Skip to main content

MENU👈

Show more

Rising Attacks on Hindu Minorities in Bangladesh: Global Silence and Human Rights Concerns

The Silent Genocide: Persecution of Hindus in Bangladesh and the Moral Failure of the Global Community In an age where conflicts in Gaza, Ukraine, and other flashpoints command the world’s attention, a quieter yet deeply disturbing humanitarian crisis continues to unfold next door to India — in Bangladesh. Since the political upheaval and resignation of Prime Minister Sheikh Hasina in August 2024, reports of violence against the Hindu minority have escalated dramatically. Killings, arson attacks, vandalism of temples, forced displacement, economic boycotts, and intimidation have become frighteningly frequent. According to figures cited by Indian authorities, more than 2,200 incidents of violence against Hindus were recorded in 2024 alone , with similar patterns continuing through 2025 and into 2026. Independent reports corroborate these trends: homes torched, idols desecrated, businesses looted, and families compelled to flee ancestral lands. Yet, despite the mounting evidence, the w...

India's AI Revolution 2025: Opportunities, Job Displacement, and Inclusive Growth Challenges

भारत की AI क्रांति: समृद्धि का द्वार या रोजगार का संकट?

परिचय

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) भारत के लिए एक नया सवेरा ला रही है। चैटबॉट्स से लेकर स्वचालित डेटा विश्लेषण तक, AI तकनीक भारत को वैश्विक नवाचार का केंद्र बनाने की क्षमता रखती है। लेकिन क्या यह तकनीकी उछाल लाखों भारतीयों के लिए रोजगार संकट भी लाएगा? यह लेख AI के आर्थिक अवसरों, नौकरी विस्थापन के जोखिमों और समावेशी विकास की चुनौतियों का विश्लेषण करता है, साथ ही भविष्य के लिए व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करता है।

1. AI: भारत के आर्थिक भविष्य का इंजन

भारत की अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र का योगदान 54% (2024-25 आर्थिक सर्वेक्षण) है, और AI इस क्षेत्र को नया आयाम दे रहा है। बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे तकनीकी केंद्रों में चैटबॉट्स और AI-संचालित उपकरण BPO उद्योग को लागत-प्रभावी और 24×7 कार्यक्षम बनाते हैं। उदाहरण के लिए, एक AI चैटबॉट प्रति घंटे हजारों ग्राहक क्वेरीज़ को हिंदी, तमिल, या अंग्रेजी में संभाल सकता है, जो मानव कर्मचारियों की तुलना में 40% सस्ता है (NASSCOM 2024 रिपोर्ट)। McKinsey का अनुमान है कि AI 2030 तक भारत के GDP में $957 बिलियन जोड़ सकता है। यह भारत को वैश्विक AI हब बनने का सुनहरा अवसर देता है।

2. नौकरी विस्थापन: एक आसन्न सूनामी?

लेकिन हर चमकते सिक्के का दूसरा पहलू होता है। भारत में 47% कार्यबल मध्यम-कौशल नौकरियों में है (ILO 2023), जैसे कॉल सेंटर, डेटा एंट्री, और लॉजिस्टिक्स, जो AI स्वचालन के लिए सबसे असुरक्षित हैं। उदाहरण के लिए, एक प्रमुख भारतीय BPO कंपनी ने 2024 में AI टूल्स अपनाने के बाद 15% कर्मचारियों की छंटनी की। विशेष रूप से महिलाएँ, जो कॉल सेंटरों में 60% कार्यबल हैं, इस विस्थापन से सबसे अधिक प्रभावित हो सकती हैं। इसके अलावा, AI से उच्च-कौशल नौकरियाँ (जैसे डेटा साइंटिस्ट) बढ़ेंगी, जो पुरुष-प्रधान हैं, जिससे लैंगिक असमानता बढ़ सकती है। मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी गंभीर है – "नौकरी छिनने का डर" कर्मचारियों में तनाव और असुरक्षा पैदा कर रहा है।

