हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स की सदस्यता का अंत: ब्रिटिश लोकतंत्र के विकास का एक निर्णायक अध्याय ब्रिटेन की संसदीय परंपरा विश्व की सबसे पुरानी और स्थायी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है। किंतु इस गौरवपूर्ण परंपरा के भीतर कुछ ऐसे तत्व भी रहे हैं जो आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ लंबे समय से असंगत माने जाते रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख था हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स (Hereditary Peers) की सदस्यता—एक ऐसी व्यवस्था जिसके अंतर्गत कुलीन परिवारों के सदस्य केवल अपने जन्म के आधार पर संसद के ऊपरी सदन में स्थान प्राप्त करते थे। मार्च 2026 में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित Hereditary Peers Bill इस व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इसके साथ ही सदियों से चली आ रही वह परंपरा समाप्त हो जाएगी जिसके अंतर्गत राजनीतिक शक्ति का एक हिस्सा जन्माधिकार से निर्धारित होता था। यह सुधार न केवल एक संस्थागत परिवर्तन है, बल्कि ब्रिटिश लोकतंत्र के क्रमिक आधुनिकीकरण की उस दीर्घकालिक प्रक्रिया का हिस्सा है जिसमें सामंती विरासतों को धीरे-धीरे लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरू...
उत्तर कोरिया का परमाणु कार्यक्रम: संप्रभुता और वैश्विक सुरक्षा के बीच संतुलन उत्तर कोरिया ने 2025 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में स्पष्ट किया कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को कभी नहीं छोड़ेगा। इस बयान ने न केवल वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और कूटनीति के परिदृश्य को भी चुनौती दी है। उत्तर कोरिया के उप विदेश मंत्री किम सोन ग्योंग ने इसे राष्ट्रीय संप्रभुता और अस्तित्व का अभिन्न हिस्सा बताया और परमाणु निरस्त्रीकरण की मांग को "संप्रभुता का आत्मसमर्पण" करार दिया। यह रवैया किसी भी दृष्टिकोण से नई बात नहीं है। दशकों से उत्तर कोरिया अपने परमाणु कार्यक्रम को देश की सुरक्षा और राजनीतिक आत्मनिर्भरता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। लेकिन 21वीं सदी की वैश्विक सुरक्षा संरचना में ऐसे एकतरफा परमाणु विस्तार को नजरअंदाज करना आसान नहीं। विशेष रूप से एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया के साथ बढ़ती सैन्य गतिशीलता को देखते हुए, उत्तर कोरिया का यह कदम क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकता है। इस बीच, रूस और चीन ने कूटनीतिक वार्ता को बढ़ावा...