अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
India-China Relations Reimagined: From the 2020 Galwan Clash to the 2025 Tianjin Summit – A Geopolitical and Economic Reconciliation
भारत-चीन संबंधों का पुनरुद्धार: 2020 की सीमा झड़प से 2025 के तियानजिन शिखर सम्मेलन तक भूमिका 2020 की गलवान घाटी की झड़प के बाद भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों में जो दरार आई, वह न केवल सैन्य गतिरोध थी बल्कि राजनैतिक-आर्थिक व सामाजिक परिप्रेक्ष्य में भी गहरी प्रतिबिंबित हुई। पांच वर्षों के भीतर 2025 के तियानजिन शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बैठक ने दोनों देशों के व्यवहारात्मक पुन:निकटरण (pragmatic rapprochement) का संकेत दिया। यह लेख उस परिवर्तन के कारणों, प्रक्रियात्मक रूपरेखा तथा क्षेत्रीय और वैश्विक निहितार्थों का समग्र और विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। 1. 2020 का संकट: घटनाक्रम और प्रभाव जून 2020 में लद्दाख के गलवान घाटी में हुई हिंसक टकराव ने 1962 के बाद पहली बार दोनों सेनाओं के बीच घातक परिणाम दृष्टिगत किए। भारत की ओर से आधिकारिक रूप से घोषित मृत्यु-सांख्यिकियाँ व घटनाक्रम ने दोनों देशों के अंदर गहरे राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं उत्पन्न कर दीं — जनता में देशविरोधी भावनाएँ, चीनी ब्रांडों व सेवाओं के प्रति बहिष्कार की मुहिम, तथा...