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Rising Attacks on Hindu Minorities in Bangladesh: Global Silence and Human Rights Concerns

The Silent Genocide: Persecution of Hindus in Bangladesh and the Moral Failure of the Global Community In an age where conflicts in Gaza, Ukraine, and other flashpoints command the world’s attention, a quieter yet deeply disturbing humanitarian crisis continues to unfold next door to India — in Bangladesh. Since the political upheaval and resignation of Prime Minister Sheikh Hasina in August 2024, reports of violence against the Hindu minority have escalated dramatically. Killings, arson attacks, vandalism of temples, forced displacement, economic boycotts, and intimidation have become frighteningly frequent. According to figures cited by Indian authorities, more than 2,200 incidents of violence against Hindus were recorded in 2024 alone , with similar patterns continuing through 2025 and into 2026. Independent reports corroborate these trends: homes torched, idols desecrated, businesses looted, and families compelled to flee ancestral lands. Yet, despite the mounting evidence, the w...

A New Momentum in India-UK Relations: Keir Starmer’s Mumbai Visit and the Dawn of a Strategic Partnership

भारत-यूके संबंधों में नई गति: कीर स्टार्मर की मुंबई यात्रा से उभरता वैश्विक सहयोग का नया युग

ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर का 8 अक्टूबर 2025 को मुंबई आगमन, भारत-यूके संबंधों के इतिहास में एक नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा सकता है। यह केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं, बल्कि राजनीतिक, आर्थिक, तकनीकी और सांस्कृतिक साझेदारी के पुनर्परिभाषित स्वरूप का प्रतीक है। 125 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ स्टार्मर का आगमन यह दर्शाता है कि ब्रिटेन, भारत को अब केवल एक व्यापारिक साझेदार के रूप में नहीं, बल्कि एक रणनीतिक सहयोगी और वैश्विक साझेदारी के स्तंभ के रूप में देख रहा है।


ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और बदलता परिदृश्य

भारत और ब्रिटेन का संबंध उपनिवेशी अतीत से लेकर आधुनिक लोकतंत्र की साझी विरासत तक फैला है। 1947 के बाद से दोनों देशों ने “कॉमनवेल्थ” की भावना के तहत कई स्तरों पर सहयोग बनाए रखा। लेकिन पिछले दो दशकों में, यह संबंध औपनिवेशिक छाया से बाहर निकलकर समानता और साझेदारी आधारित संबंधों में परिवर्तित हुआ है।

ब्रेक्सिट के बाद ब्रिटेन ने जब यूरोपीय संघ से अलग होकर अपनी वैश्विक व्यापार नीति को पुनर्संतुलित करना शुरू किया, तब भारत स्वाभाविक रूप से उसके लिए एक बड़ा अवसर बनकर उभरा। यही कारण है कि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हुई हालिया प्रगति दोनों देशों के लिए “विन-विन” स्थिति मानी जा रही है।


मुंबई दौरे का प्रतीकात्मक और रणनीतिक महत्व

मुंबई का चयन इस दौरे के लिए केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि आर्थिक और प्रतीकात्मक रूप से भी सार्थक है। यह भारत की वित्तीय राजधानी है, जहाँ से देश की औद्योगिक धड़कनें चलती हैं।
स्टार्मर के साथ आए ब्रिटिश विश्वविद्यालयों, वित्तीय संस्थानों और उद्योग प्रमुखों का उद्देश्य स्पष्ट है — भारत के तेज़ी से बढ़ते नवाचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम के साथ गहरे जुड़ाव की तलाश।

इस मंच पर होने वाली चर्चाओं से शिक्षा, प्रौद्योगिकी और वित्तीय सेवाओं में कई संभावित सहयोग सामने आ सकते हैं —

  • विश्वविद्यालयों के बीच संयुक्त अनुसंधान एवं छात्र विनिमय कार्यक्रम
  • AI, ग्रीन टेक्नोलॉजी और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग
  • स्वच्छ ऊर्जा और नवीकरणीय संसाधनों पर संयुक्त निवेश

इन पहलुओं से भारत-यूके साझेदारी केवल कूटनीतिक विमर्श तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जमीनी स्तर पर परिणाम देने वाली साझेदारी में परिवर्तित हो सकती है।


आर्थिक सहयोग के नए आयाम

जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लंदन यात्रा के दौरान हुए व्यापार समझौते ने दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों में ठोस दिशा दी। यह समझौता 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को 100 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखता है।

भारत के लिए ब्रिटेन एक प्रमुख सेवा निर्यात बाजार है, जबकि ब्रिटेन के लिए भारत एक विशाल उपभोक्ता और निवेश अवसरों का केंद्र बन चुका है।

