अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
Abujhmad and North Bastar Declared Naxal-Free: A Historic Milestone in India’s Internal Security Strategy
अबुझमाड़ और उत्तरी बस्तर नक्सल-मुक्त: ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में एक उपलब्धि भूमिका भारत की आंतरिक सुरक्षा के इतिहास में यह घोषणा एक युगांतरकारी क्षण के रूप में दर्ज की जाएगी कि छत्तीसगढ़ के अबुझमाड़ और उत्तरी बस्तर क्षेत्र अब नक्सल प्रभाव से पूरी तरह मुक्त हो चुके हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा की गई यह घोषणा केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि उन आदिवासी अंचलों के लिए नई सुबह का प्रतीक है जो दशकों तक हिंसा, भय और अलगाव के घेरे में रहे। साथ ही, हाल में 170 नक्सलियों के सामूहिक आत्मसमर्पण ने यह प्रमाणित कर दिया है कि सरकार की "समर्पण और पुनर्वास" नीति ने नक्सलवाद के जनाधार को कमजोर करने में निर्णायक भूमिका निभाई है। नक्सलवाद: उत्पत्ति और ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य भारत में नक्सलवाद की जड़ें स्वतंत्रता के बाद के ग्रामीण सामाजिक-आर्थिक असमानताओं में निहित हैं। इस आंदोलन की शुरुआत 1967 में पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले के नक्सलबाड़ी गांव से हुई, जब भूमिहीन किसानों ने जमींदारों और दमनकारी भूमि नीति के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह किया। इस आंदोलन के नेतृत्व में चारु म...