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भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता: “सभी सौदों की माँ” की ओर एक ऐतिहासिक कदम परिचय दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) के 2026 सत्र में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन का एक वाक्य वैश्विक मीडिया की सुर्खियों में छा गया—उन्होंने भारत–यूरोपीय संघ (EU) के प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते को “मदर ऑफ ऑल डील्स” यानी “सभी सौदों की माँ” कहा। यह कोई साधारण राजनयिक अतिशयोक्ति नहीं थी, बल्कि उस विशाल आर्थिक और रणनीतिक संभावना की ओर संकेत था, जो इस समझौते के जरिए साकार हो सकती है। यह समझौता लगभग 2 अरब लोगों के बाजार को जोड़ देगा और वैश्विक जीडीपी के लगभग एक चौथाई हिस्से को एक साझा व्यापारिक ढांचे में समेटेगा। एक ओर भारत, जो दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में है, और दूसरी ओर यूरोपीय संघ, जो तकनीक, विनिर्माण, हरित ऊर्जा और उच्च मानकों वाले नियामक ढांचे के लिए जाना जाता है—इन दोनों का मिलन वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक नया संतुलन पैदा कर सकता है। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब वैश्विक व्यापार व्यवस्था अस्थिर दौर से गुजर रही है—संरक्षणवाद ब...