हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स की सदस्यता का अंत: ब्रिटिश लोकतंत्र के विकास का एक निर्णायक अध्याय ब्रिटेन की संसदीय परंपरा विश्व की सबसे पुरानी और स्थायी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है। किंतु इस गौरवपूर्ण परंपरा के भीतर कुछ ऐसे तत्व भी रहे हैं जो आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ लंबे समय से असंगत माने जाते रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख था हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स (Hereditary Peers) की सदस्यता—एक ऐसी व्यवस्था जिसके अंतर्गत कुलीन परिवारों के सदस्य केवल अपने जन्म के आधार पर संसद के ऊपरी सदन में स्थान प्राप्त करते थे। मार्च 2026 में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित Hereditary Peers Bill इस व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इसके साथ ही सदियों से चली आ रही वह परंपरा समाप्त हो जाएगी जिसके अंतर्गत राजनीतिक शक्ति का एक हिस्सा जन्माधिकार से निर्धारित होता था। यह सुधार न केवल एक संस्थागत परिवर्तन है, बल्कि ब्रिटिश लोकतंत्र के क्रमिक आधुनिकीकरण की उस दीर्घकालिक प्रक्रिया का हिस्सा है जिसमें सामंती विरासतों को धीरे-धीरे लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरू...
बिहार में माइक्रोफाइनेंस कर्जजाल: NRLM की असफलता या सिस्टमिक समस्या? भूमिका: कर्ज का पहाड़ और मिटती उम्मीदें मुजफ्फरपुर जिले की 38 वर्षीय रेखा देवी कभी नहीं सोच सकती थीं कि अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए लिया गया 50,000 रुपये का छोटा-सा कर्ज कुछ ही वर्षों में 3.2 लाख रुपये के बवंडर में बदल जाएगा। हर महीने 8,000 रुपये चुकाने के बावजूद उनका कर्ज घटने के बजाय लगातार बढ़ रहा है। ब्याज दर? 28–32 प्रतिशत प्रति वर्ष। रेखा अकेली नहीं हैं— CRISIL-MFIN की रिपोर्ट बताती है कि बिहार की 68% SHG महिलाएँ इसी तरह के कर्ज चक्र में फँस चुकी हैं , जहाँ से बाहर निकलना लगभग असंभव होता जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है—क्या यह NRLM की विफलता है या पूरी माइक्रोफाइनेंस व्यवस्था की गहरी सिस्टमिक समस्या ? माइक्रोफाइनेंस मॉडल: सशक्तिकरण से कर्जजाल तक भारत में माइक्रोफाइनेंस की संरचना तीन स्तरों पर आधारित है— SHG (Self-Help Groups) : 10–15 महिलाओं का बचत समूह MFI (Microfinance Institutions) : SHG को बड़ा कर्ज देने वाली संस्थाएँ बैंक : PSL के अंतर्गत MFIs को पूंजी उपलब्ध करवाते हैं बैंक MFIs को 8–12% ब...