हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स की सदस्यता का अंत: ब्रिटिश लोकतंत्र के विकास का एक निर्णायक अध्याय ब्रिटेन की संसदीय परंपरा विश्व की सबसे पुरानी और स्थायी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है। किंतु इस गौरवपूर्ण परंपरा के भीतर कुछ ऐसे तत्व भी रहे हैं जो आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ लंबे समय से असंगत माने जाते रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख था हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स (Hereditary Peers) की सदस्यता—एक ऐसी व्यवस्था जिसके अंतर्गत कुलीन परिवारों के सदस्य केवल अपने जन्म के आधार पर संसद के ऊपरी सदन में स्थान प्राप्त करते थे। मार्च 2026 में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित Hereditary Peers Bill इस व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इसके साथ ही सदियों से चली आ रही वह परंपरा समाप्त हो जाएगी जिसके अंतर्गत राजनीतिक शक्ति का एक हिस्सा जन्माधिकार से निर्धारित होता था। यह सुधार न केवल एक संस्थागत परिवर्तन है, बल्कि ब्रिटिश लोकतंत्र के क्रमिक आधुनिकीकरण की उस दीर्घकालिक प्रक्रिया का हिस्सा है जिसमें सामंती विरासतों को धीरे-धीरे लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरू...
भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता: “सभी सौदों की माँ” की ओर एक ऐतिहासिक कदम परिचय दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) के 2026 सत्र में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन का एक वाक्य वैश्विक मीडिया की सुर्खियों में छा गया—उन्होंने भारत–यूरोपीय संघ (EU) के प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते को “मदर ऑफ ऑल डील्स” यानी “सभी सौदों की माँ” कहा। यह कोई साधारण राजनयिक अतिशयोक्ति नहीं थी, बल्कि उस विशाल आर्थिक और रणनीतिक संभावना की ओर संकेत था, जो इस समझौते के जरिए साकार हो सकती है। यह समझौता लगभग 2 अरब लोगों के बाजार को जोड़ देगा और वैश्विक जीडीपी के लगभग एक चौथाई हिस्से को एक साझा व्यापारिक ढांचे में समेटेगा। एक ओर भारत, जो दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में है, और दूसरी ओर यूरोपीय संघ, जो तकनीक, विनिर्माण, हरित ऊर्जा और उच्च मानकों वाले नियामक ढांचे के लिए जाना जाता है—इन दोनों का मिलन वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक नया संतुलन पैदा कर सकता है। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब वैश्विक व्यापार व्यवस्था अस्थिर दौर से गुजर रही है—संरक्षणवाद ब...