भारत की गाजा शांति योजना में भागीदारी: ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में पर्यवेक्षक के रूप में भारत की कूटनीतिक उपस्थिति परिचय वर्ष 2026 में गाजा पट्टी का प्रश्न केवल इजराइल–फिलिस्तीन संघर्ष तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक शक्ति-संतुलन, मानवीय हस्तक्षेप और बहुपक्षीय कूटनीति की परीक्षा बन गया है। ऐसे समय में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा प्रारंभ किया गया ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) एक नई पहल के रूप में सामने आया है, जिसका घोषित उद्देश्य गाजा में युद्धविराम की निगरानी, पुनर्निर्माण, हमास के निरस्त्रीकरण तथा एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण व्यवस्था की स्थापना है। फरवरी 2026 में वाशिंगटन डीसी में आयोजित इस बोर्ड की पहली बैठक में भारत ने पूर्ण सदस्य के बजाय पर्यवेक्षक (Observer) के रूप में भाग लिया। यह निर्णय साधारण कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत की संतुलित और बहुस्तरीय विदेश नीति का प्रतीक है। ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पृष्ठभूमि: संयुक्त राष्ट्र से परे एक वैकल्पिक मंच? ट्रंप प्रशासन ने जनवरी 2026 में विश्व आर्थिक मंच (दावोस) के दौरान इस पहल की घोषणा की थी। इसे एक ऐसे मंच के रूप में...
India’s Rice Production and Groundwater Crisis: Sustainability, Water Depletion and Policy Challenges
भारत में चावल उत्पादन और भूजल संकट: एक कृषि–पर्यावरणीय विश्लेषण ✦ प्रस्तावना पिछले एक दशक में भारत ने चावल उत्पादन के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। वर्ष 2024–25 में लगभग 149–150 मिलियन मीट्रिक टन उत्पादन के साथ भारत न केवल विश्व का सबसे बड़ा उत्पादक बना, बल्कि वैश्विक निर्यात में भी उसकी हिस्सेदारी 40% के आसपास पहुँच गई। यह उपलब्धि किसानों की आय, खाद्य सुरक्षा और विदेशी मुद्रा अर्जन — तीनों स्तरों पर अत्यंत महत्वपूर्ण है। लेकिन इस चमकदार सफलता के पीछे एक गंभीर पर्यावरणीय संकट तेजी से पनप रहा है — विशेषकर पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में, जहाँ चावल की खेती का विस्तार अत्यधिक भूजल दोहन पर आधारित है। सब्सिडी, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और निर्यात की बढ़ती मांग ने उत्पादन तो बढ़ाया, परंतु भूमि के नीचे जलभंडार खतरनाक रूप से खाली होते चले गए हैं। ✦ भारत में चावल उत्पादन का परिदृश्य चावल भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। देश के अधिकांश क्षेत्रों में यह खरीफ फसल के रूप में उगाया जाता है और व्यापक खाद्य मांग को पूरा करता है। हरित क्रांति के बाद पंजाब और हरियाणा ...