The Silent Genocide: Persecution of Hindus in Bangladesh and the Moral Failure of the Global Community In an age where conflicts in Gaza, Ukraine, and other flashpoints command the world’s attention, a quieter yet deeply disturbing humanitarian crisis continues to unfold next door to India — in Bangladesh. Since the political upheaval and resignation of Prime Minister Sheikh Hasina in August 2024, reports of violence against the Hindu minority have escalated dramatically. Killings, arson attacks, vandalism of temples, forced displacement, economic boycotts, and intimidation have become frighteningly frequent. According to figures cited by Indian authorities, more than 2,200 incidents of violence against Hindus were recorded in 2024 alone , with similar patterns continuing through 2025 and into 2026. Independent reports corroborate these trends: homes torched, idols desecrated, businesses looted, and families compelled to flee ancestral lands. Yet, despite the mounting evidence, the w...
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने के बाद कई महत्वपूर्ण सामाजिक और कानूनी परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं। इनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित बदलाव शामिल हो सकते हैं:
1. विवाह और तलाक के नियमों में एकरूपता
सभी नागरिकों के लिए विवाह और तलाक से जुड़े नियम समान होंगे, चाहे वे किसी भी धर्म के हों।
बहुविवाह (Polygamy) और 'तीन तलाक' जैसी प्रथाओं को समाप्त किया जा सकता है।
विवाह की कानूनी उम्र और पंजीकरण अनिवार्य हो सकता है।
2. संपत्ति और उत्तराधिकार के अधिकारों में समानता
सभी धर्मों के लिए उत्तराधिकार (Inheritance) के समान नियम लागू होंगे।
महिलाओं को संपत्ति में बराबरी का अधिकार मिलेगा।
पितृसत्ता आधारित उत्तराधिकार प्रणाली पर प्रभाव पड़ेगा।
3. गोद लेने और अभिभावकता से जुड़े कानूनों में सुधार
धर्म के आधार पर अलग-अलग गोद लेने के नियम खत्म होंगे।
सभी नागरिकों के लिए समान गोद लेने और संरक्षकता के प्रावधान लागू किए जा सकते हैं।
4. लिव-इन रिलेशनशिप और विवाह से जुड़े कानूनी अधिकारों में स्पष्टता
लिव-इन संबंधों को कानूनी मान्यता मिल सकती है और इससे जुड़े अधिकार स्पष्ट हो सकते हैं।
विवाह पंजीकरण को अनिवार्य बनाकर अनौपचारिक विवाहों की संख्या को कम किया जा सकता है।
5. धर्म आधारित व्यक्तिगत कानूनों का प्रभाव कम होगा
हिंदू, मुस्लिम, ईसाई आदि के अलग-अलग पर्सनल लॉ की जगह एक समान कानून लागू होगा।
इससे संविधान के अनुच्छेद 44 (राज्य नीति निदेशक तत्व) के उद्देश्यों को बल मिलेगा।
6. लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा
महिलाओं के विवाह, संपत्ति, उत्तराधिकार और तलाक से जुड़े अधिकार मजबूत होंगे।
मुस्लिम महिलाओं को तलाक, भरण-पोषण और पुनर्विवाह से जुड़े मामलों में समान अधिकार मिल सकते हैं।
7. न्यायिक मामलों में सरलता और स्पष्टता
विभिन्न धर्मों के लिए अलग-अलग कानूनों के चलते अदालतों में आने वाले विवादों की संख्या कम हो सकती है।
कानूनी प्रक्रियाएं अधिक पारदर्शी और सरल बन सकती हैं।
संभावित विवाद और चुनौतियां
कुछ धार्मिक समुदाय इसे अपनी परंपराओं में हस्तक्षेप के रूप में देख सकते हैं, जिससे विरोध हो सकता है।
सामाजिक स्वीकृति में समय लग सकता है, खासकर ग्रामीण इलाकों में।
राजनीतिक दलों और संगठनों के बीच इस मुद्दे पर बहस और मतभेद हो सकते हैं।
निष्कर्ष
उत्तराखंड में UCC लागू होने से सामाजिक समानता को बढ़ावा मिलेगा, लेकिन इसके क्रियान्वयन में संवेदनशीलता और व्यापक संवाद की आवश्यकता होगी। यदि इसे सही तरीके से लागू किया गया, तो यह समाज में न्याय, समानता और एकता को मजबूत कर सकता है।
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