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Abujhmad and North Bastar Declared Naxal-Free: A Historic Milestone in India’s Internal Security Strategy
अबुझमाड़ और उत्तरी बस्तर नक्सल-मुक्त: ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में एक उपलब्धि भूमिका भारत की आंतरिक सुरक्षा के इतिहास में यह घोषणा एक युगांतरकारी क्षण के रूप में दर्ज की जाएगी कि छत्तीसगढ़ के अबुझमाड़ और उत्तरी बस्तर क्षेत्र अब नक्सल प्रभाव से पूरी तरह मुक्त हो चुके हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा की गई यह घोषणा केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि उन आदिवासी अंचलों के लिए नई सुबह का प्रतीक है जो दशकों तक हिंसा, भय और अलगाव के घेरे में रहे। साथ ही, हाल में 170 नक्सलियों के सामूहिक आत्मसमर्पण ने यह प्रमाणित कर दिया है कि सरकार की "समर्पण और पुनर्वास" नीति ने नक्सलवाद के जनाधार को कमजोर करने में निर्णायक भूमिका निभाई है। नक्सलवाद: उत्पत्ति और ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य भारत में नक्सलवाद की जड़ें स्वतंत्रता के बाद के ग्रामीण सामाजिक-आर्थिक असमानताओं में निहित हैं। इस आंदोलन की शुरुआत 1967 में पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले के नक्सलबाड़ी गांव से हुई, जब भूमिहीन किसानों ने जमींदारों और दमनकारी भूमि नीति के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह किया। इस आंदोलन के नेतृत्व में चारु म...