Skip to main content

MENU👈

Show more

Polity Point By Arvind Singh PK Rewa

  राजनीति शास्त्र (Polity & Political Science) की तैयारी को बनाएं आसान और सटीक! क्या आप UPSC, State PCS, UGC NET, PGT या अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं? सही मार्गदर्शन और बेहतरीन स्टडी मटेरियल के लिए विजिट करें: 🌐 www.politypoint.com Polity Point ही क्यों चुनें? विस्तृत एवं सरल नोट्स: भारतीय संविधान, राजव्यवस्था और राजनीतिक सिद्धांत की आसान भाषा में समझ। परीक्षा-उन्मुख सामग्री: पिछले वर्षों के प्रश्नों (PYQs) का विश्लेषण और ट्रेंड के अनुसार स्टडी मटेरियल। क्विज़ और टेस्ट सीरीज़: अपनी तैयारी का सही आकलन करने के लिए नियमित अभ्यास प्रश्न। करंट अफेयर्स से जुड़ाव: राजव्यवस्था से जुड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों का सटीक कवरेज। 🎯 आज ही अपनी सफलता की नींव रखें! अभ्यास शुरू करने और अपनी तैयारी को अगली स्तर पर ले जाने के लिए अभी वेबसाइट पर जाएँ: 👉 www.politypoint.com (स्मार्ट स्टडी करें, सफलता हासिल करें!)

RBI Proposal to Link BRICS CBDCs: New Era of Digital Payments and De-Dollarization

RBI का ब्रिक्स CBDCs लिंक करने का प्रस्ताव: वैश्विक भुगतान व्यवस्था में एक नई क्रांति

डिजिटल तकनीक ने दुनिया की अर्थव्यवस्था को जिस तेजी से बदला है, उसी का अगला चरण है—सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC)। इसी दिशा में भारत के केंद्रीय बैंक, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने एक महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रस्ताव रखा है: ब्रिक्स देशों की आधिकारिक डिजिटल मुद्राओं को आपस में जोड़ना। यह प्रस्ताव 2026 में भारत की मेजबानी में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के एजेंडे में शामिल किए जाने की सिफारिश के साथ सामने आया है।

यह पहल केवल तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि वैश्विक वित्तीय शक्ति-संतुलन को प्रभावित करने वाला कदम भी हो सकती है।


ब्रिक्स और डॉलर से दूरी की रणनीति

ब्रिक्स समूह—ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका—लंबे समय से इस बात पर विचार कर रहा है कि वैश्विक व्यापार और वित्त में अमेरिकी डॉलर पर अत्यधिक निर्भरता को कैसे कम किया जाए। डॉलर आधारित भुगतान प्रणाली न केवल महंगी है, बल्कि राजनीतिक और भू-रणनीतिक दबावों के कारण कई बार अस्थिर भी हो जाती है।

2025 में ब्राजील के रियो डी जनेरियो में हुए ब्रिक्स सम्मेलन में सदस्य देशों ने भुगतान प्रणालियों को अधिक ‘इंटरऑपरेबल’ बनाने पर सहमति जताई थी। RBI का यह नया प्रस्ताव उसी दिशा में एक ठोस और व्यावहारिक कदम है।


CBDC क्या है और भारत कहाँ खड़ा है?

सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी किसी देश की आधिकारिक मुद्रा का डिजिटल रूप होती है, जिसे सीधे केंद्रीय बैंक जारी करता है। यह न तो क्रिप्टोकरेंसी है और न ही निजी कंपनियों द्वारा संचालित डिजिटल पैसा—बल्कि पूरी तरह सरकार और केंद्रीय बैंक के नियंत्रण में रहता है।

भारत में डिजिटल रुपया (e-Rupee) पहले ही पायलट चरण में है। चीन का डिजिटल युआन दुनिया का सबसे उन्नत CBDC माना जाता है, जबकि ब्राजील, रूस और दक्षिण अफ्रीका भी अपनी डिजिटल मुद्राओं पर तेजी से काम कर रहे हैं।


CBDCs को जोड़ने का मतलब क्या होगा?