3. समावेशी विकास: एक जटिल चुनौती

AI का लाभ सभी तक पहुँचाने के लिए भारत को नीतिगत और सामाजिक बाधाओं को पार करना होगा। NITI Aayog की 2018 AI रणनीति ने स्किलिंग और डेटा गवर्नेंस पर जोर दिया, लेकिन 2025 तक इसके कार्यान्वयन में कमी दिखती है। डिजिटल डिवाइड एक बड़ी बाधा है – ग्रामीण भारत में केवल 34% आबादी के पास इंटरनेट पहुँच है (TRAI 2024)। डेटा गोपनीयता भी चिंता का विषय है; DPDP Act 2023 लागू होने के बावजूद, AI सिस्टम्स में डेटा दुरुपयोग के मामले सामने आए हैं। यदि समावेशी नीतियाँ न बनीं, तो AI अमीर-गरीब और शहरी-ग्रामीण के बीच खाई को और चौड़ा कर सकता है।

4. नैतिक प्रश्न: क्या मशीनें मानवता की जगह लेंगी?

AI की तकनीकी दक्षता निर्विवाद है, लेकिन इसकी संवेदना-रहित प्रकृति चिंता पैदा करती है। एक चैटबॉट ग्राहक की भावनाओं को समझ नहीं सकता, जिससे "मानव-संबंधों का यांत्रिकरण" हो सकता है। इसके अलावा, AI में अंतर्निहित पूर्वाग्रह (जैसे लिंग या क्षेत्रीय भेदभाव) भारत जैसे विविध समाज में सामाजिक तनाव बढ़ा सकते हैं। सवाल यह है: क्या तकनीकी प्रगति को मानवीय गरिमा से ऊपर रखा जा सकता है?

5. भविष्य का रास्ता: नीतिगत और सामाजिक समाधान

AI को भारत के लिए वरदान बनाने के लिए तत्काल कदम जरूरी हैं:

  • AI Displacement Fund: सरकार एक विशेष फंड बनाए, जो विस्थापित कर्मचारियों को पुनः प्रशिक्षण और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करे।
  • स्किलिंग क्रांति: NEP 2020 के तहत AI और डेटा साइंस को स्कूल पाठ्यक्रम में शामिल करें। पब्लिक-प्राइवेट भागीदारी से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशिक्षण केंद्र खोले जाएँ।
  • नैतिक AI फ्रेमवर्क: AI सिस्टम्स में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए कड़े नियम बनाए जाएँ।
  • ग्रामीण डिजिटल समावेशन: भारत नेट परियोजना को तेज करें ताकि ग्रामीण युवा AI अर्थव्यवस्था में भाग ले सकें।

निष्कर्ष

भारत की AI क्रांति एक दोधारी तलवार है – यह समृद्धि का द्वार खोल सकती है, लेकिन गलत प्रबंधन से सामाजिक-आर्थिक संकट पैदा हो सकता है। यदि भारत नीतिगत दूरदर्शिता, समावेशी दृष्टिकोण और नैतिकता को अपनाए, तो AI न केवल आर्थिक विकास का इंजन बनेगा, बल्कि हर भारतीय के लिए अवसरों का स्रोत भी। जैसा कि लेखकार का मानना है: "तकनीक का मूल्य इस बात में है कि वह मानवता के लिए क्या करती है।" आइए, AI को भारत की एकता और प्रगति का प्रतीक बनाएँ।

🧭 संभावित UPSC मुख्य परीक्षा प्रश्न

GS Paper 3 (विज्ञान, तकनीक, और अर्थव्यवस्था से संबंधित):

  1. भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के प्रसार से उत्पन्न आर्थिक अवसरों और रोजगार संबंधी चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
  2. "AI भारत की अर्थव्यवस्था का इंजन बन सकती है, बशर्ते नीति और नैतिकता साथ हों" — टिप्पणी कीजिए।
  3. भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित स्वचालन (Automation) से मध्य-कौशल रोजगारों पर पड़ने वाले प्रभावों की विवेचना कीजिए।
  4. कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में समावेशी विकास सुनिश्चित करने हेतु भारत को किन नीतिगत सुधारों की आवश्यकता है?
  5. "AI क्रांति भारत के लिए अवसर भी है और संकट भी" — इस कथन के आलोक में भारत की डिजिटल नीति का मूल्यांकन कीजिए।

