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Assam Tea Garden Workers Land Rights: Historical Justice or Pre-Election Strategy? A Critical Analysis
असम के चाय बागान कामगारों को भूमि पट्टा वितरण: सामाजिक न्याय, राजनीतिक समय-चयन और संरचनात्मक बदलाव की कसौटी प्रस्तावना मार्च 2026 में Narendra Modi द्वारा Guwahati में असम के चाय बागान कामगारों को भूमि पट्टे वितरित करने की पहल केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय राज्य और उसके ऐतिहासिक दायित्वों के बीच संबंधों की पुनर्समीक्षा का क्षण है। इसे “ऐतिहासिक अन्याय” के परिमार्जन के रूप में प्रस्तुत किया गया, परंतु इसके साथ ही यह प्रश्न भी उभरता है कि क्या यह कदम वास्तव में संरचनात्मक असमानताओं को दूर करने का प्रयास है, या फिर चुनावी राजनीति के तात्कालिक दबावों का परिणाम। इस बहस का उत्तर सरल नहीं है। इसके लिए हमें औपनिवेशिक इतिहास, उत्तर-औपनिवेशिक राज्य की नीतिगत प्राथमिकताओं, और समकालीन राजनीतिक अर्थशास्त्र—तीनों के अंतःसंबंधों को समझना होगा। औपनिवेशिक विरासत और “स्थायी अस्थायित्व” का निर्माण असम के चाय बागान कामगारों की कहानी 19वीं शताब्दी के औपनिवेशिक श्रम प्रवास से शुरू होती है। ब्रिटिश शासन के दौरान ‘indentured labour’ प्रणाली के तहत झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के आदिवासी क...