यदि ब्रिक्स देशों की डिजिटल मुद्राएँ आपस में जुड़ जाती हैं, तो इसके कई बड़े लाभ होंगे:

1. व्यापार में आसानी

ब्रिक्स देशों के बीच आयात-निर्यात के भुगतान सीधे CBDC के माध्यम से हो सकेंगे। इससे डॉलर में कन्वर्ज़न की जरूरत कम होगी और विनिमय दर से जुड़ा जोखिम भी घटेगा।

2. पर्यटन और आम लोगों को फायदा

पर्यटक अपने देश के डिजिटल वॉलेट से दूसरे ब्रिक्स देश में बिना भारी शुल्क दिए भुगतान कर सकेंगे। करेंसी एक्सचेंज की झंझट कम होगी।

3. तेज और सस्ता भुगतान

पारंपरिक सिस्टम जैसे SWIFT सीमित समय और ज्यादा फीस पर काम करते हैं। CBDC आधारित सिस्टम 24x7 चल सकता है और कम लागत में लेन-देन संभव होगा।

4. डॉलर पर निर्भरता में कमी

यह पहल धीरे-धीरे वैश्विक वित्तीय व्यवस्था को बहु-ध्रुवीय बनाने की दिशा में ले जाएगी, जहाँ केवल एक मुद्रा का वर्चस्व नहीं होगा।

5. विकासशील देशों को बढ़ावा

डिजिटल भुगतान से वित्तीय समावेशन बढ़ेगा और छोटे व्यापारियों तथा आम नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय लेन-देन में आसानी होगी।


राह में आने वाली चुनौतियाँ

यह सपना जितना आकर्षक है, उतना ही जटिल भी है।

  • सभी देशों की CBDC तकनीक अलग-अलग हो सकती है, जिन्हें जोड़ने के लिए एक साझा तकनीकी “ब्रिज” बनाना होगा।
  • गोपनीयता, डेटा सुरक्षा और मौद्रिक नीति को लेकर सभी देशों की सोच अलग है।
  • ब्रिक्स देशों के बीच राजनीतिक मतभेद—जैसे भारत और चीन के संबंध—इस प्रक्रिया को धीमा कर सकते हैं।
  • डॉलर का वर्चस्व तुरंत खत्म नहीं होगा; यह एक लंबी और धीरे-धीरे चलने वाली प्रक्रिया होगी।

निष्कर्ष: भविष्य की वित्तीय दुनिया की झलक

RBI का यह प्रस्ताव केवल एक तकनीकी प्रयोग नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक व्यवस्था को नया आकार देने की कोशिश है। अगर 2026 के ब्रिक्स सम्मेलन में इसे स्वीकृति मिलती है और सही तरीके से लागू किया जाता है, तो यह ब्रिक्स देशों के लिए एक साझा “डिजिटल भुगतान राजमार्ग” बन सकता है।

यह कदम भारत की डिजिटल शक्ति, तकनीकी नेतृत्व और वैश्विक भूमिका को भी मजबूत करता है। आने वाले वर्षों में यह देखा जाएगा कि यह पहल केवल कागजों तक सीमित रहती है या वास्तव में दुनिया के पैसे के चलन को बदलने वाली क्रांति साबित होती है।

With Live mint Inputs 

Comments

Advertisement

POPULAR POSTS

Lifetime Ban on Convicted Politicians: Balancing Democracy, Justice, and the Constitution

