अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
🌍 UNCTAD-16: व्यापार और विकास के लिए एक नया संदर्भ – एक विश्लेषण प्रस्तावना 20 से 23 अक्टूबर 2025 के बीच स्विट्ज़रलैंड के जेनेवा में आयोजित संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (UNCTAD-16) ने वैश्विक आर्थिक संवाद को एक नई दिशा प्रदान की। बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य — विशेषकर ऋण संकट, डिजिटल असमानता, और आपूर्ति श्रृंखलाओं की जटिलता — के बीच यह सम्मेलन विकासशील देशों के लिए आशा और अवसर दोनों लेकर आया। इस सम्मेलन का मुख्य विषय था — “भविष्य को आकार देने के लिए: समावेशी, न्यायसंगत और सतत विकास हेतु आर्थिक परिवर्तन को गति देना।” UNCTAD-16 को न केवल बहुपक्षीय व्यापार नीति का मंच माना जा सकता है, बल्कि यह सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की दिशा में सहयोगात्मक प्रगति का आधार भी बनकर उभरा है। 1. UNCTAD-16 का व्यापक परिप्रेक्ष्य UNCTAD (United Nations Conference on Trade and Development) 1964 में गठित एक प्रमुख संयुक्त राष्ट्र निकाय है, जिसका उद्देश्य व्यापार के माध्यम से विकास को प्रोत्साहित करना है। हर चार वर्ष में आयोजित होने वाला यह सम्मेलन सदस्य देशों के लिए नीति-निर्माण का सर्वो...