अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
बांग्लादेश में पुनः उबाल: भारत के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है भूमिका दक्षिण एशिया की राजनीति में बांग्लादेश एक ऐसा देश रहा है, जिसकी आंतरिक स्थिरता का सीधा प्रभाव भारत की सुरक्षा, कूटनीति और क्षेत्रीय संतुलन पर पड़ता है। दिसंबर 2025 में बांग्लादेश में उभरी नई राजनीतिक अशांति केवल एक छात्र नेता की हत्या तक सीमित घटना नहीं है, बल्कि यह उस गहरे संरचनात्मक संकट का प्रतीक है, जो 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद से लगातार गहराता जा रहा है। छात्र आंदोलनों, हिंसक प्रदर्शनों, मीडिया संस्थानों पर हमलों और भारत-विरोधी नारों ने इस संकट को अंतरराष्ट्रीय ध्यान का विषय बना दिया है। फरवरी 2026 में प्रस्तावित चुनावों से ठीक पहले यह स्थिति भारत के लिए विशेष रूप से चिंता का कारण है। वर्तमान अशांति की पृष्ठभूमि बांग्लादेश में ताजा हिंसा का तत्काल कारण 32 वर्षीय छात्र नेता शरीफ ओसमान हादी की मृत्यु बनी। हादी 2024 के उस छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन का प्रमुख चेहरा था, जो आरक्षण (कोटा सुधार) की मांग से शुरू होकर व्यापक राजनीतिक विद्रोह में बदल गया था। 12 दिसंबर 2025 को ढाका में चुनाव प्रचार के दौरान उ...