GS Paper 2 (शासन, नीति, और नैतिकता से संबंधित):

  1. भारत में AI आधारित निर्णय-निर्माण से जुड़े नैतिक और गोपनीयता संबंधी मुद्दों पर चर्चा कीजिए।
  2. DPDP Act, 2023 के संदर्भ में AI शासन (AI Governance) की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
  3. "तकनीकी प्रगति का मूल्य मानवता के संरक्षण में है" — इस कथन की समकालीन संदर्भ में समीक्षा कीजिए।

GS Paper 4 (नैतिकता और मानव मूल्य):

  1. क्या कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव संवेदना और नैतिक विवेक का विकल्प बन सकती है? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
  2. AI युग में ‘मानवीय गरिमा’ और ‘नौकरी सुरक्षा’ के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जा सकता है?

🖋️ संभावित निबंध विषय

  1. “कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मानवता: विकास या विस्थापन की दिशा?”
  2. “तकनीकी क्रांति और सामाजिक न्याय: भारत की नई चुनौती”
  3. “AI और रोजगार: 21वीं सदी का नया औद्योगिक परिवर्तन”
  4. “Ethics in Artificial Intelligence: Balancing Innovation with Humanity”

🔍 संभावित प्रीलिम्स तथ्यात्मक प्रश्न

  1. NASSCOM 2024 रिपोर्ट के अनुसार, भारत के सेवा क्षेत्र में AI आधारित कार्यों की औसत लागत मानव श्रम की तुलना में लगभग कितनी सस्ती है?

    • (a) 20%
    • (b) 40%
    • (c) 50%
    • (d) 60%
      उत्तर: (b) 40%
  2. McKinsey के अनुसार, 2030 तक AI भारत के GDP में लगभग कितने अरब डॉलर जोड़ सकता है?

    • (a) $500 अरब
    • (b) $750 अरब
    • (c) $957 अरब
    • (d) $1 ट्रिलियन
      उत्तर: (c) $957 अरब
  3. भारत में इंटरनेट पहुँच (TRAI 2024 के अनुसार) लगभग कितनी ग्रामीण आबादी तक सीमित है?

    • (a) 24%
    • (b) 34%
    • (c) 45%
    • (d) 55%
      उत्तर: (b) 34%

📚 संदर्भ / श्रोत (Sources & References):

  1. भारत का आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 – सेवा क्षेत्र के GDP योगदान (54%) संबंधी आँकड़े।
    🔗 [Economic Survey 2024-25, Government of India – Ministry of Finance]

  2. NASSCOM Report 2024: “AI Adoption in Indian IT-BPM Sector” – AI आधारित लागत प्रभाव और रोजगार प्रभाव के आँकड़े।
    🔗 [NASSCOM, 2024 Annual Tech Industry Report]

  3. McKinsey Global Institute (2023): “The Future of AI in India” – भारत के GDP में $957 बिलियन तक योगदान का अनुमान।
    🔗 [McKinsey Global Institute Report, 2023]

  4. International Labour Organization (ILO) Report 2023 – भारत के कार्यबल का 47% मध्यम-कौशल नौकरियों में होने का अनुमान।
    🔗 [ILO Employment Outlook: India 2023]

  5. TRAI (Telecom Regulatory Authority of India) Report, 2024 – ग्रामीण भारत में 34% इंटरनेट पहुँच के आँकड़े।
    🔗 [TRAI, “The Indian Telecom Services Performance Indicators”, 2024]

  6. Digital Personal Data Protection Act, 2023 (DPDP Act) – डेटा गोपनीयता और AI शासन से संबंधित कानूनी ढाँचा।
    🔗 [Ministry of Electronics & IT, Government of India]

