अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
पाकिस्तान की रणनीतिक प्रासंगिकता: वैश्विक शक्तियों के लिए अनिवार्य पड़ोसी परिचय दक्षिण एशिया की राजनीति में भारत और पाकिस्तान का संबंध लंबे समय से तनाव, प्रतिस्पर्धा और परस्पर अविश्वास से घिरा रहा है। 1947 के विभाजन से लेकर आज तक, इन दोनों देशों के बीच न केवल सीमित युद्ध हुए हैं, बल्कि एक वैचारिक और सुरक्षा-केंद्रित प्रतिद्वंद्विता भी कायम रही है। इसके बावजूद, पाकिस्तान वैश्विक शक्तियों — विशेषकर चीन, अमेरिका और हाल के वर्षों में रूस — के लिए लगातार रणनीतिक महत्व रखता है। अंतरराष्ट्रीय संबंधों के विश्लेषक कांति बजपाई के अनुसार, पाकिस्तान की यह प्रासंगिकता तीन प्रमुख तत्वों पर आधारित है — स्थान , विघटनकारी क्षमताएं , और शक्ति (जिसमें सैन्य, जनसांख्यिकीय, धार्मिक, प्रवासी और गठबंधन शक्ति शामिल है)। इन तीनों आयामों का संयोजन पाकिस्तान को विश्व शक्तियों के लिए एक ऐसा देश बनाता है जिसे पूरी तरह नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। 1. स्थान: भू-राजनीतिक केंद्र में स्थित एक राष्ट्र भूगोल ही पाकिस्तान की सबसे बड़ी रणनीतिक पूंजी है। दक्षिण एशिया, मध्य एशिया और पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) के संग...