अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
मेडागास्कर में 2025 का सैन्य तख्तापलट: युवा-नेतृत्व वाली अशांति और आंद्री राजोएलिना का पतन प्रस्तावना 14 अक्टूबर 2025 को मेडागास्कर ने एक बार फिर इतिहास का चक्र पूरा होते देखा—जब राजधानी अंटानानारीवो में सेना ने सत्ता पर कब्ज़ा कर लिया और राष्ट्रपति आंद्री राजोएलिना को सत्ता से बेदखल कर दिया। लगभग तीन सप्ताह तक चले छात्र-युवा प्रदर्शनों और प्रशासनिक असंतोष की परिणति इस तख्तापलट में हुई। जिस आंदोलन की शुरुआत पानी-बिजली संकट और बेरोजगारी जैसी बुनियादी समस्याओं से हुई थी, वह अंततः जन असंतोष की व्यापक लहर बन गया। राष्ट्रपति भवन के बाहर सेना की विशेष इकाई CAPSAT के कमांडर कर्नल माइकल रैंड्रियानिरिना ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि "देश को पुनः स्थिर करने के लिए एक नागरिक नेतृत्व वाली अस्थायी सरकार का गठन किया जाएगा", साथ ही उन्होंने संसद और उच्च संस्थानों को भंग करने की घोषणा भी की। यह घटना न केवल राजोएलिना के शासन का अंत थी, बल्कि मेडागास्कर की बार-बार लौटती सैन्य राजनीति की परंपरा का पुनः स्मरण भी। ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य: तख्तापलटों का चक्र 1960 में फ्रांस से स्वतंत्...