  7. NITI Aayog (2018): “National Strategy for Artificial Intelligence #AIforAll” – भारत की पहली राष्ट्रीय AI रणनीति और स्किलिंग सिफारिशें।
    🔗 [NITI Aayog Policy Paper, 2018]

  8. World Economic Forum (2024): “AI and the Future of Jobs in Asia” – भारत में AI और रोजगार प्रवृत्तियों पर तुलनात्मक डेटा।
    🔗 [WEF Report, 2024]

  9. Press Information Bureau (PIB) Releases (2024–25) – भारत नेट परियोजना और डिजिटल समावेशन से संबंधित अद्यतन जानकारी।
    🔗 [pib.gov.in]




Comments

Advertisement

POPULAR POSTS

Islamic NATO in the Making? Turkey, Saudi Arabia and Pakistan’s Emerging Defense Axis

“इस्लामिक नाटो” की परिकल्पना: तुर्की के हथियार, सऊदी धन और पाकिस्तान की परमाणु क्षमता — एक उभरते रक्षा गठजोड़ का विश्लेषण प्रस्तावना अंतरराष्ट्रीय राजनीति में गठबंधन स्थिर नहीं होते; वे समय, खतरे और हितों के अनुसार बदलते रहते हैं। हाल के वर्षों में मध्य एशिया, पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक परिवेश में तेज़ी से परिवर्तन हुआ है। इसी संदर्भ में तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच संभावित रक्षा-सहयोग को कुछ विश्लेषक “इस्लामिक नाटो” जैसी संज्ञा देने लगे हैं। यद्यपि यह कोई औपचारिक सैन्य संगठन नहीं है, फिर भी तीनों देशों के पूरक सामर्थ्य — तुर्की की रक्षा-तकनीक, सऊदी अरब की आर्थिक शक्ति और पाकिस्तान की परमाणु क्षमता — एक नए रणनीतिक त्रिकोण की संभावना को जन्म देते हैं। यह लेख इस संभावित रक्षा गठजोड़ की पृष्ठभूमि, इसके कारक, संभावित स्वरूप और वैश्विक राजनीति पर इसके प्रभावों का अकादमिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। 1. भू-राजनीतिक पृष्ठभूमि शीत युद्ध के बाद की दुनिया में शक्ति संतुलन पश्चिमी देशों से धीरे-धीरे बहुध्रुवीय संरचना की ओर बढ़ा है। अमेरिका और यूरोप की प्रभुत्ववादी भूम...

Trump’s Greenland Ambition and Europe Tariff Crisis: A New Geopolitical Flashpoint in 2026

ट्रंप की ग्रीनलैंड नीति और यूरोप पर टैरिफ का संकट: 21वीं सदी की नई भू-राजनीतिक परीक्षा 18 जनवरी 2026 को एक बार फिर वैश्विक राजनीति उस मोड़ पर खड़ी दिखाई दी, जहाँ शक्ति, संप्रभुता और आर्थिक दबाव आमने-सामने आ गए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को खरीदने या किसी रूप में अमेरिकी नियंत्रण में लाने की अपनी पुरानी इच्छा को आक्रामक ढंग से दोहराया। 2019 में यह विचार दुनिया को अजीब लगा था, लेकिन 2025 में सत्ता में वापसी के बाद ट्रंप ने इसे रणनीतिक एजेंडे में बदल दिया। अब यह केवल एक असामान्य प्रस्ताव नहीं, बल्कि एक गंभीर अंतरराष्ट्रीय संकट का रूप ले चुका है। ग्रीनलैंड, जो डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है, भौगोलिक रूप से आर्कटिक क्षेत्र के केंद्र में स्थित है। बर्फ से ढकी यह भूमि देखने में शांत लगती है, लेकिन इसके नीचे खनिज संसाधनों, दुर्लभ पृथ्वी तत्वों और भविष्य के समुद्री मार्गों की अपार संभावनाएँ छिपी हैं। इसके साथ ही, यह अमेरिका, रूस और यूरोप के बीच रणनीतिक संतुलन का एक महत्वपूर्ण बिंदु बन चुका है। ट्रंप का तर्क है कि ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य है, ...

