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Dhar Bhojshala Verdict: High Court Decision, Political Reactions and Social Impact Analysis

 धार भोजशाला विवाद: हाईकोर्ट के फैसले, राजनीतिक प्रतिक्रियाओं और सामाजिक प्रभावों का गहन विश्लेषण धार की ऐतिहासिक भोजशाला पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का निर्णय केवल एक धार्मिक स्थल से जुड़ा कानूनी फैसला नहीं है, बल्कि यह भारत की ऐतिहासिक चेतना, न्यायिक व्यवस्था और सामाजिक संतुलन की गंभीर परीक्षा भी है। सदियों से विवादों, दावों और भावनात्मक बहसों के केंद्र में रही भोजशाला अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां न्यायपालिका ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर अपना स्पष्ट दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। इस फैसले ने एक बार फिर यह सिद्ध किया है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अंतिम समाधान का मार्ग अदालतों और संविधान से होकर ही गुजरता है। भोजशाला का इतिहास केवल एक इमारत का इतिहास नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता की उस सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है, जिसमें ज्ञान, शिक्षा और आस्था का गहरा समन्वय दिखाई देता है। माना जाता है कि परमार वंश के महान राजा भोज के काल में यह स्थान विद्या और संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र था। समय के साथ राजनीतिक और ऐतिहासिक परिवर्तनों ने इसकी पहचान को विवादों में बदल...

Judicial Independence Under Threat: Retired Judges Condemn Motivated Campaign Against India’s Chief Justice

मुख्य न्यायाधीश के विरुद्ध कथित “प्रेरित अभियान” की पूर्व न्यायाधीशों द्वारा निंदा : एक शैक्षणिक, विश्लेषणात्मक लेख 10 दिसम्बर 2025 को देश की न्याय-व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण और दुर्लभ क्षण दर्ज हुआ, जब भारत के सर्वोच्च न्यायालय एवं विभिन्न उच्च न्यायालयों के 44 सेवानिवृत्त न्यायाधीशों ने एक संयुक्त वक्तव्य जारी कर मुख्य न्यायाधीश (CJI) के विरुद्ध चल रहे कथित “प्रेरित अभियान” की कठोर आलोचना की। यह घटना न्यायपालिका के आंतरिक आचरण से अधिक बाहरी दबावों की प्रकृति और न्यायिक स्वतंत्रता पर उसके निहितार्थों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करती है। 1. पृष्ठभूमि और विवाद का उद्भव रोहिंग्या शरणार्थियों के अवैध प्रवेश, मानवाधिकार और राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी प्रश्न लंबे समय से भारतीय न्यायालयों के सामने जटिल संवैधानिक चुनौती बने हुए हैं। इसी संदर्भ में एक याचिका की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश द्वारा की गई कुछ मौखिक टिप्पणियों को विभिन्न राजनीतिक दलों, कुछ संगठनों तथा मीडिया के एक तबके द्वारा “विवादास्पद” बताया गया। इन टिप्पणियों को उनके संदर्भ से काटकर प्रस्तुत किया गया और सोशल मीडिया पर अचानक...

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