 दोषी राजनेताओं पर आजीवन प्रतिबंध का प्रश्न: लोकतंत्र, न्याय और संविधान के मध्य संतुलन की तलाश भारत एक विशाल लोकतांत्रिक देश है, जहाँ विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की त्रयी के बीच सत्ता का संतुलन लोकतंत्र की मूल भावना को जीवित रखता है। इसी लोकतांत्रिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण पहलू है जनता द्वारा अपने प्रतिनिधियों का चयन। किंतु जब जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि ही किसी आपराधिक मामले में दोषी सिद्ध हो जाते हैं, तो यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या उन्हें भविष्य में चुनाव लड़ने की अनुमति दी जानी चाहिए? हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई, जिसमें दोषी सांसदों और विधायकों पर आजीवन प्रतिबंध लगाने की माँग की गई थी। केंद्र सरकार ने इस याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है और वर्तमान में निर्धारित छह वर्षों की अयोग्यता को बढ़ाकर आजीवन प्रतिबंध लगाना “अनुचित रूप से कठोर” होगा। इस मुद्दे पर उठी बहस लोकतंत्र, न्याय और संविधान के बीच संतुलन की आवश्यकता को रेखांकित करती है। 1. पृष्ठभूमि और महत्त्व भारतीय लोकतंत्र विश्व के सबसे बड़े लोकत...

Manipur Crisis & PM Modi’s Visit: Challenges and Prospects of the SoO Agreement | UPSC Analysis

मणिपुर में शांति की संभावनाएं: पीएम मोदी की प्रस्तावित यात्रा और कुकी समूहों के साथ युद्धविराम विस्तार परिचय मणिपुर, भारत का एक सांस्कृतिक और भौगोलिक रूप से विविधतापूर्ण पूर्वोत्तर राज्य, मई 2023 से शुरू हुई जातीय हिंसा के कारण गहरे संकट में है। मेइती और कुकी-जो समुदायों के बीच संघर्ष ने 260 से अधिक लोगों की जान ले ली और 60,000 से अधिक लोगों को विस्थापित कर दिया। इस संकट के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 13 सितंबर 2025 को प्रस्तावित मणिपुर यात्रा और केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा कुकी उग्रवादी समूहों के साथ सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (SoO) समझौते के विस्तार की पहल शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। यह लेख मणिपुर संकट के विभिन्न आयामों, केंद्र सरकार की रणनीति, और इस यात्रा के संभावित प्रभावों का विश्लेषण करता है, जो UPSC के दृष्टिकोण से सामाजिक, राजनीतिक, और प्रशासनिक पहलुओं को समझने के लिए प्रासंगिक है। मणिपुर हिंसा की पृष्ठभूमि मणिपुर का संकट सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक असमानताओं का परिणाम है। राज्य में मेइती (इंफाल घाटी में बहुसंख्यक) और कुकी-जो तथा नागा (पहाड़ी क्षेत्रों में) समुदा...

India-US Tariff Dispute : A Comprehensive Analysis

  भारत-अमेरिका टैरिफ विवाद : एक व्यापक विश्लेषण परिचय भारत-अमेरिका टैरिफ विवाद 2025 में एक प्रमुख मुद्दा बनकर उभरा, जिसने दोनों देशों के व्यापारिक और कूटनीतिक संबंधों को प्रभावित किया। इस लेख में टैरिफ विवाद की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, वर्तमान स्थिति, कारण, प्रभाव और संभावित समाधान का व्यापक विश्लेषण किया गया है। यह लेख UPSC, SSC, बैंकिंग और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी है। 1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि 2018: ट्रंप प्रशासन ने भारत से स्टील और एल्यूमीनियम पर अतिरिक्त शुल्क लगाया। 2019: भारत ने जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी मोटरसाइकिल, बादाम और सेब जैसे उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाया। GSP का हटना: 2019 में अमेरिका ने भारत को सामान्यीकृत प्राथमिकता प्रणाली (GSP) से हटा दिया, जिससे भारत को शुल्क-मुक्त निर्यात का लाभ मिलना बंद हो गया। 2. वर्तमान स्थिति (मार्च 2025) ट्रंप ने दावा किया कि भारत ने टैरिफ कम करने का वादा किया था, लेकिन भारतीय वाणिज्य मंत्रालय ने इसे खारिज कर दिया। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता की, लेकिन कोई ठोस समझौता नहीं हो सका। दोनों देश 2025 के अंत ...

