India–Seychelles Relations 2026: Strategic Partnership, $175 Million Aid, MoUs and Maritime Cooperation
भारत–सेशेल्स संबंधों में नई ऊर्जा: साझी समुद्री विरासत से रणनीतिक साझेदारी तक
हिंद महासागर की लहरों पर टिकी भारत और सेशेल्स की मित्रता ने 9 फरवरी 2026 को नई दिल्ली के ऐतिहासिक राष्ट्रपति भवन में एक नया आत्मविश्वास प्राप्त किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के सम्मान में आयोजित राजकीय भोज केवल एक औपचारिक कूटनीतिक आयोजन नहीं था, बल्कि यह दोनों देशों के बीच परस्पर विश्वास, साझा मूल्यों और भविष्य उन्मुख साझेदारी का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा।
यह अवसर इसलिए भी विशेष था क्योंकि राष्ट्रपति हर्मिनी की यह भारत की पहली राजकीय यात्रा थी, जो उनके राष्ट्रपति पद संभालने के बाद हुई, और साथ ही वर्ष 2026 दोनों देशों के लिए प्रतीकात्मक महत्व रखता है—सेशेल्स की स्वतंत्रता के 50 वर्ष और भारत–सेशेल्स राजनयिक संबंधों के भी 50 वर्ष पूरे होना।
साझा मूल्यों पर आधारित संबंध
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि भारत–सेशेल्स संबंध केवल रणनीतिक हितों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लोकतंत्र, बहुलवाद, कानून के शासन और परस्पर सम्मान जैसे साझा मूल्यों पर आधारित हैं। उन्होंने हिंद महासागर को दोनों देशों के बीच प्राकृतिक सेतु बताते हुए लोगों से लोगों के बीच संबंधों, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और ऐतिहासिक निकटता को रेखांकित किया।
सेशेल्स, आकार में भले ही छोटा द्वीपीय देश हो, किंतु हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) की सुरक्षा, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता में उसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत ने इस वास्तविकता को लंबे समय से स्वीकार किया है और इसी दृष्टि से सेशेल्स को अपनी MAHASAGAR Vision (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) का एक प्रमुख स्तंभ माना है।
MAHASAGAR विजन और समुद्री साझेदारी
MAHASAGAR विजन भारत की हिंद महासागर नीति का परिष्कृत स्वरूप है, जो तीन आधारों पर टिका है—
- व्यापार के माध्यम से विकास,
- सतत विकास हेतु क्षमता निर्माण,
- साझा सुरक्षा के लिए सहयोग।
सेशेल्स जैसे द्वीपीय राष्ट्र के लिए समुद्री सुरक्षा, ब्लू इकोनॉमी, आपदा प्रबंधन और जलवायु अनुकूलन जीवन रेखा के समान हैं। भारत ने स्पष्ट संदेश दिया कि वह केवल “नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर” नहीं, बल्कि “विश्वसनीय विकास साझेदार” के रूप में सेशेल्स के साथ खड़ा रहेगा।
175 मिलियन डॉलर का विशेष आर्थिक पैकेज: सहयोग को ठोस आधार
इस यात्रा का सबसे ठोस और व्यावहारिक परिणाम रहा 175 मिलियन डॉलर का विशेष आर्थिक पैकेज, जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक दिन पहले की थी। यह पैकेज भारत की “डिमांड-ड्रिवन डेवलपमेंट पार्टनरशिप” की सोच को दर्शाता है।
इसमें शामिल हैं—
- 125 मिलियन डॉलर की रुपये-आधारित लाइन ऑफ क्रेडिट,
- 50 मिलियन डॉलर की अनुदान सहायता।
यह वित्तीय सहयोग सेशेल्स के उन क्षेत्रों पर केंद्रित है जो सीधे आम जनता के जीवन को प्रभावित करते हैं—सोशल हाउसिंग, ई-मोबिलिटी, व्यावसायिक प्रशिक्षण, स्वास्थ्य सेवाएं, रक्षा और समुद्री सुरक्षा। यह पैकेज न केवल अवसंरचना निर्माण, बल्कि मानव संसाधन विकास और संस्थागत क्षमता को भी मजबूत करेगा।
समझौता ज्ञापनों के माध्यम से बहुआयामी सहयोग
राष्ट्रपति हर्मिनी की यात्रा के दौरान 7 महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर हुए, जो द्विपक्षीय संबंधों को नई गहराई प्रदान करते हैं। ये समझौते दर्शाते हैं कि सहयोग अब केवल रक्षा या सहायता तक सीमित नहीं, बल्कि ज्ञान, तकनीक और संस्कृति तक विस्तृत हो चुका है।
इनमें प्रमुख हैं—
- स्वास्थ्य क्षेत्र में फार्माकोपियल सहयोग,
- मौसम विज्ञान में तकनीकी एवं वैज्ञानिक सहयोग,
- सेशेल्स के सिविल सर्वेंट्स के लिए भारत में प्रशिक्षण,
- डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में साझेदारी,
- पारंपरिक चिकित्सा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान,
- समुद्री अनुसंधान और डेटा साझाकरण,
- जनसंख्या-स्तरीय डिजिटल समाधान और खाद्य सुरक्षा से जुड़े क्षेत्र।
भारत अपनी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) के अनुभव—जैसे आधार, यूपीआई और ई-गवर्नेंस—को साझा कर सेशेल्स के प्रशासनिक और सामाजिक तंत्र को अधिक सक्षम बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
SESEL विजन: भविष्य की रूपरेखा
9 फरवरी 2026 को हैदराबाद हाउस में हुई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति हर्मिनी की वार्ता के बाद अपनाया गया SESEL (Sustainability, Economic Growth and Security through Enhanced Linkages) संयुक्त विजन दस्तावेज आने वाले वर्षों की दिशा तय करता है। यह दस्तावेज बताता है कि भारत–सेशेल्स संबंध अब दीर्घकालिक रणनीतिक सोच के साथ आगे बढ़ रहे हैं, जहां सुरक्षा और विकास को अलग-अलग नहीं, बल्कि एक-दूसरे का पूरक माना गया है।
ग्लोबल साउथ और हिंद महासागर में भारत की भूमिका
यह दौरा भारत की ग्लोबल साउथ के प्रति प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है। भारत विकासशील देशों के साथ संबंधों को केवल शक्ति संतुलन या भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के चश्मे से नहीं देखता, बल्कि साझी चुनौतियों—जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल समावेशन—के समाधान के रूप में देखता है।
सेशेल्स के राष्ट्रपति हर्मिनी ने भी अगले पांच वर्षों के लिए सहयोग की साझा दृष्टि पर जोर देते हुए भारत को एक भरोसेमंद मित्र और भागीदार बताया।
निष्कर्ष
राष्ट्रपति भवन में आयोजित यह भोज प्रतीकात्मक जरूर था, लेकिन इसके पीछे ठोस रणनीतिक, आर्थिक और मानवीय आधार मौजूद हैं। 50 वर्षों की मित्रता अब एक ऐसे चरण में प्रवेश कर चुकी है, जहां विकास, सुरक्षा और सततता एक-दूसरे से जुड़कर आगे बढ़ रहे हैं।
भारत और सेशेल्स का यह ऐतिहासिक जुड़ाव न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और साझा समृद्धि के लिए भी एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करेगा।
Comments
Post a Comment