अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
भारत-जर्मनी रक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा समझौते: सामरिक और पर्यावरणीय सहयोग की नई दिशा भूमिका 21 अक्टूबर 2025 का दिन भारत-जर्मनी संबंधों में एक नई ऊँचाई लेकर आया। नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय शिखर सम्मेलन में दोनों देशों ने रक्षा, साइबर सुरक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा , विशेषकर ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। यह साझेदारी न केवल आर्थिक और तकनीकी दृष्टि से बल्कि वैश्विक पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं और क्षेत्रीय सुरक्षा के संदर्भ में भी ऐतिहासिक है। भारत की ‘ मेक इन इंडिया ’ पहल और जर्मनी की ‘ फोकस ऑन इंडिया ’ रणनीति इन समझौतों की बुनियाद में हैं। दोनों देशों ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वे न केवल व्यापारिक भागीदार हैं, बल्कि जलवायु, तकनीक और सुरक्षा के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोगी बनना चाहते हैं। प्रमुख समझौते और उनका महत्व रॉयटर्स की रिपोर्ट (21 अक्टूबर 2025) के अनुसार, भारत और जर्मनी ने दो मुख्य क्षेत्रों — रक्षा सहयोग और नवीकरणीय ऊर्जा — में नए अध्याय खोले हैं। (1) रक्षा सहयोग दोनों देशों ने संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण, और...