वेनेजुएला संकट में कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज का अमेरिका के प्रति नरम रुख: भू-राजनीति और अंतरराष्ट्रीय कानून का विश्लेषण
भूमिका
लैटिन अमेरिका की राजनीति एक बार फिर वैश्विक बहस के केंद्र में है। 3 जनवरी 2026 को संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा संचालित सैन्य अभियान के परिणामस्वरूप वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मदुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार किए जाने के बाद देश गहरे राजनीतिक संकट में प्रवेश कर गया। इसी परिस्थिति में 5 जनवरी 2026 को कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज का वह बयान सामने आता है, जिसमें वे अमेरिका के साथ “साझा विकास” (Shared Development) आधारित सहयोग की बात करती हैं। यह रुख न केवल उनके पिछले तीखे आरोपों से भिन्न है, बल्कि वेनेजुएला की आंतरिक राजनीति और अंतरराष्ट्रीय शक्तिसंतुलन में संभावित बदलाव का संकेत भी देता है।
रोड्रिगेज ने कहा कि वे अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में रहकर शांति-आधारित सहयोग के एजेंडे पर साथ आने के लिए आमंत्रित करती हैं, क्योंकि “हमारे लोग युद्ध नहीं, बल्कि संवाद और स्थायी सह-अस्तित्व के हकदार हैं।” यह बयान उस पृष्ठभूमि में और महत्वपूर्ण हो जाता है, जब कुछ दिन पहले ही उन्होंने अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप को “अवैध कब्जा” और “सार्वभौमिकता का उल्लंघन” बताया था।
संकट की पृष्ठभूमि: ऑपरेशन ‘एब्सोल्यूट रिजॉल्व’
अमेरिकी कार्रवाई एक सुसंगठित, बहुआयामी सैन्य-कानूनी अभियान के रूप में सामने आई।
काराकास स्थित राष्ट्रपति आवास पर विशेष बलों के छापे, व्यापक हवाई हमलों से वायु-रक्षा तंत्र को निष्क्रिय करना, और तत्पश्चात मदुरो दंपति को अमेरिकी समुद्री पोत के माध्यम से हिरासत में ले जाकर न्यूयॉर्क के डिटेंशन सेंटर में स्थानांतरित करना — यह सब दर्शाता है कि यह अभियान लंबे समय से रणनीतिक रूप से तैयार किया गया था।
अमेरिका ने इस कार्रवाई को पारंपरिक सैन्य हस्तक्षेप के बजाय “कानून प्रवर्तन” करार दिया और उन्हें 2020 के विस्तारित नार्को-टेररिज्म और ड्रग-ट्रैफिकिंग अभियोगों से जोड़ा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ संकेत दिए कि वेनेजुएला में “संक्रमणकालीन व्यवस्था” तब तक अमेरिकी निगरानी में रहेगी, जब तक वहां “स्थिर शासन-व्यवस्था” स्थापित नहीं हो जाती — साथ ही तेल उद्योग को अमेरिकी कंपनियों के लिए खोलने की इच्छा भी स्पष्ट की।
रोड्रिगेज का नरम रुख: रणनीति, दबाव या अवसरवाद?
