भारत की गाजा शांति योजना में भागीदारी: ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में पर्यवेक्षक के रूप में भारत की कूटनीतिक उपस्थिति परिचय वर्ष 2026 में गाजा पट्टी का प्रश्न केवल इजराइल–फिलिस्तीन संघर्ष तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक शक्ति-संतुलन, मानवीय हस्तक्षेप और बहुपक्षीय कूटनीति की परीक्षा बन गया है। ऐसे समय में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा प्रारंभ किया गया ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) एक नई पहल के रूप में सामने आया है, जिसका घोषित उद्देश्य गाजा में युद्धविराम की निगरानी, पुनर्निर्माण, हमास के निरस्त्रीकरण तथा एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण व्यवस्था की स्थापना है। फरवरी 2026 में वाशिंगटन डीसी में आयोजित इस बोर्ड की पहली बैठक में भारत ने पूर्ण सदस्य के बजाय पर्यवेक्षक (Observer) के रूप में भाग लिया। यह निर्णय साधारण कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत की संतुलित और बहुस्तरीय विदेश नीति का प्रतीक है। ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पृष्ठभूमि: संयुक्त राष्ट्र से परे एक वैकल्पिक मंच? ट्रंप प्रशासन ने जनवरी 2026 में विश्व आर्थिक मंच (दावोस) के दौरान इस पहल की घोषणा की थी। इसे एक ऐसे मंच के रूप में...
रोमिला थापर की नई किताब: इतिहास, मिथक और व्हाट्सएप फॉरवर्ड्स के दौर में एक ज़रूरी हस्तक्षेप भारतीय इतिहास-लेखन के क्षेत्र में रोमिला थापर का नाम गहन शोध, वस्तुनिष्ठ दृष्टिकोण और प्रमाण-आधारित तर्क के लिए जाना जाता है। प्राचीन भारत पर उनके अध्ययन ने न केवल इतिहास-चेतना को समृद्ध किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि इतिहास केवल बीते समय की कहानी नहीं, बल्कि वर्तमान को समझने का बौद्धिक उपकरण भी है। उनकी नई पुस्तक “Speaking of History: Conversations about India’s Past and Present” इसी परंपरा का विस्तार है, जिसमें वे लेखक-चिंतक नमित अरोड़ा के साथ संवाद के रूप में भारतीय इतिहास, उसकी व्याख्याओं और समकालीन चुनौतियों पर विचार-मंथन करती हैं। यह पुस्तक इतिहास को राजाओं-रानियों या युद्धों के घटनाक्रम के रूप में नहीं, बल्कि इतिहास-लेखन की प्रक्रिया , उसकी पद्धति और समाज पर उसके प्रभाव** के रूप में प्रस्तुत करती है। यही दृष्टिकोण इसे पारंपरिक इतिहास-किताबों से अलग और अधिक विवेकपूर्ण बनाता है। व्हाट्सएप इतिहास: गलतफहमियों का नया संकट पुस्तक की सबसे महत्वपूर्ण बहस सोशल मीडिया पर फैलते उस तथाकथित ...