  • भारत से ब्रिटेन को होने वाले निर्यात में फार्मास्यूटिकल्स, आईटी सेवाएँ, और इंजीनियरिंग उत्पाद प्रमुख हैं।
  • वहीं ब्रिटेन भारत में फाइनेंस, शिक्षा और ग्रीन एनर्जी क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की योजना बना रहा है।

यदि दोनों देश टैरिफ और बौद्धिक संपदा अधिकारों से जुड़ी अड़चनों को दूर कर लेते हैं, तो यह साझेदारी एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारे के नए मॉडल के रूप में उभर सकती है।


वैश्विक चुनौतियों पर साझा दृष्टिकोण

भारत और यूके दोनों जलवायु परिवर्तन, स्वच्छ ऊर्जा, और डिजिटल गवर्नेंस जैसे विषयों पर समान दृष्टिकोण साझा करते हैं।

  • ‘Mission LiFE’ (Lifestyle for Environment) जैसी भारत की पहल को ब्रिटेन ने वैश्विक स्तर पर सराहा है।
  • वहीं ब्रिटेन की Net Zero by 2050 नीति, भारत की ग्रीन एनर्जी ट्रांज़िशन रणनीति से गहराई से जुड़ सकती है।

इसके अलावा, दोनों देश वैश्विक दक्षिण की आवाज़ को सशक्त बनाने, G20 और कॉमनवेल्थ जैसे मंचों पर बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ाने की दिशा में भी साथ काम कर सकते हैं।


कूटनीति से परे – सांस्कृतिक और मानविक आयाम

भारत-यूके संबंध केवल सरकारी समझौतों से नहीं, बल्कि लोगों के बीच बने संबंधों (People-to-People Connect) से भी संचालित होते हैं।

  • ब्रिटेन में बसे 20 लाख से अधिक भारतीय मूल के लोग दोनों देशों के बीच एक सशक्त पुल का कार्य करते हैं।
  • बॉलीवुड, ब्रिटिश सिनेमा, खेल (विशेषकर क्रिकेट), साहित्य, और भोजन जैसे माध्यमों ने इस संबंध को मानवीय और सांस्कृतिक स्तर पर और गहराई दी है।

इस संदर्भ में स्टार्मर की यात्रा केवल कूटनीति नहीं, बल्कि दो समाजों के बीच विश्वास और सांस्कृतिक संवाद का उत्सव है।


चुनौतियाँ और सावधानियाँ

हालाँकि संबंधों में गति आई है, लेकिन कुछ मुद्दों पर सतर्कता आवश्यक है —

  1. वीजा और आप्रवासन नीति: भारतीय छात्रों और पेशेवरों के लिए वीजा नीतियों को और लचीला बनाना होगा।
  2. टैरिफ एवं नियामक पारदर्शिता: व्यापार समझौतों में स्पष्टता सुनिश्चित करनी होगी ताकि छोटे और मध्यम उद्यमों को वास्तविक लाभ मिले।
  3. राजनीतिक निरंतरता: ब्रिटेन में बदलते राजनीतिक समीकरणों से इस साझेदारी की स्थिरता प्रभावित न हो, यह भी महत्वपूर्ण है।

भविष्य की दिशा: साझेदारी से साझी दृष्टि तक

भारत और यूके अब उस मुकाम पर हैं, जहाँ वे केवल व्यापारिक भागीदार नहीं, बल्कि वैश्विक नीति निर्धारक सहयोगी बन सकते हैं।
यदि यह संबंध शिक्षा, तकनीक और पर्यावरण के साथ सामाजिक विकास के आयामों को भी समाहित करता है, तो यह “21वीं सदी की साझेदारी” का आदर्श मॉडल बन सकता है।

कीर स्टार्मर की यह यात्रा दोनों देशों के लिए इस दृष्टि को मूर्त रूप देने का अवसर है।
यह केवल एक द्विपक्षीय संवाद नहीं, बल्कि एक संदेश है कि भारत और ब्रिटेन अब इतिहास के बोझ से नहीं, बल्कि भविष्य की संभावनाओं से जुड़े हैं।


निष्कर्ष

भारत-यूके संबंधों में यह नई गति केवल राजनयिक यात्राओं का परिणाम नहीं, बल्कि नए वैश्विक समीकरणों के अनुरूप साझेदारी की आवश्यकता का उत्तर है।
दोनों देशों के बीच यह सहयोग न केवल आर्थिक रूप से, बल्कि सांस्कृतिक, तकनीकी और मानविक स्तर पर भी गहराई तक जाने की क्षमता रखता है।

यदि भारत-यूके मिलकर समानता, पारदर्शिता और परस्पर सम्मान के सिद्धांतों पर आगे बढ़ते हैं, तो यह साझेदारी न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊँचाई देगी, बल्कि एक समावेशी और स्थायी वैश्विक व्यवस्था के निर्माण में भी योगदान देगी।


With The Hindu Inputs 

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