भारत की गाजा शांति योजना में भागीदारी: ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में पर्यवेक्षक के रूप में भारत की कूटनीतिक उपस्थिति परिचय वर्ष 2026 में गाजा पट्टी का प्रश्न केवल इजराइल–फिलिस्तीन संघर्ष तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक शक्ति-संतुलन, मानवीय हस्तक्षेप और बहुपक्षीय कूटनीति की परीक्षा बन गया है। ऐसे समय में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा प्रारंभ किया गया ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) एक नई पहल के रूप में सामने आया है, जिसका घोषित उद्देश्य गाजा में युद्धविराम की निगरानी, पुनर्निर्माण, हमास के निरस्त्रीकरण तथा एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण व्यवस्था की स्थापना है। फरवरी 2026 में वाशिंगटन डीसी में आयोजित इस बोर्ड की पहली बैठक में भारत ने पूर्ण सदस्य के बजाय पर्यवेक्षक (Observer) के रूप में भाग लिया। यह निर्णय साधारण कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत की संतुलित और बहुस्तरीय विदेश नीति का प्रतीक है। ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पृष्ठभूमि: संयुक्त राष्ट्र से परे एक वैकल्पिक मंच? ट्रंप प्रशासन ने जनवरी 2026 में विश्व आर्थिक मंच (दावोस) के दौरान इस पहल की घोषणा की थी। इसे एक ऐसे मंच के रूप में...
ईरान में जारी संकट: आर्थिक अस्थिरता से राजनीतिक उथल-पुथल तक ईरान में 28 दिसंबर 2025 से शुरू हुई व्यापक विरोध प्रदर्शन अब तीन सप्ताह से अधिक समय तक जारी हैं। यह आंदोलन, जो प्रारंभ में मुद्रा रियाल की अभूतपूर्व गिरावट और आर्थिक संकट के विरुद्ध बाजारों में व्यापारियों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के रूप में उभरा था, अब पूरे देश में राजनीतिक मांगों के साथ एक गहन चुनौती में बदल चुका है। विभिन्न मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों की कार्रवाई में सैकड़ों से लेकर हजारों तक मौतें हुई हैं, जबकि हजारों लोग गिरफ्तार किए गए हैं। राष्ट्रव्यापी इंटरनेट ब्लैकआउट ने सूचना के प्रवाह को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, जिससे स्वतंत्र सत्यापन कठिन हो गया है। आर्थिक संकट की जड़ें और प्रदर्शन का प्रसार ईरान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों, आंतरिक प्रबंधकीय कमियों और क्षेत्रीय संघर्षों के दबाव में रही है। 2025 में रियाल का मूल्य 80-90 प्रतिशत तक गिरा, जिससे मुद्रास्फीति की दर 40 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गई। खाद्यान्न और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भारी वृद्धि ने आम नागरिकों को ...