Trump’s Gaza “Board of Peace”: Power, Peacebuilding and the Future of Post-War Reconstruction

ट्रंप द्वारा गाजा के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की घोषणा: शक्ति, शांति और पुनर्निर्माण के बीच एक जटिल प्रयोग प्रस्तावना 17 जनवरी 2026 को व्हाइट हाउस से की गई एक घोषणा ने मध्य पूर्व की राजनीति में नई बहस छेड़ दी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा संघर्ष समाप्ति योजना के दूसरे चरण के अंतर्गत एक नई संस्था— ‘बोर्ड ऑफ पीस’ —के संस्थापक कार्यकारी सदस्यों की घोषणा की। इस बोर्ड का घोषित उद्देश्य गाजा में युद्ध के बाद के पुनर्निर्माण, स्थिरीकरण, प्रशासनिक क्षमता निर्माण और दीर्घकालिक विकास की निगरानी करना है। स्वयं ट्रंप इस बोर्ड के अध्यक्ष हैं। यह पहल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 (2025) से जुड़ी बताई गई है, जिसने ट्रंप की 20-सूत्रीय शांति योजना को सैद्धांतिक समर्थन दिया था। यह घोषणा केवल एक प्रशासनिक कदम नहीं है, बल्कि यह अमेरिका की मध्य पूर्व नीति, वैश्विक शासन संरचना और “शांति-निर्माण” की अवधारणा को लेकर कई बुनियादी प्रश्न खड़े करती है। पृष्ठभूमि: युद्ध से युद्धविराम तक अक्टूबर 2025 में हुए नाजुक युद्धविराम से पहले गाजा लगभग दो वर्षों तक भीषण युद्ध की चपेट में रहा। इस दौरा...

Trump’s Gaza Peace Board and India’s Role: Strategic, Political and Ethical Analysis

ट्रंप की ‘गाजा शांति बोर्ड’ में भारत की संभावित भागीदारी: एक संतुलित विश्लेषण भूमिका इजरायल–हमास युद्ध के बाद गाजा पट्टी के भविष्य को लेकर वैश्विक स्तर पर कई योजनाएँ सामने आई हैं। इन्हीं में से एक है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस फॉर गाजा’ । इसका उद्देश्य गाजा में युद्धोत्तर शासन, सुरक्षा व्यवस्था और पुनर्निर्माण को एक अंतरराष्ट्रीय ढाँचे के तहत संचालित करना है। इस बोर्ड में भारत को औपचारिक रूप से आमंत्रित किया गया है। यह निमंत्रण केवल एक कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका की स्वीकृति भी है। लेकिन प्रश्न यह है कि क्या भारत को इस पहल का हिस्सा बनना चाहिए? और यदि हाँ, तो किस स्तर तक? यह लेख इसी प्रश्न का ऐतिहासिक, रणनीतिक और नैतिक दृष्टिकोण से विश्लेषण करता है और अंत में एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करता है। पृष्ठभूमि: गाजा और ट्रंप की शांति योजना गाजा लंबे समय से इजरायल–फिलिस्तीन संघर्ष का केंद्र रहा है। हमास के नियंत्रण, इजरायली सैन्य कार्रवाइयों और मानवीय संकट ने इस क्षेत्र को वैश्विक चिंता का विषय बना दिया है। ट्रंप ...

Why India Needs a Shadow Cabinet: Strengthening the Role of Opposition in a Modern Democracy

