अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
पाकिस्तान में अफगान शरणार्थियों की दुर्दशा: बदलता अमेरिका-पाकिस्तान संबंध और मानवता की परीक्षा (An analytical editorial for UPSC GS Paper 2 & IR) प्रस्तावना: भू-राजनीति और मानवता के बीच फंसे लोग 2021 में अमेरिका की अफगानिस्तान से वापसी के बाद जो राजनीतिक, मानवीय और सुरक्षा संकट उत्पन्न हुआ, वह अब केवल अफगान सीमाओं तक सीमित नहीं रहा है। पाकिस्तान में रह रहे लाखों अफगान शरणार्थी इस संकट का सबसे भीषण रूप झेल रहे हैं। हाल ही में पाकिस्तान द्वारा इन शरणार्थियों को बड़े पैमाने पर निर्वासित करने का निर्णय न केवल एक मानवीय त्रासदी को जन्म देता है, बल्कि यह बदलते अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों की जटिलता और वैश्विक उत्तरदायित्वों की कमजोर पड़ती भावना को भी उजागर करता है। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: पाकिस्तान और अफगान शरणार्थियों का लंबा रिश्ता अफगान शरणार्थियों की कहानी 1979 से शुरू होती है, जब सोवियत संघ के आक्रमण के बाद लाखों अफगान पाकिस्तान में शरण लेने को विवश हुए। पिछले चार दशकों में पाकिस्तान ने लगभग 40 लाख अफगानों को शरण दी—यह विश्व के सबसे लंबे शरणार्थी मेजबानी अनुभवों में से एक रहा। ह...