अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
वैश्विक तापमान में अभूतपूर्व वृद्धि: 2025 का तीसरा सबसे गर्म वर्ष परिचय वर्ष 2025 को वैश्विक तापमान के रिकॉर्ड में तीसरा सबसे गर्म वर्ष के रूप में दर्ज किया गया है। यूरोपीय संघ के Copernicus Climate Change Service (C3S) के अनुसार, 2025 का औसत वैश्विक तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर (1850–1900) से लगभग 1.47 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। यह 2023 से मात्र 0.01 डिग्री सेल्सियस कम था, जबकि 2024 अब तक का सबसे गर्म वर्ष रहा। इससे भी अधिक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि 2023 से 2025 की तीन वर्षीय अवधि में औसत तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया, जो रिकॉर्ड में अब तक की सबसे लंबी ऐसी अवधि है जब तापमान इस महत्वपूर्ण सीमा को लगातार पार करता रहा। यह स्थिति स्पष्ट रूप से बताती है कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की आशंका नहीं, बल्कि वर्तमान की वास्तविकता बन चुका है, जहां मानवीय गतिविधियां पृथ्वी के तापीय संतुलन को स्थायी रूप से प्रभावित कर रही हैं। वैज्ञानिक पृष्ठभूमि वैश्विक तापमान की तुलना आम तौर पर पूर्व-औद्योगिक काल (1850–1900) से की जाती है, जब कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्...