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भारत-यूरोपीय संघ रक्षा साझेदारी: वैश्विक अस्थिरता में एक सशक्त संरेखण दुनिया आज एक ऐसे दौर से गुजर रही है जहां पुरानी वैश्विक व्यवस्था की नींव हिल रही है। अमेरिकी नेतृत्व वाली एकध्रुवीयता की जगह बहुध्रुवीयता ले रही है, और क्षेत्रीय शक्तियां अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करने में जुटी हैं। इसी पृष्ठभूमि में भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी का समझौता एक महत्वपूर्ण विकास है। 21 जनवरी 2026 को ईयू की विदेश नीति प्रमुख काजा कलास द्वारा घोषित यह साझेदारी न केवल दोनों पक्षों की साझा सुरक्षा चिंताओं को संबोधित करती है, बल्कि उभरते वैश्विक क्रम में एक नई धुरी का निर्माण भी करती है। शिखर सम्मेलन: प्रतीकवाद और रणनीति का संगम आगामी 27 जनवरी को नई दिल्ली में आयोजित 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन का महत्व केवल द्विपक्षीय चर्चाओं तक सीमित नहीं है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा का गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होना एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश है। यह दर्शाता है कि ईयू भारत को महज एक बाजार या साझेदार के रू...