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Polity Point By Arvind Singh PK Rewa

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U.S. Drops Denuclearization Goal for North Korea: A Strategic Shift in Trump’s 2025 Security Roadmap

अमेरिकी विदेश नीति में एक मौन परिवर्तन: ट्रंप प्रशासन के नए वैश्विक सुरक्षा रोडमैप में उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण लक्ष्य का लोप

परिचय

दिसंबर 2025 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के आरंभिक चरण में जारी Global Security Roadmap ने अमेरिकी विदेश नीति के एक अत्यंत महत्वपूर्ण और कम चर्चित बदलाव की ओर संकेत किया। पहली बार इस दस्तावेज़ में उत्तर कोरिया (डीपीआरके) के “परमाणु निरस्त्रीकरण” (Denuclearization) को अमेरिकी रणनीतिक लक्ष्य के रूप में शामिल नहीं किया गया है। यह चूक या त्रुटि नहीं है—यह अमेरिकी नीति-ढांचे में एक गहरे परिवर्तन का संकेतक है, जो कोरियाई प्रायद्वीप की भू-राजनीति और हिंद-प्रशांत सुरक्षा के समीकरण को दीर्घकालिक रूप से प्रभावित करेगा।

तीन दशकों से वॉशिंगटन की आधिकारिक नीति “पूर्ण, सत्यापित और अपरिवर्तनीय परमाणु निरस्त्रीकरण” (CVID) रही है। ट्रंप का नया दस्तावेज़ इस ऐतिहासिक नीति को प्रथम बार औपचारिक रूप से त्यागता प्रतीत होता है। यह न केवल भाषा का बदलाव है, बल्कि एक रणनीतिक स्वीकृति (strategic acceptance) भी है कि परमाणु-सशस्त्र उत्तर कोरिया आज एक de facto nuclear state है, जिसे अब पूर्व की भांति प्रतिरोध या दबाव से निरस्त्र करना संभव नहीं।


अमेरिकी नीति में परिवर्तन: शब्दों से परे एक संदेश

पहले ट्रंप प्रशासन (2017–2021) और बाइडन शासन (2021–2025) दोनों ने सार्वजनिक रूप से यह दावा जारी रखा कि अमेरिका अभी भी CVID लक्ष्य पर प्रतिबद्ध है। परंतु व्यावहारिक दृष्टि से यह लक्ष्य असंभव होता गया, विशेषकर 2019 के हनोई शिखर सम्मेलन की विफलता के बाद।

नए रोडमैप में इस लक्ष्य का न होना निम्नलिखित संदेश देता है—
अमेरिका अब “शून्य-यथार्थवाद” से आगे बढ़कर यथार्थवादी-प्रबंधन” (Realistic Management) की दिशा में जा रहा है।


इस बदलाव के प्रमुख कारण

1. यथार्थवादी रणनीतिक मूल्यांकन

उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन ने अपने 2012–2025 के शासनकाल में कई बार स्पष्ट किया कि परमाणु हथियार उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा और शासन-स्थायित्व की गारंटी हैं।
बीते दशक में डीपीआरके ने:

  • हायपरसोनिक मिसाइलें (HGV)
  • पनडुब्बी-प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइलें (SLBM)
  • टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन्स

जैसी क्षमताओं का विकास किया है।

ऐसे में CVID लक्ष्य एक कूटनीतिक औपचारिकता बनकर रह गया था। ट्रंप का नया दस्तावेज़ इसे स्वीकार करता है।


2. 2026 की “कूटनीतिक खिड़की”

अगला वर्कर्स पार्टी कांग्रेस 2026 में होने की संभावना है। किम जोंग उन अपनी 15वीं शासन वर्षगांठ पर

  • आर्थिक रियायत,
  • प्रतिबंधों में आंशिक छूट,
  • या अमेरिका से किसी सुरक्षा गारंटी

की तलाश कर सकते हैं। ट्रंप प्रशासन इसी राजनीतिक समय-सीमा के अनुरूप अपनी नीति को अधिक लचीला बनाता दिखता है।


3. रूस–उत्तर कोरिया सैन्य गठजोड़ का उभार

2024–25 में रूस और डीपीआरके के बीच हुई व्यापक रक्षा संधि ने एशिया-प्रशांत सुरक्षा गणित को बदल दिया।
रूस द्वारा:

  • गोला-बारूद के लिए डीपीआरके पर निर्भरता,
  • यूक्रेन युद्ध में उत्तर कोरियाई सैन्य सहयोग,
  • साइबर और मिसाइल तकनीक में सहयोग

