अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
मिशन सुदर्शन चक्र: सीमा सुरक्षा में नई कवच रेखा या सामरिक संकेत? भारत-पाक सीमा पर सुरक्षा की परतें और सघन होती जा रही हैं। भारतीय सेना ने हाल ही में ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ के तहत छह AK-630 एयर डिफेंस गन सिस्टम्स की खरीद के लिए आरएफपी (Request for Proposal) जारी की है। यह निर्णय केवल एक तकनीकी खरीद नहीं, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में बदलती सुरक्षा चुनौतियों के प्रति एक सामरिक प्रतिक्रिया भी है — विशेष रूप से तब, जब ड्रोन, रॉकेट, आर्टिलरी और मोर्टार (URAM) जैसे खतरों की प्रकृति तेज़ी से विकसित हो रही है। 🔹 AK-630: हवा में मौत की गति AK-630 मूलतः सोवियत रूस में विकसित 30 मिमी, छह-नली (six-barrel) रोटरी कैनन प्रणाली है — जिसे Close-In Weapon System (CIWS) कहा जाता है। यह जहाजों पर आखिरी रक्षा पंक्ति के रूप में प्रयोग की जाती रही है, ताकि कम ऊँचाई पर उड़ते मिसाइल, हेलीकॉप्टर या ड्रोन को तत्काल नष्ट किया जा सके। अब इसी सिद्धांत को स्थलीय (land-based) रूप में भारतीय सेना सीमांत इलाकों में उतारने जा रही है। इस प्रणाली का ट्रेलर-माउंटेड संस्करण 4 किमी तक की दूरी पर कम ऊँचाई वाले हवाई लक्ष्यों ...