अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
पेटल गहलोत: संयुक्त राष्ट्र में भारत की नई कूटनीतिक ताकत का उदय संयुक्त राष्ट्र महासभा का मंच वैश्विक कूटनीति का सबसे बड़ा अखाड़ा है, जहां राष्ट्र अपनी नीतियों और दृष्टिकोण को दुनिया के सामने रखते हैं। सितंबर 2025 में, जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने कश्मीर और भारत पर पुराने आरोप दोहराए, तो भारत की ओर से जवाब देने आईं पेटल गहलोत — एक युवा, तेजतर्रार और आत्मविश्वास से भरी राजनयिक। उनका तथ्य-आधारित, आक्रामक और तर्कपूर्ण भाषण न केवल पाकिस्तान के दावों को ध्वस्त करता है, बल्कि भारत की बदलती कूटनीतिक धार का प्रतीक बन गया। यह संपादकीय भारत की इस नई कूटनीतिक शक्ति और इसके वैश्विक प्रभाव की पड़ताल करता है। पेटल गहलोत: भारतीय कूटनीति का उभरता चेहरा पेटल गहलोत, भारतीय विदेश सेवा की अधिकारी और संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की फर्स्ट सेक्रेटरी, नई पीढ़ी की कूटनीति का प्रतीक हैं। दिल्ली के प्रतिष्ठित कॉलेजों और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से शिक्षा प्राप्त पेटल ने 2020 में विदेश मंत्रालय में कदम रखा और 2023 में संयुक्त राष्ट्र मिशन से जुड़ीं। उनकी यह यात्रा भारत की उस ...