वर्तमान में भारत में विपक्ष की आवाज़ को सशक्त बनाने हेतु छाया मंत्रिमंडल की आवश्यकता एक समग्र अकादमिक विश्लेषण परिचय लोकतंत्र की आत्मा सत्ता और विपक्ष के बीच संतुलन में निहित होती है। जहां सत्तारूढ़ दल शासन, नीति-निर्माण और प्रशासन का दायित्व निभाता है, वहीं विपक्ष का कार्य केवल विरोध करना नहीं, बल्कि सरकार की नीतियों की समीक्षा, आलोचना और वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करना होता है। एक स्वस्थ लोकतंत्र में विपक्ष ‘नकारात्मक शक्ति’ नहीं, बल्कि रचनात्मक नियंत्रक (Constructive Watchdog) की भूमिका निभाता है। भारत, जो स्वयं को विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र घोषित करता है, आज एक ऐसे राजनीतिक चरण से गुजर रहा है जहाँ विपक्ष की भूमिका कमजोर, बिखरी हुई और प्रतिक्रियात्मक दिखाई देती है। संसद के भीतर विमर्श का स्तर गिरा है और नीति-आलोचना प्रायः नारेबाज़ी या वॉकआउट तक सीमित रह जाती है। ऐसे परिदृश्य में छाया मंत्रिमंडल (Shadow Cabinet) की अवधारणा भारतीय लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज़ को संस्थागत, संगठित और प्रभावी बनाने का एक महत्वपूर्ण साधन बन सकती है। यह लेख भारत में छाया मंत्रिमंडल की आवश्यकता, उसके संभा...

Gig Workers in India: Pain, Challenges and 10-Minute Delivery Crisis in Quick Commerce Sector

भारत में गिग वर्कर्स की पीड़ा: क्विक कॉमर्स और 10 मिनट डिलीवरी संकट का विश्लेषण डिजिटल क्रांति ने जिस सबसे बड़े सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन को जन्म दिया है, उसका एक प्रमुख रूप है—गिग इकोनॉमी। ऐप-आधारित प्लेटफॉर्म्स ने काम को “ऑन-डिमांड” बना दिया है, जहाँ नौकरी स्थायी नहीं, बल्कि अस्थायी कार्यों की शृंखला है। उबर, ब्लिंकिट, ज़ेप्टो, स्विगी इंस्टामार्ट और ज़ोमैटो जैसे प्लेटफॉर्म्स इस मॉडल के प्रतीक हैं। पहली नज़र में यह व्यवस्था युवाओं को लचीलापन, तुरंत कमाई और तकनीक से जुड़ने का अवसर देती है, लेकिन इसी चमकदार परत के नीचे गिग वर्कर्स की पीड़ा, असुरक्षा और संघर्ष की एक लंबी कहानी छिपी है। भारत में यह समस्या विशेष रूप से क्विक कॉमर्स सेक्टर में दिखाई देती है, जहाँ “10 मिनट में डिलीवरी” जैसे वादों ने उपभोक्ताओं को तो सुविधा दी, लेकिन डिलीवरी पार्टनर्स के जीवन को जोखिम में डाल दिया। यह केवल तेज डिलीवरी का सवाल नहीं है, बल्कि यह उस आर्थिक मॉडल का सवाल है जो मुनाफे को श्रमिकों की सुरक्षा से ऊपर रखता है। गिग इकोनॉमी: अवसर और विरोधाभास गिग इकोनॉमी का मूल आकर्षण है—लचीलापन। कोई भी व्यक्ति अपनी सु...

Trump’s “Board of Peace”: From Gaza Plan to Global Conflict Resolution

ट्रंप का ‘बोर्ड ऑफ पीस’: गाजा से वैश्विक संघर्ष समाधान तक एक नया प्रयोग प्रस्तावना इक्कीसवीं सदी के तीसरे दशक में वैश्विक राजनीति एक बार फिर संक्रमण के दौर से गुजर रही है। बहुपक्षीय संस्थाएं—विशेषकर संयुक्त राष्ट्र—लगातार यह आरोप झेल रही हैं कि वे तेज़ी से बदलते संघर्षों के समाधान में प्रभावी नहीं रह गई हैं। इसी पृष्ठभूमि में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2025 में गाजा संकट के समाधान के लिए एक 20-सूत्रीय योजना पेश की और उसके दूसरे चरण में एक नई संस्था— ‘बोर्ड ऑफ पीस’ —की स्थापना की। जो पहल गाजा तक सीमित मानी जा रही थी, वह जनवरी 2026 में अचानक वैश्विक संघर्ष समाधान के मंच में बदलने लगी। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, बहुपक्षीयता और अमेरिका की भूमिका पर नए प्रश्न खड़े हो गए हैं। गाजा संकट और ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की उत्पत्ति 2024–25 में इजरायल-हमास संघर्ष ने गाजा को मानवीय त्रासदी के केंद्र में ला खड़ा किया। लगातार युद्ध, विस्थापन, भुखमरी और बुनियादी ढांचे का विनाश अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए चुनौती बन गया। इसी संदर्भ में सितंबर 2025 में ट्रंप ने ‘कॉम्प्रिहेंसिव प्लान टू एंड द गाजा क...