ने अमेरिका की चिंता बढ़ाई है।

यदि अमेरिका “निरस्त्रीकरण” पर ज़ोर देता रहा, तो यह उत्तर कोरिया को पूरी तरह रूस के शिविर में धकेल सकता है।
इसलिए वॉशिंगटन अब “हानि-नियंत्रण” (harm reduction) रणनीति अपना रहा है।


4. चीन कारक: एशियाई शक्ति-संतुलन की पुनर्संरचना

ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में चीन पर

  • व्यापार प्रतिबंध,
  • सैन्य दबाव,
  • तकनीकी अलगाव

को प्राथमिकता दे रहे हैं।
ऐसे में उत्तर कोरिया को पूर्ण रूप से अलग-थलग छोड़ना बीजिंग के लिए रणनीतिक वरदान बन सकता है।

अतः अमेरिका अब डीपीआरके को:

  • आंशिक रूप से अपनी कूटनीतिक पहुंच में लाने,
  • चीन पर उसकी निर्भरता कम करने,
  • और “तटस्थ-नियमन” (managed neutrality)

की दिशा में आगे बढ़ सकता है।


अमेरिकी नीति का नया ढांचा: निरस्त्रीकरण से जोखिम-नियंत्रण की ओर

CVID की विफलता से अमेरिका अब तीन नए विकल्पों पर विचार करता प्रतीत होता है:

1. शस्त्र नियंत्रण (Arms Control)

पूर्ण निरस्त्रीकरण की मांग छोड़कर

  • परीक्षणों पर रोक,
  • मिसाइल रेंज सीमाएं,
  • पारदर्शिता उपाय

जैसे समझौतों पर बात।

2. जोखिम न्यूनीकरण (Risk Reduction)

  • आकस्मिक युद्ध की संभावना कम करना,
  • सैन्य संचार चैनलों की पुनर्बहाली,
  • सीमित संघर्ष की रोकथाम।

3. शांति तंत्र (Peace Regime)

कोरियाई युद्ध को औपचारिक रूप से समाप्त करने की दिशा में
दीर्घकालिक वार्ताओं का ढांचा बन सकता है।

यह दृष्टिकोण वास्तविकता-आधारित और दीर्घकालिक रूप से अधिक स्थिर प्रतीत होता है।


भू-राजनीतिक निहितार्थ

1. कोरियाई प्रायद्वीप का सुरक्षा संतुलन बदलना

दक्षिण कोरिया अब अमेरिकी रणनीति में अस्पष्टता देख सकता है और अपनी स्वतंत्र सैन्य क्षमताओं—विशेषकर स्वदेशी परमाणु विकल्प—पर अधिक विचार कर सकता है।

2. जापान का सैन्य पुनरोदय

टोक्यो पहले से ही रिकॉर्ड रक्षा बजट और मिसाइल क्षमताओं को बढ़ा रहा है।
अमेरिका की नई नीति उसे और प्रोत्साहन दे सकती है।

3. चीन के लिए रणनीतिक दुविधा

परमाणु-सशस्त्र उत्तर कोरिया चीन के लिए लाभ भी है और बोझ भी।
अमेरिका द्वारा डीपीआरके को “मध्य-मार्गी” बनाना बीजिंग के हितों को चुनौती दे सकता है।

4. रूस–उत्तर कोरिया–चीन त्रिकोण का उभार

अमेरिकी नीति परिवर्तन इस त्रिकोणीय धुरी की मजबूती को चुनौती या पुनर्संतुलन दे सकता है।


निष्कर्ष

ट्रंप प्रशासन के Global Security Roadmap से “परमाणु निरस्त्रीकरण” का लक्ष्य हटाना अमेरिका की तीन दशक पुरानी नीति की औपचारिक समाप्ति है। यह बदलाव स्वीकार करता है कि उत्तर कोरिया अब एक स्थायी परमाणु शक्ति है, और उसे निरस्त्र करने की पारंपरिक नीति अप्रभावी रही है।

अमेरिका अब एक व्यावहारिक, जोखिम-प्रबंधन आधारित, और भू-राजनीतिक रूप से संतुलित नीति की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है।
यह परिवर्तन कोरियाई प्रायद्वीप, जापान–कोरिया–चीन त्रिकोण, और व्यापक हिंद-प्रशांत सुरक्षा ढांचे को अगले दशक में गहराई से प्रभावित करेगा।


With Reuters Inputs 

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