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बुलडोज़र न्याय और संवैधानिक अधिकार प्रस्तावना भारत में कानून के शासन (Rule of Law) को सुनिश्चित करने के लिए न्यायपालिका की सक्रिय भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रयागराज में की गई बुलडोज़र कार्रवाई को असंवैधानिक घोषित किया जाना, न केवल प्रशासनिक जवाबदेही पर एक कठोर संदेश है, बल्कि नागरिक अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक मील का पत्थर भी है। यह निर्णय संवैधानिक नैतिकता, विधिक प्रक्रिया और सामाजिक न्याय की दृष्टि से बहुस्तरीय प्रभाव डालता है। न्यायिक हस्तक्षेप और संविधान की रक्षा सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय संविधान के अनुच्छेद 21, जो जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की गारंटी देता है, की व्याख्या को और अधिक स्पष्ट करता है। इसमें आवास का अधिकार (Right to Shelter) भी शामिल है, जिसे विधायिका और कार्यपालिका को संज्ञान में रखना आवश्यक है। जब कोई प्रशासनिक निकाय बिना उचित प्रक्रिया के नागरिकों के अधिकारों का हनन करता है, तो न्यायपालिका का हस्तक्षेप लोकतंत्र की मजबूती का संकेत होता है । प्रशासनिक मनमानी और विधिक प्रक्रिया स्थानीय प्रशासन, विशेष रूप से शहरी नियोज...