Graca Machel Wins Indira Gandhi Peace Prize 2025 | Education, Human Rights, Disarmament

ग्रेसा माशेल को इंदिरा गांधी शांति, निरस्त्रीकरण एवं विकास पुरस्कार 2025 शांति, मानवता और विकास की वैश्विक प्रतीक को सम्मान परिचय इंदिरा गांधी शांति, निरस्त्रीकरण एवं विकास पुरस्कार केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि उस विचारधारा का प्रतीक है जिसमें शांति, सामाजिक न्याय, मानवाधिकार और सतत विकास को वैश्विक राजनीति का केंद्र माना जाता है। इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा स्थापित यह अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार उन व्यक्तियों और संस्थाओं को दिया जाता है जिन्होंने दुनिया को अधिक मानवीय, सुरक्षित और न्यायपूर्ण बनाने में ठोस योगदान दिया हो। 21 जनवरी 2026 को यह घोषणा हुई कि वर्ष 2025 के लिए यह प्रतिष्ठित पुरस्कार मोज़ाम्बिक की प्रसिद्ध समाजसेवी, राजनेता और वैश्विक मानवाधिकार कार्यकर्ता ग्रेसा माशेल को प्रदान किया जाएगा। यह निर्णय न केवल उनके व्यक्तिगत संघर्ष और सेवा-यात्रा की मान्यता है, बल्कि उन मूल्यों का भी उत्सव है जिनके लिए वे जीवन भर खड़ी रहीं। ग्रेसा माशेल: संघर्ष से सेवा तक की यात्रा ग्रेसा माशेल का जीवन अफ्रीका के सामाजिक-राजनीतिक संघर्षों, उपनिवेशवाद के बाद के पुनर्निर्माण और मानवाधिकारो...

Birthright Citizenship: Changing Global Perspectives and Impacts

यह संपादकीय लेख "बर्थराइट सिटिजनशिप: बदलते वैश्विक परिप्रेक्ष्य और प्रभाव" पर आधारित है। इसमें जन्म आधारित नागरिकता के ऐतिहासिक संदर्भ, विभिन्न देशों द्वारा इसे समाप्त करने की प्रवृत्ति, भारत में इस नीति के बदलाव, पक्ष-विपक्ष में तर्क, संभावित प्रभाव और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई है। लेख में यह विश्लेषण किया गया है कि कैसे बर्थराइट सिटिजनशिप मानवाधिकारों और समावेशन को बढ़ावा देती है, लेकिन साथ ही अवैध प्रवास और राष्ट्रीय संसाधनों पर दबाव डालने जैसे मुद्दे भी उत्पन्न कर सकती है। अंत में, यह निष्कर्ष निकाला गया है कि नागरिकता संबंधी नीतियों में संतुलन बनाए रखना आवश्यक है ताकि राष्ट्रीय हित और मानवाधिकार दोनों सुरक्षित रह सकें। बर्थराइट सिटिजनशिप: बदलते वैश्विक परिप्रेक्ष्य और प्रभाव भूमिका बर्थराइट सिटिजनशिप (जन्मसिद्ध नागरिकता) वह नीति है जिसके तहत किसी व्यक्ति को उस देश की नागरिकता स्वतः प्राप्त हो जाती है, जहां उसका जन्म हुआ है। यह सिद्धांत वर्षों से कई देशों में लागू था, लेकिन हाल के दशकों में विभिन्न देशों ने इसे समाप्त कर दिया है। बढ़ते प्रवास, जनसंख्या...

