अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
भारत का विदेशी कर्ज बनाम विदेशी मुद्रा भंडार 2025: आर्थिक मजबूती का संतुलन प्रस्तावना भारत की अर्थव्यवस्था 2025 में नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रही है। 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की महत्वाकांक्षा के बीच देश की बाहरी वित्तीय स्थिति – विशेषकर विदेशी मुद्रा भंडार और विदेशी कर्ज – चर्चा का प्रमुख विषय बन गई है। सितंबर 2025 तक भारत के विदेशी मुद्रा भंडार 702.57 बिलियन डॉलर और विदेशी कर्ज 663 बिलियन डॉलर है। पहली नजर में यह स्थिति संतुलित और मजबूत प्रतीत होती है, लेकिन गहराई से देखने पर अवसरों, चुनौतियों और नीतिगत जिम्मेदारियों की कई परतें सामने आती हैं। 1. विदेशी मुद्रा भंडार: सुरक्षा और आत्मविश्वास का आधार विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश के लिए “आर्थिक बफर” की तरह होता है। यह आयात भुगतान, मुद्रा की स्थिरता और बाहरी झटकों को झेलने की क्षमता तय करता है। रिकॉर्ड स्तर : भारतीय रिज़र्व बैंक के अनुसार सितंबर 2025 के अंत में भंडार 704.89 बिलियन डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंचा। आयात कवरेज : यह भंडार 10-11 महीने के आयात को कवर करता है, जबकि वैश्विक मानक 3-6 महीने का है। कार...