अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
🌍 सूडान में बढ़ता संघर्ष: अल फाशिर पर घेरा और मानवीय संकट का गहराना सारांश अप्रैल 2023 से सूडान जिस भयानक गृहयुद्ध की चपेट में है, उसने न केवल देश के सामाजिक और राजनीतिक ढांचे को तहस-नहस कर दिया है, बल्कि अफ्रीका के हृदय में एक अभूतपूर्व मानवीय त्रासदी को भी जन्म दिया है। सूडानी सशस्त्र बल (SAF) और अर्धसैनिक रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) के बीच यह संघर्ष अब दारफुर के अंतिम SAF-नियंत्रित क्षेत्र अल फाशिर तक पहुंच गया है। इस शहर पर RSF का घेरा, न केवल रणनीतिक बल्कि मानवीय दृष्टि से भी भयावह परिणामों की चेतावनी देता है। यह लेख इस संघर्ष के ऐतिहासिक संदर्भ, क्षेत्रीय जटिलताओं, अंतरराष्ट्रीय उदासीनता और संभावित समाधानों की गहन पड़ताल करता है। 1. प्रस्तावना: युद्ध की छाया में डूबता सूडान 2019 में तानाशाह उमर अल-बशीर के पतन के बाद सूडान के नागरिक शासन की ओर संक्रमण को आशा की किरण माना गया था। लेकिन यह आशा जल्द ही दो सैन्य गुटों— जनरल अब्देल फतह अल-बुरहान (SAF) और जनरल मोहम्मद हमदान दगालो ‘हेमेद्ती’ (RSF) —के बीच सत्ता संघर्ष में बदल गई। 15 अप्रैल 2023 को खार्तूम में शुरू हुई लड़ाई धी...