Trump’s Gaza Ceasefire Declaration: A New Chapter in Middle East Peace and Power Diplomacy

ट्रम्प की ऐतिहासिक गाजा युद्ध समाप्त की घोषणा: मध्य पूर्व में एक नए युग की शुरुआत व नेतन्याहू के लिए क्षमादान की अपील परिचय मध्य पूर्व, जो दशकों से संघर्ष, अस्थिरता और धार्मिक ध्रुवीकरण का केंद्र रहा है, 13 अक्टूबर 2025 को एक नए अध्याय की ओर बढ़ता दिखाई दिया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इजरायल की संसद (नेसेट) में गाजा युद्धविराम समझौते की घोषणा की। यह घोषणा न केवल इजरायल और हमास के बीच दो वर्ष तक चले भीषण संघर्ष का अंत करती है, बल्कि अमेरिकी कूटनीति की एक नई दिशा भी निर्धारित करती है — जहाँ "शक्ति के माध्यम से शांति" (Peace Through Strength) को पुनः परिभाषित किया गया है। ट्रम्प के इस कदम ने वैश्विक समुदाय को यह सोचने पर विवश किया कि क्या यह वाकई मध्य पूर्व में स्थायी शांति की शुरुआत है या केवल सामरिक और चुनावी लाभ का परिणाम। यह लेख उसी घोषणा के भू-राजनीतिक, कूटनीतिक और नैतिक आयामों का विश्लेषण करता है। संघर्ष का पृष्ठभूमि 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा इजरायल पर किए गए हमले ने आधुनिक मध्य पूर्व के इतिहास को झकझोर दिया था। लगभग 1,200 नागरिकों की हत्या और सैक...

Why Uzbekistan Matters to India: 5 Key Takeaways from a Growing Strategic Partnership

सिल्क रोड से आगे: उज़्बेकिस्तान के साथ भारत के मजबूत होते रिश्ते से जुड़ी 5 चौंकाने वाली बातें 1. प्रस्तावना: मध्य एशियाई कूटनीति का नया अध्याय हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उज़्बेकिस्तान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान "दोस्तलिक" (Friendship) ऑर्डर से सम्मानित किया जाना यूरेशियाई कूटनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है। यह सम्मान केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि मध्य एशिया के सबसे अधिक जनसंख्या वाले देश के साथ भारत की गहरी होती साझेदारी की मान्यता है। क्षेत्रीय स्थिरता और रणनीतिक महत्व के कारण उज़्बेकिस्तान भारत की व्यापक महाद्वीपीय महत्वाकांक्षाओं में एक प्रमुख भूमिका निभाता है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के लिए यह भू-आवेष्ठित (Landlocked) देश इतना महत्वपूर्ण क्यों है? सिल्क रोड के ऐतिहासिक आकर्षण से परे, यह संबंध एक सुविचारित और आधुनिक रणनीतिक गठबंधन का प्रतिनिधित्व करता है। भू-राजनीतिक दृष्टि से यह साझेदारी भारत की "कनेक्ट सेंट्रल एशिया नीति" का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो दक्षिण एशिया की समुद्री शक्ति को यूरेशिया के संसाधन-संपन्न हृदयस्थल से जोड़ती है।...

