अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
सनाए ताकाइची का ऐतिहासिक उदय: जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री और रूढ़िवादी पुनर्जनन की शुरुआत सार 21 अक्टूबर 2025 को जापान ने अपने इतिहास में एक नया अध्याय लिखा — जब सनाए ताकाइची ने संसद के निचले सदन में बहुमत पाकर देश की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। यह केवल लैंगिक समानता का प्रतीकात्मक क्षण नहीं था, बल्कि जापान की राजनीति में एक वैचारिक मोड़ का भी संकेत था। शिंजो आबे की शिष्या और कट्टर रूढ़िवादी मानी जाने वाली ताकाइची का सत्ता में आना एक ऐसे समय पर हुआ है जब देश मुद्रास्फीति, कमजोर येन और सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है। उनके नेतृत्व को “नए जापानी राष्ट्रवाद” के रूप में देखा जा रहा है — जिसमें आर्थिक पुनरुत्थान और सामरिक दृढ़ता दोनों का मिश्रण है। परिचय जापान की राजनीति लंबे समय तक एक स्थिर, पुरुष-प्रधान और नौकरशाही-आधारित ढांचे में जकड़ी रही है। लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) की पारंपरिक नेतृत्व संस्कृति में महिला नेताओं की भूमिका सीमित रही है। ऐसे में 64 वर्षीय सनाए ताकाइची का प्रधानमंत्री बनना न केवल प्रतीकात्मक उपलब्धि है, बल्कि जापान की रूढ़िवादी राजनीति के...