अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
अफगानिस्तान में गहराता संकट: वैश्विक समुदाय के लिए चेतावनी अफगानिस्तान आज एक अभूतपूर्व संकट के दौर से गुजर रहा है, जहां तालिबान का कट्टरपंथी शासन, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल अलगाव और आर्थिक पतन ने मिलकर देश को तबाही के कगार पर ला खड़ा किया है। यह संकट केवल अफगान नागरिकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक समुदाय के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि यदि तत्काल और समन्वित कार्रवाई नहीं की गई, तो इसके परिणाम क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं। मानवाधिकारों पर हमला और डिजिटल दमन 2021 में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद से अफगानिस्तान में मानवाधिकारों का व्यवस्थित उल्लंघन हो रहा है। महिलाओं और लड़कियों पर लगाए गए कठोर प्रतिबंध—जैसे माध्यमिक और उच्च शिक्षा पर रोक, रोजगार और आवागमन की स्वतंत्रता पर पाबंदी, और सार्वजनिक स्थानों पर चेहरा ढकने का आदेश—ने समाज को दशकों पीछे धकेल दिया है। तालिबान का नया कानून, जो "सदाचार की प्रोत्साहन और व्यभिचार की रोकथाम" के नाम पर महिलाओं की आवाज को सार्वजनिक रूप से दबाता है, लैंगिक भेदभाव का एक क्रूर उदाहरण है। पत्रकारों, कार्यकर्ताओं और पू...