Why Teacher’s Day Needs a Mirror: The Uncomfortable Truth About Modern Education

शिक्षक दिवस को एक दर्पण की आवश्यकता क्यों है: आधुनिक शिक्षा का असुविधाजनक सच प्रस्तावना: उत्सव के पीछे की खामोशी आज शिक्षक दिवस है, फिर भी एक सजग शिक्षक के भीतर कहीं गहरे स्वयं को इस उत्सव से दूर रखने की तीव्र इच्छा जन्म लेती है। शिक्षक की "व्यथित आवाज़" केवल थकान की अभिव्यक्ति नहीं है, बल्कि अंतरात्मा के प्रतिरोध का स्वर है। जब सार्वजनिक मंचों पर मालाएँ, सम्मान और प्रशंसा के भव्य आयोजन हो रहे होते हैं, तब अनेक शिक्षक उनमें शामिल होने का मन नहीं बना पाते। यह मात्र निराशावाद नहीं, बल्कि शिक्षक-व्यवसाय के अस्तित्व का संकट है। हम एक भयावह विरोधाभास के साक्षी हैं। एक ओर मंचों पर "गुरु-वंदना" का सार्वजनिक प्रदर्शन है, दूसरी ओर उन शिक्षकों का निजी मोहभंग है जो जानते हैं कि मंच पर प्रस्तुत आदर्श छवि वास्तव में एक मुखौटा है, जिसके पीछे अनेक अनकही समस्याएँ छिपी हुई हैं। मंच का मृगतृष्णा: धारणा बनाम वास्तविकता शिक्षक दिवस के समारोह सम्मान के जीवंत उत्सव से अधिक एक औपचारिक अनुष्ठान बनते जा रहे हैं। मंच एक ऐसे फिल्टर का काम करता है जो शिक्षक जीवन की वास्तविकताओं को छिपाकर...

India-China Border Talks: Why the Pre-BRICS Meeting Matters | Strategic Analysis

भारत-चीन कूटनीति: ब्रिक्स (BRICS) से पहले सीमा वार्ता क्यों है इतनी महत्वपूर्ण 1. परिचय: शिखर सम्मेलन से पहले की उच्च-जोखिम वाली शांति  राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल का बीजिंग आगमन और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की उल्टी गिनती का एक साथ होना कोई कूटनीतिक इत्तेफाक नहीं है; यह तनाव कम करने की एक सोची-समझी रणनीति है। भले ही आगामी शिखर सम्मेलन राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित उपस्थिति के साथ वैश्विक सुर्खियों में रहेगा, लेकिन बीजिंग में एक "शैडो समिट" (पर्दे के पीछे की बातचीत) पहले से ही जारी है। भारतीय और चीनी वार्ताकारों के बीच यह उच्च स्तरीय बातचीत वैश्विक कैमरों के सामने आने से पहले दुनिया के सबसे अस्थिर द्विपक्षीय संबंधों को संभालने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। 2. "प्री-समिट" रणनीतिक संरेखण  NSA अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी का मिशन स्पष्ट है: वे उस नींव के निर्माता हैं जो शिखर सम्मेलन को द्विपक्षीय तनाव से बचाने का काम करेगी। उच्च-स्तरीय कूटनीति में बहुपक्षीय सफलता के लिए रणनीतिक तैयारी पहली शर्त होती है। बीजिंग में जारी बैठकों का उद्देश्य यह सुनिश्...

भारत का 10 ट्रिलियन डॉलर का सपना: एक वास्तविकता या चुनौती?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में 'विकसित भारत युवा नेता संवाद' के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था को अगले दशक के अंत तक 10 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य प्रस्तुत किया। यह लक्ष्य न केवल भारत के आर्थिक विकास की महत्वाकांक्षाओं को दर्शाता है, बल्कि देश की युवा शक्ति, तकनीकी नवाचार और उद्यमशीलता पर सरकार के भरोसे को भी प्रकट करता है। लेकिन यह सवाल उठता है कि क्या यह लक्ष्य यथार्थवादी है, या सिर्फ एक राजनैतिक आकांक्षा? आर्थिक क्षमता और संभावनाएं भारत विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जिसकी GDP 2023 में लगभग 3.73 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंची थी। यदि भारत 10 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य को प्राप्त करना चाहता है, तो इसे हर साल औसतन 8-10% की आर्थिक वृद्धि दर बनाए रखनी होगी। इसके लिए जरूरी है: 1. औद्योगिक विकास: उत्पादन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश और नवाचार की आवश्यकता है। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे कार्यक्रम इस दिशा में सहायक हो सकते हैं। 2. डिजिटल अर्थव्यवस्था: भारत का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से बढ़ रहा है। यदि इसे सही...