अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
अमेरिका में ईरान-विरोधी रैली पर हमला राजनीतिक कट्टरता, प्रवासी राजनीति और वैश्विक लोकतंत्र की चुनौतियाँ (ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य के साथ समग्र विश्लेषणात्मक लेख) भूमिका: विरोध से हिंसा तक की यात्रा लोकतंत्र की आत्मा विरोध में बसती है। विचारों का टकराव, सत्ता से असहमति और सार्वजनिक मंचों पर असंतोष की अभिव्यक्ति—यही किसी भी जीवंत लोकतांत्रिक समाज की पहचान है। लेकिन जब यही विरोध हिंसा में बदल जाए, तो वह लोकतंत्र की शक्ति नहीं, उसकी कमजोरी बन जाता है। 12 जनवरी 2026 को अमेरिका के लॉस एंजेलिस में हुई घटना इसी त्रासदी का प्रतीक है। ईरान की राजशाही समर्थक और सर्वोच्च नेता अली खामेनेई-विरोधी रैली के दौरान एक ट्रक भीड़ में घुस गया, जिससे लोग घायल हुए और पूरे विश्व का ध्यान एक बार फिर इस प्रश्न पर गया—क्या वैश्वीकृत दुनिया में कोई भी राजनीतिक संघर्ष अब “स्थानीय” रह गया है? यह घटना केवल एक आपराधिक कृत्य नहीं थी, बल्कि इतिहास, प्रवास, वैचारिक टकराव और वैश्विक राजनीति के कई धागों से बुनी हुई एक जटिल कहानी थी। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: ईरान का अधूरा संघर्ष ईरान का आधुनिक राजनीतिक इतिहास अस्थिरता और ...