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Social Media Content Removal in 1 Hour: India’s New Digital Regulation, Free Speech Concerns and Policy Impact
सोशल मीडिया कंटेंट हटाने की 1 घंटे की समयसीमा: डिजिटल सुरक्षा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नियामक चुनौतियां प्रस्तावना डिजिटल युग में सूचना का प्रवाह जितना तेज हुआ है, उससे कहीं अधिक तेज़ी से उसके दुष्प्रभाव भी सामने आए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने जहां लोकतांत्रिक विमर्श को व्यापक बनाया है, वहीं फेक न्यूज, डीपफेक, घृणास्पद भाषण और गैर-सहमति आधारित निजी सामग्री के प्रसार ने गंभीर सामाजिक, नैतिक और सुरक्षा संबंधी चुनौतियाँ उत्पन्न की हैं। ऐसे समय में केंद्र सरकार द्वारा सोशल मीडिया पर “अवैध सामग्री” हटाने की समयसीमा को घटाकर एक घंटे करने का प्रस्ताव डिजिटल शासन के नए चरण का संकेत देता है—जहां नियंत्रण और स्वतंत्रता के बीच संतुलन की परीक्षा होगी। तेजी से बदलता डिजिटल परिदृश्य भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या अब एक अरब के पार पहुंच चुकी है। सूचना का यह लोकतंत्रीकरण एक ओर नागरिकों को सशक्त बनाता है, तो दूसरी ओर इसे दुरुपयोग के लिए भी खुला छोड़ देता है। एक वायरल पोस्ट कुछ ही मिनटों में लाखों लोगों तक पहुंच सकती है और यदि वह भ्रामक या हानिकारक हो, तो उसका प्रभाव दीर्घकालिक और...