीं रह गए हैं, बल्कि भारत की वैश्विक रणनीतिक पहचान को नया आयाम देने वाली धुरी के रूप में उभरे हैं। फरवरी 2026 में फ्रांसीसी राष्ट्रपति की मुंबई यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री के साथ हुए व्यापक समझौतों ने इस रिश्ते को “Special Global Strategic Partnership” के स्तर तक उन्नत किया। यह उन्नयन भारत की दीर्घकालिक रणनीतिक सोच का प्रतीक है—जहाँ राष...

National Interest Over Permanent Friends or Foes: India’s Shifting Strategic Compass

राष्ट्रीय हित ही सर्वोपरि: भारत की बदलती कूटनीतिक दिशा प्रस्तावना : : न मित्र स्थायी, न शत्रु अंतरराष्ट्रीय राजनीति का यथार्थवादी दृष्टिकोण बार-बार यह स्पष्ट करता है कि विश्व राजनीति में न कोई स्थायी मित्र होता है और न ही कोई स्थायी शत्रु। यदि कुछ स्थायी है, तो वह है प्रत्येक राष्ट्र का राष्ट्रीय हित (National Interest) । बदलती वैश्विक परिस्थितियों में यही राष्ट्रीय हित कूटनीतिक रुख, विदेश नीति के निर्णय और अंतरराष्ट्रीय समीकरणों को निर्धारित करता है। वर्तमान समय में भारत की विदेश नीति इसी सिद्धांत का मूर्त रूप प्रतीत हो रही है। जहाँ एक ओर भारत और अमेरिका के बीच कुछ असहजता और मतभेद देखने को मिल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भारत और चीन, सीमा विवाद और गहरी अविश्वास की खाई के बावजूद संवाद और संबंध सुधारने की दिशा में आगे बढ़ते नज़र आ रहे हैं। यह परिदृश्य एक बार फिर यह रेखांकित करता है कि भावनात्मक स्तर पर मित्रता या शत्रुता से परे जाकर, अंतरराष्ट्रीय राजनीति का आधार केवल और केवल हित-आधारित यथार्थवाद है। ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य भारत के विदेश नीति इतिहास में यह कथन अनेक बार सत्य सिद्ध हुआ ...

Bangladesh General Election 2026: Democratic Reset After the Gen-Z Revolution

बांग्लादेश के आम चुनाव 2026: राजनीतिक पुनर्जन्म और लोकतांत्रिक पुनर्संरचना की ऐतिहासिक घड़ी भूमिका: एक युग का अंत, एक नए अध्याय की शुरुआत 12 फरवरी 2026 को बांग्लादेश ने न केवल अपना 13वां संसदीय आम चुनाव संपन्न किया, बल्कि एक साथ हुए संवैधानिक जनमत संग्रह के माध्यम से अपने राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करने का प्रयास भी किया। यह चुनाव सामान्य सत्ता परिवर्तन भर नहीं था, बल्कि अगस्त 2024 की छात्र-नेतृत्व वाली ‘जुलाई क्रांति’ के बाद पहला राष्ट्रीय लोकतांत्रिक परीक्षण था, जिसने देश की सत्ता संरचना को जड़ से हिला दिया। लगभग डेढ़ दशक तक सत्ता में रहीं शेख हसीना के पतन, अवामी लीग की चुनावी अनुपस्थिति और व्यापक संस्थागत सुधारों की पृष्ठभूमि में यह चुनाव बांग्लादेश के इतिहास में एक राजनीतिक पुनर्जन्म के रूप में दर्ज किया जा रहा है। पृष्ठभूमि: ‘जुलाई क्रांति’ और सत्ता संरचना का ध्वंस 2009 से 2024 तक शेख हसीना का शासन राजनीतिक स्थिरता के साथ-साथ बढ़ते अधिनायकवादी रुझानों के लिए भी जाना गया। विपक्ष का दमन, चुनावों की विश्वसनीयता पर प्रश्न, न्यायपालिका और मीडिया पर दबाव तथा अल्पसंख्यकों—विशेषकर ह...

Israel’s West Bank Land Registration Revival: De Facto Annexation, Legal Impact and Geopolitical Consequences

इज़राइल की वेस्ट बैंक में भूमि पंजीकरण प्रक्रिया की बहाली: एक de facto विलय की दिशा में कदम परिचय 15 फरवरी 2026 को इज़राइल की कैबिनेट ने कब्जे वाले वेस्ट बैंक में भूमि पंजीकरण (land registration) की प्रक्रिया शुरू करने की मंजूरी दी, जो 1967 के बाद पहली बार हो रहा है। यह फैसला वेस्ट बैंक (जिसे इज़राइल में जूडिया और समरिया कहा जाता है) पर इज़राइल के नियंत्रण को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इज़राइली सरकार इसे प्रशासनिक सुधार और पारदर्शिता का मुद्दा बताती है, जबकि फिलिस्तीनी पक्ष, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन और कई देश इसे "de facto annexation" (वास्तविक विलय) की प्रक्रिया के रूप में देखते हैं। यह लेख इस फैसले के ऐतिहासिक, कानूनी, राजनीतिक और भू-राजनीतिक संदर्भों का अकादमिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वेस्ट बैंक पर 1967 के छह-दिवसीय युद्ध में इज़राइल ने कब्जा किया था, जब यह क्षेत्र जॉर्डन के नियंत्रण में था। 1948-1967 तक जॉर्डन ने यहां भूमि रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया चलाई थी, लेकिन केवल लगभग एक-तिहाई भूमि ही औपचारिक रूप से पंजी...