अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
कोचिंग संस्थानों में पारदर्शिता की आवश्यकता केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) द्वारा दृष्टि आईएएस पर यूपीएससी सीएसई 2022 के चयन दावों में भ्रामक विज्ञापनों के लिए ₹5 लाख का जुर्माना लगाया जाना एक महत्वपूर्ण कदम है। यह कार्रवाई न केवल दृष्टि आईएएस के लिए, बल्कि देश भर के उन सभी कोचिंग संस्थानों के लिए एक सख्त संदेश है, जो अपनी उपलब्धियों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर छात्रों को गुमराह करते हैं। दृष्टि आईएएस ने सफल उम्मीदवारों की संख्या और उनकी तैयारी में अपनी भूमिका को अतिशयोक्तिपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया, जिससे न केवल उपभोक्ताओं का भरोसा टूटता है, बल्कि यह शिक्षा क्षेत्र की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाता है। आज के दौर में, जहां यूपीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग संस्थान लाखों छात्रों की पहली पसंद बन चुके हैं, उनकी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। ये संस्थान न केवल शिक्षा प्रदान करते हैं, बल्कि युवाओं के सपनों और भविष्य को आकार देने का दावा भी करते हैं। ऐसे में, भ्रामक विज्ञापनों के जरिए झूठे दावे करना न केवल अनैतिक है, बल्कि यह उन मेहनती छात्रों के साथ अन्याय है...