हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स की सदस्यता का अंत: ब्रिटिश लोकतंत्र के विकास का एक निर्णायक अध्याय ब्रिटेन की संसदीय परंपरा विश्व की सबसे पुरानी और स्थायी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है। किंतु इस गौरवपूर्ण परंपरा के भीतर कुछ ऐसे तत्व भी रहे हैं जो आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ लंबे समय से असंगत माने जाते रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख था हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स (Hereditary Peers) की सदस्यता—एक ऐसी व्यवस्था जिसके अंतर्गत कुलीन परिवारों के सदस्य केवल अपने जन्म के आधार पर संसद के ऊपरी सदन में स्थान प्राप्त करते थे। मार्च 2026 में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित Hereditary Peers Bill इस व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इसके साथ ही सदियों से चली आ रही वह परंपरा समाप्त हो जाएगी जिसके अंतर्गत राजनीतिक शक्ति का एक हिस्सा जन्माधिकार से निर्धारित होता था। यह सुधार न केवल एक संस्थागत परिवर्तन है, बल्कि ब्रिटिश लोकतंत्र के क्रमिक आधुनिकीकरण की उस दीर्घकालिक प्रक्रिया का हिस्सा है जिसमें सामंती विरासतों को धीरे-धीरे लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरू...
Delhi High Court, DU and RTI Case: Objection on Delay in Appeal Over PM Modi’s Degree and Transparency vs Privacy Debate
दिल्ली उच्च न्यायालय, आरटीआई और प्रधानमंत्री की शैक्षणिक योग्यता पारदर्शिता बनाम गोपनीयता का संवैधानिक द्वंद्व भूमिका सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 भारतीय लोकतंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही का एक सशक्त साधन है। किंतु जब यह अधिकार संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों से जुड़ी सूचनाओं तक पहुँचता है, तब निजता, संस्थागत स्वायत्तता और सार्वजनिक हित के बीच संतुलन का प्रश्न उभरता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्नातक डिग्री से संबंधित सूचना के प्रकटीकरण को लेकर चल रहा विवाद इसी संतुलन की कसौटी पर है। हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मामले में दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) को तीन सप्ताह का समय देते हुए अपील में हुई देरी पर ‘आपत्ति दाखिल’ करने को कहा है , जिससे यह मामला और अधिक विधिक व संवैधानिक महत्व ग्रहण कर लेता है। प्रकरण की पृष्ठभूमि एक आरटीआई आवेदन के माध्यम से प्रधानमंत्री की बी.ए. डिग्री से संबंधित विवरण मांगा गया। केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने सूचना उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। दिल्ली विश्वविद्यालय ने इस आदेश के विरुद्ध अपील दायर की, किंतु यह अपील निर्धारित समय-सीमा के बा...