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भारत का संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान विरोधी प्रस्ताव: एक कूटनीतिक संतुलन और उसके दूरगामी प्रभाव प्रस्तावना पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक राजनीति के केंद्र में है। क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव, ऊर्जा मार्गों की असुरक्षा और महाशक्तियों की प्रतिस्पर्धा ने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को अस्थिर बना दिया है। ऐसे समय में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में पारित वह प्रस्ताव, जिसमें ईरान द्वारा खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) देशों और जॉर्डन पर किए गए मिसाइल एवं ड्रोन हमलों की निंदा की गई, वैश्विक कूटनीति में एक महत्वपूर्ण क्षण के रूप में सामने आया। इस प्रस्ताव को बड़ी संख्या में देशों द्वारा सह-प्रायोजित किया गया और भारत का इसमें शामिल होना विशेष रूप से उल्लेखनीय है। भारत, जो लंबे समय से पश्चिम एशिया में संतुलित और बहुआयामी विदेश नीति का अनुसरण करता रहा है, इस निर्णय के माध्यम से अपने रणनीतिक हितों, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय नियम-आधारित व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्धता को स्पष्ट करता है। यह निर्णय केवल एक कूटनीतिक समर्थन नहीं है, बल्कि भारत की विदेश नीति के विकासशील चरित्र का संकेत ...