डेल्सी रोड्रिगेज की राजनीतिक यात्रा उन्हें “चाविज़-मदुरो परंपरा” की वफादार नेता के रूप में स्थापित करती है। उपराष्ट्रपति, विदेश मंत्री और तेल मंत्री के रूप में वे सत्ता-ढांचे का अभिन्न हिस्सा रही हैं। बावजूद इसके, उनका ताजा बयान एक व्यावहारिक, संतुलित और ‘सिस्टम-सेफ’ दृष्टिकोण का संकेत देता है।
इस बदलाव के पीछे कई कारक दिखाई देते हैं—
-
सत्ता-संरक्षण की अनिवार्यता
अमेरिकी सैन्य दबाव, आर्थिक प्रतिबंधों और संभावित ‘दूसरी कार्रवाई’ के संकेतों ने सत्ता-ढांचे को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया है। सहयोग की भाषा उनके लिए ‘राजनीतिक शील्ड’ बन सकती है। -
तेल-अर्थव्यवस्था का संकट और अवसर
प्रतिबंधों से क्षतिग्रस्त तेल क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए विदेशी निवेश अनिवार्य है। अमेरिकी कंपनियों की वापसी आर्थिक राहत और आंशिक स्थिरता दे सकती है — भले ही इसकी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़े। -
आंतरिक शक्ति-संतुलन का दबाव
सेना और चाविज़वादी कैडर अभी भी मदुरो समर्थक ध्रुव में हैं। रोड्रिगेज का नरम रुख सत्ता-संस्थाओं और अमेरिकी दबाव के बीच एक ‘सेफ एग्जिट-पाथ’ तैयार करने जैसा है। -
राजनीतिक नैरेटिव को नियंत्रित करने का प्रयास
शांति-संवाद की अपील अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संदेश देती है कि वे संघर्ष नहीं, बल्कि कूटनीतिक समाधान चाहती हैं — इससे वे ‘जिम्मेदार नेतृत्व’ की छवि गढ़ती हैं।
अंतरराष्ट्रीय कानून का प्रश्न
अमेरिकी कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) के सीधे उल्लंघन का मामला प्रस्तुत करती है, जो किसी भी संप्रभु राज्य के खिलाफ बल प्रयोग पर रोक लगाता है। आत्मरक्षा (Article 51) या सुरक्षा परिषद की स्वीकृति के अभाव में यह हस्तक्षेप अंतरराष्ट्रीय कानून के दृष्टिकोण से विवादास्पद और “अंतरराज्यीय अपहरण” जैसा प्रतीत होता है।
विश्व समुदाय की प्रतिक्रियाएँ भी विभाजित हैं —
कुछ देशों ने इसे खतरनाक मिसाल बताया, तो कुछ ने इसे “लॉ-एंड-ऑर्डर मॉडल” के रूप में वैधता देने की कोशिश की। यह विभाजन स्वयं अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की नाजुकता को उजागर करता है।
भू-राजनीतिक समीकरण और तेल-राजनीति
वेनेजुएला केवल एक राजनीतिक संकट का क्षेत्र नहीं — बल्कि ऊर्जा-भूगोल का केन्द्रीय नोड है।
दुनिया के सबसे बड़े सिद्ध तेल भंडार, अमेरिकी प्रतिबंधों और रूसी-चीनी आर्थिक उपस्थिति के बीच खड़ा यह देश अब एक त्रिकोणी शक्ति-प्रतिस्पर्धा का अखाड़ा बनता जा रहा है।
यदि अमेरिकी प्रभाव बढ़ा—
- वैश्विक तेल आपूर्ति में वृद्धि संभव
- कीमतों में गिरावट से आयातक देशों को लाभ
- लेकिन क्षेत्रीय अस्थिरता और शक्ति-संतुलन का संकट गहरा सकता है
इस प्रकार, यह संघर्ष केवल “ड्रग्स” या “लोकतंत्र” का प्रश्न नहीं — बल्कि ऊर्जा, भू-रणनीति और वर्चस्व के त्रि-आयामी खेल का हिस्सा है।
निष्कर्ष: समर्पण या रणनीतिक धैर्य?
डेल्सी रोड्रिगेज का नरम रुख सतही तौर पर अमेरिकी दबाव के आगे झुकाव प्रतीत हो सकता है, किंतु उससे अधिक यह रणनीतिक धैर्य, सत्ता-संतुलन और राजनीतिक बचाव-कला का मिश्रित संकेत है।
वेनेजुएला इस समय एक चौराहे पर खड़ा है —
एक ओर संभावित संक्रमणकालीन व्यवस्था और आर्थिक पुनरुत्थान की संभावना,
दूसरी ओर गृह-संघर्ष, बाहरी नियंत्रण और दीर्घकालिक अस्थिरता का खतरा।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष प्रश्न स्पष्ट है —
क्या नियम-आधारित व्यवस्था को बचाया जाएगा,
या फिर एकतरफा हस्तक्षेपवाद की नई परंपरा को मौन स्वीकृति मिल जाएगी?
जो भी दिशा उभरे — यह घटना 21वीं सदी की भू-राजनीति में शक्ति-राजनीति और अंतरराष्ट्रीय कानून के अंतर्विरोधों का सबसे तीखा उदाहरण बनकर दर्ज रहेगी।
With Reuters Inputs
Comments
Post a Comment