भारत की गाजा शांति योजना में भागीदारी: ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में पर्यवेक्षक के रूप में भारत की कूटनीतिक उपस्थिति परिचय वर्ष 2026 में गाजा पट्टी का प्रश्न केवल इजराइल–फिलिस्तीन संघर्ष तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक शक्ति-संतुलन, मानवीय हस्तक्षेप और बहुपक्षीय कूटनीति की परीक्षा बन गया है। ऐसे समय में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा प्रारंभ किया गया ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) एक नई पहल के रूप में सामने आया है, जिसका घोषित उद्देश्य गाजा में युद्धविराम की निगरानी, पुनर्निर्माण, हमास के निरस्त्रीकरण तथा एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण व्यवस्था की स्थापना है। फरवरी 2026 में वाशिंगटन डीसी में आयोजित इस बोर्ड की पहली बैठक में भारत ने पूर्ण सदस्य के बजाय पर्यवेक्षक (Observer) के रूप में भाग लिया। यह निर्णय साधारण कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत की संतुलित और बहुस्तरीय विदेश नीति का प्रतीक है। ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पृष्ठभूमि: संयुक्त राष्ट्र से परे एक वैकल्पिक मंच? ट्रंप प्रशासन ने जनवरी 2026 में विश्व आर्थिक मंच (दावोस) के दौरान इस पहल की घोषणा की थी। इसे एक ऐसे मंच के रूप में...
भारत में बुलेट ट्रेन का आगमन: 2027 से शुरू होगी मुंबई–अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल सेवा प्रस्तावना भारत के रेल इतिहास में 1 जनवरी 2026 का दिन एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में दर्ज हो गया। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की कि देश की पहली हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन सेवा 15 अगस्त 2027 से शुरू हो जाएगी। यह सेवा मुंबई–अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (MAHSR) पर संचालित होगी — जो भारत को तेज, आधुनिक और सुरक्षित रेल नेटवर्क की नई दुनिया में प्रवेश कराएगी। यह परियोजना केवल एक परिवहन परियोजना नहीं, बल्कि भारत की तकनीकी क्षमता, आर्थिक आकांक्षा और अवसंरचनात्मक उन्नति का प्रतीक है। परियोजना का संक्षिप्त परिचय मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स से लेकर अहमदाबाद के साबरमती तक फैला यह कॉरिडोर लगभग 508 किलोमीटर लंबा है। बुलेट ट्रेनें अधिकतम 320 किमी/घंटा की रफ्तार से चलेंगी, जिससे यह दूरी अब मात्र लगभग 2 घंटे में तय हो सकेगी — जबकि वर्तमान में इसी यात्रा में 6–8 घंटे लगते हैं। परियोजना में कुल 12 आधुनिक स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें मुंबई, ठाणे, विरार, बोईसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, ...