Trump, Greenland and Nobel Grievance: How Personal Ego Is Reshaping Global Diplomacy

ट्रंप की ग्रीनलैंड नीति और नोबेल शांति पुरस्कार की शिकायत अंतरराष्ट्रीय संबंधों में व्यक्तिगत आक्रोश का एक नया उदाहरण भूमिका विदेश नीति सामान्यतः राष्ट्रीय हित, सामरिक गणनाओं और दीर्घकालिक रणनीतियों से संचालित होती है। लेकिन जब किसी राष्ट्राध्यक्ष की निजी महत्वाकांक्षाएँ, असंतोष और भावनात्मक प्रतिक्रियाएँ इन निर्णयों को प्रभावित करने लगें, तब कूटनीति का स्वरूप ही बदल जाता है। जनवरी 2026 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गाहर स्टोरे को भेजा गया एक संदेश इसी प्रवृत्ति का प्रतीक बन गया। इसमें ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की अमेरिकी मांग को सीधे-सीधे नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने की अपनी व्यक्तिगत शिकायत से जोड़ दिया। यह घटना न केवल एक कूटनीतिक असहजता का उदाहरण है, बल्कि यह भी दिखाती है कि व्यक्तिगत आक्रोश किस तरह अंतरराष्ट्रीय संबंधों को अस्थिर कर सकता है। घटना का परिप्रेक्ष्य ग्रीनलैंड लंबे समय से सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता रहा है। आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियाँ, खनिज संसाधनों की संभावना और सैन्य दृष्टि से इसकी उपयोगित...

India's Israel-Palestine Policy: From Traditional Palestinian Support to Strategic Balance with Israel (2026 Update)

भारत की इज़राइल-फिलिस्तीन विदेश नीति: नेहरू से मोदी तक इज़राइल–फिलिस्तीन विवाद बीसवीं सदी के सबसे जटिल और दीर्घकालिक भू-राजनीतिक संघर्षों में से एक है, जो 1947-48 के विभाजन और इज़राइल की स्थापना से लेकर आज के गाजा संकट तक फैला हुआ है। यह मुद्दा न केवल मध्य पूर्व की राजनीति को आकार देता है, बल्कि वैश्विक दक्षिण-उत्तरी संबद्धताओं, धार्मिक पहचान राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार विमर्श का केंद्र बिंदु भी रहा है। भारत का रुख इस संदर्भ में विशेष रूप से अध्ययन-योग्य है, क्योंकि यह पारंपरिक रूप से फिलिस्तीनी आत्मनिर्णय के समर्थक के रूप में जाना जाता है, जबकि हाल के दशकों में इज़राइल के साथ रणनीतिक साझेदारी भी गहराती जा रही है। यह द्वंद्व भारत की विदेश नीति की बहुआयामी प्रकृति को उजागर करता है, जिसमें ऐतिहासिक विरासत, वैचारिक आधार, भू-रणनीतिक हित, आर्थिक कारक और घरेलू राजनीतिक संवेदनशीलताएं शामिल हैं। इस विश्लेषण में हम इन आयामों का संतुलित परीक्षण करेंगे, विशेष रूप से 2023 के बाद की घटनाओं के प्रकाश में, जो दर्शाती हैं कि भारत किस प्रकार वैश्विक दबावों के बीच संतुलन साध रहा है। भारत की विदे...